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नीट यूजी पेपर लीक मामले के आरोपी धनंजय लोखंडे को तिहाड़ जेल में हनुमान चालीसा और श्रीमंत योगी पढ़ने की मिली अदालत से अनुमतिभारत
2 सित॰ 2026, 3:19 pm (41 मिनट पहले)· 2

नीट यूजी पेपर लीक मामले के आरोपी धनंजय लोखंडे को तिहाड़ जेल में हनुमान चालीसा और श्रीमंत योगी पढ़ने की मिली अदालत से अनुमति

दिल्ली की विशेष अदालत ने 2026 नीट यूजी पेपर लीक के आरोपी धनंजय लोखंडे की अर्जी स्वीकार करते हुए तिहाड़ जेल में धार्मिक पाठ और साहित्यिक किताबें प्राप्त करने की अनुमति दे दी है। वहीं कोर्ट ने सह-आरोपियों की दस्तावेज देखने के लिए अतिरिक्त समय मांगने की याचिका खारिज कर दी है।

वर्ष 2026 की नीट यूजी परीक्षा के बहुचर्चित कथित प्रश्नपत्र लीक मामले में गिरफ्तार आरोपी धनंजय लोखंडे इन दिनों तिहाड़ जेल के भीतर अपनी एक खास मांग को लेकर सुर्खियों में आ गया है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो द्वारा प्रश्नपत्र लीक नेटवर्क की मुख्य कड़ी बताए गए लोखंडे ने अदालत का दरवाजा खटखटाकर जेल के अंदर धार्मिक ग्रंथ और ऐतिहासिक साहित्य पढ़ने की अनुमति मांगी थी। दिल्ली की एक विशेष अदालत ने आरोपी की इस याचिका पर सुनवाई करते हुए जेल प्रशासन को जरूरी सुरक्षा मानकों के तहत पुस्तकें उपलब्ध कराने का आदेश दिया है। इस न्यायिक फैसले के बाद तिहाड़ में बंद लोखंडे को अपने परिवार या कानूनी प्रतिनिधि के माध्यम से मांगी गई धार्मिक और साहित्यिक प्रतियां प्राप्त हो सकेंगी।

हनुमान चालीसा और छत्रपति शिवाजी की जीवनी पढ़ने की मांगी इजाजत

जेल की सलाखों के पीछे बंद आरोपी धनंजय लोखंडे ने अदालत के सामने अपनी अध्ययन संबंधी पसंद स्पष्ट रूप से रखी थी। उसने अपनी याचिका में हनुमान चालीसा और मंगल स्तोत्र की मुद्रित प्रतियों की मांग की थी। इसके अतिरिक्त उसने प्रसिद्ध मराठी साहित्यकार रंजीत देसाई द्वारा छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन पर लिखी गई चर्चित जीवनीपरक कृति श्रीमंत योगी भी उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था। सीबीआई की आरोपपत्र में जिस व्यक्ति पर परीक्षा की शुचिता भंग करने और अवैध नेटवर्क चलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का आरोप दर्ज है, उसने अब अपना समय धार्मिक अनुष्ठान और ऐतिहासिक गाथाओं के पठन-पाठन में बिताने की इच्छा जताई है।

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सुरक्षा जांच और जेल नियमावली के तहत ही मिलेंगी पुस्तकें

मामले की सुनवाई के दौरान विशेष न्यायाधीश अजय गुप्ता ने आरोपी के वकील द्वारा प्रस्तुत तर्कों और वर्तमान परिस्थितियों पर विचार किया। अदालत ने आरोपी की अध्ययन सामग्री की मांग को पूर्णतः अनुचित न मानते हुए राहत प्रदान की। हालांकि कोर्ट ने जेल प्रशासन को निर्देश दिए कि कोई भी पुस्तक बिना गहन जांच-पड़ताल के जेल परिसर के भीतर प्रवेश नहीं करेगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपी के परिजन या वकील जो पुस्तकें लेकर आएंगे, उनकी कड़ी सुरक्षा चेकिंग की जाएगी और तिहाड़ जेल नियमावली के सभी प्रावधानों का सख्ती से पालन किया जाएगा। सुरक्षा स्वीकृति मिलने के पश्चात ही किताबें आरोपी को सौंपी जाएंगी।

महाराष्ट्र से हरियाणा और सीकर तक फैला था कथित पेपर लीक का ताना-बाना

सीबीआई द्वारा दाखिल आरोपपत्र के अनुसार, धनंजय लोखंडे इस पूरे अंतरराज्यीय पेपर लीक कांड का एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्तंभ था। जांच एजेंसी का दावा है कि लोखंडे ने अपने सहयोगियों को महाराष्ट्र के पुणे शहर स्थित कारोबारी महिला मनीषा वाघमारे के पास प्रश्नपत्र हासिल करने के लिए भेजा था। जांच में यह तथ्य सामने आया कि मनीषा वाघमारे को यह प्रश्नपत्र राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के पैनल में शामिल विषय विशेषज्ञों के माध्यम से प्राप्त हुआ था। इसके बाद लीक हुआ प्रश्नपत्र विभिन्न व्यक्तियों के हाथों से स्थानांतरित होता हुआ राजस्थान के सीकर जिले में स्थित बीवाल परिवार तक पहुंचाया गया था।

तेरह आरोपियों के खिलाफ दाखिल हो चुका है आरोपपत्र

सीबीआई ने इस वृहद नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए कुल 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया है और उनके खिलाफ अदालत में प्रभार पत्र दायर किया है। गिरफ्तार किए गए लोगों में विषय विशेषज्ञ पीवी कुलकर्णी, मनीषा हवालदार और मनीषा मंधारे जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। केंद्रीय जांच एजेंसी का कहना है कि महाराष्ट्र, हरियाणा और राजस्थान तक फैले इस नेटवर्क ने लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य को दांव पर लगाने का प्रयास किया था। फिलहाल सभी आरोपी न्यायिक हिरासत के तहत जेल में बंद हैं और कानूनी प्रक्रियाओं का सामना कर रहे हैं।

दस्तावेजों के निरीक्षण के लिए अतिरिक्त समय देने से कोर्ट का इनकार

इसी सुनवाई के दौरान मामले की अन्य सह-आरोपियों मनीषा मंधारे और मनीषा हवालदार की ओर से एक अलग आवेदन प्रस्तुत किया गया। उनके वकीलों ने अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत गैर-भरोसेमंद दस्तावेजों और सामग्री का गहन अवलोकन करने के लिए अदालत से अतिरिक्त समय की मांग की थी। हालांकि सीबीआई की ओर से उपस्थित अधिवक्ताओं वीके पाठक और अर्जुन आनंद ने इस मांग का कड़ा विरोध किया। जांच एजेंसी के वकीलों ने अदालत को सूचित किया कि आरोपियों को पहले ही पर्याप्त अवसर दिए जा चुके हैं और उन्होंने 24 तथा 25 अगस्त को दो-दो घंटे तक दस्तावेजों की बारीकी से जांच की थी। इसके अलावा हवालदार के कानूनी प्रतिनिधि ने 25, 27 और 31 अगस्त को कुल मिलाकर छह से सात घंटे तक इन साक्ष्यों का निरीक्षण किया था।

संशोधित कानून के तहत रोजाना सुनवाई का आदेश

आरोपियों की अतिरिक्त समय मांगने की दलील को खारिज करते हुए विशेष न्यायाधीश अजय गुप्ता ने स्पष्ट किया कि याचिका में कोई ठोस और पर्याप्त आधार नजर नहीं आता। अदालत ने इस बात पर विशेष बल दिया कि संशोधित कानूनी प्रावधानों के अनुसार ऐसे गंभीर मामलों का विचारण बिना किसी विलंब के दैनिक आधार पर संचालित किया जाना चाहिए। कोर्ट के इस रुख से साफ हो गया है कि मुकदमे की प्रक्रिया को लंबा खींचने की इजाजत किसी भी पक्ष को नहीं दी जाएगी। एक तरफ जहां सीबीआई अपनी जांच और साक्ष्यों को अदालत के सामने मजबूत करने में जुटी है, वहीं आरोपी की धार्मिक और साहित्यिक किताबों की मांग ने इस हाई-प्रोफाइल मामले में एक नया मोड़ जोड़ दिया है।

सवाल-जवाब

नीट यूजी पेपर लीक मामले में आरोपी धनंजय लोखंडे ने अदालत से क्या मांग की थी?
धनंजय लोखंडे ने तिहाड़ जेल में पढ़ने के लिए हनुमान चालीसा, मंगल स्तोत्र और मराठी लेखक रंजीत देसाई की छत्रपति शिवाजी पर लिखी किताब 'श्रीमंत योगी' उपलब्ध कराने की मांग की थी।
अदालत ने आरोपी की किताबों वाली याचिका पर क्या आदेश दिया?
विशेष न्यायाधीश अजय गुप्ता ने परिवार या वकील के माध्यम से सुरक्षा जांच और जेल मैनुअल के नियमों का पालन करते हुए किताबें जेल में देने की अनुमति दी।
सीबीआई के अनुसार पेपर लीक नेटवर्क कैसे काम कर रहा था?
सीबीआई के मुताबिक एनटीए पैनल से जुड़े विषय विशेषज्ञों से पेपर पुणे की कारोबारी मनीषा वाघमारे तक पहुंचा, जहां से लोखंडे के सहयोगियों के जरिए इसे सीकर के बीवाल परिवार तक पहुंचाया गया।
अदालत ने सह-आरोपियों की किस मांग को खारिज कर दिया?
कोर्ट ने मनीषा मंधारे और मनीषा हवालदार की दस्तावेज देखने के लिए अतिरिक्त समय देने की मांग खारिज कर दी, क्योंकि वे पहले ही कई घंटों तक निरीक्षण कर चुकी थीं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·23 मिनट पहले

नीट पेपर लीक जैसे गंभीर अंतरराज्यीय संगठित अपराध के मामलों में आरोपियों द्वारा इस प्रकार का धार्मिक व साहित्यिक रुख अपनाना अक्सर जांच की दिशा से ध्यान भटकाने या जेल में मनोवैज्ञानिक दबाव कम करने की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा देखा जाता है। हालांकि अदालत ने तिहाड़ जेल नियमावली के तहत सुरक्षा जांच की जो शर्त रखी है, वह प्रशासनिक दृष्टिकोण से आवश्यक थी। अब इस मामले की आगामी सुनवाई में केंद्रीय एजेंसी द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और महाराष्ट्र से सीकर तक फैले इस सिंडिकेट के अन्य बचे हुए मोहरों की गिरफ्तारी पर अदालत का अगला रुख बेहद महत्वपूर्ण होगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·22 मिनट पहले

रोहन वर्मा के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए यह स्पष्ट है कि इस हाई-प्रोफाइल मामले में सीबीआई के चार्जशीट के दायरे और अंतरराज्यीय सिंडिकेट के नेटवर्क पर अदालत की आगामी सुनवाइयां केंद्रीय भूमिका निभाएंगी। महाराष्ट्र के पुणे से लेकर हरियाणा और सीकर तक फैले इस कथित रैकेट में जिस तरह मनीषा वाघमारे और विषय विशेषज्ञों की संलिप्तता सामने आई है, उससे साफ है कि केंद्रीय एजेंसी के लिए वित्तीय ट्रेल और डिजिटल साक्ष्यों का परीक्षण ही इस मुकदमे की दिशा तय करेगा। कानूनी जानकारों की नजर अब इस बात पर होगी कि अदालत सह-आरोपियों द्वारा दस्तावेजों के निरीक्षण से जुड़े मामलों और मुख्य साजिश के अन्य कड़ियों पर क्या रुख अपनाती है।

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