उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के महाराजपुर थाना क्षेत्र में रविवार शाम एक महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद भारी हंगामा देखने को मिला। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद मृतका के मायके वाले उसके शव को लेकर घर लौट रहे थे, तभी रास्ते में ससुराल पक्ष के लोगों के साथ उनका गंभीर विवाद हो गया। इसी रंजिश और हंगामे के चलते परिजनों तथा स्थानीय लोगों ने कानपुर-प्रयागराज हाईवे पर शव को बीच सड़क पर रखकर यातायात पूरी तरह से बाधित कर दिया। सड़क पर जाम लगने से वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और दोनों तरफ आवाजाही ठप हो गई।
शव रखकर प्रदर्शन और पुलिस पर हमला
जब स्थानीय पुलिस को इस सड़क जाम की सूचना मिली, तो अधिकारियों का दल तुरंत मौके पर पहुंचा और प्रदर्शनकारियों को समझाने-बुझाने का प्रयास शुरू किया। पुलिस ने लोगों से आग्रह किया कि वे शव को सड़क से हटा लें ताकि सुचारू रूप से यातायात बहाल किया जा सके। हालांकि, स्थिति उस समय नियंत्रण से बाहर हो गई जब पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झड़प और बहस शुरू हो गई। देखते ही देखते भीड़ में शामिल उग्र लोगों ने पुलिस बल पर ईंट-पत्थर बरसाने शुरू कर दिए। इस अचानक हुए पथराव की घटना से मौके पर अफरातफरी मच गई और दो इंस्पेक्टरों समेत कुल तीन पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए।
घटना की पृष्ठभूमि और पारिवारिक विवाद
यह पूरा विवाद शेखपुर गांव की रहने वाली 32 वर्षीय महिला माला की मौत से जुड़ा हुआ है। मृतका की शादी लगभग आठ वर्ष पूर्व लालूपुर गांव निवासी मुन्ना निषाद के साथ संपन्न हुई थी और दंपति के दो बच्चे भी हैं। परिजनों के अनुसार, शनिवार को माला की तबियत खराब हो गई थी, जिसके बाद उनके एक रिश्तेदार शनि ने उन्हें दवा दिलवाई और दोपहर करीब 3 बजे ससुराल छोड़कर वापस चले गए। इसके करीब एक घंटे बाद मृतका के पति ने मायके पक्ष को फोन करके सूचना दी कि महिला ने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली है। इस मनहूस खबर को सुनकर मायके वाले तुरंत ससुराल पहुंचे, जहां उन्होंने माला का शव घर के अंदर फंदे से लटका हुआ पाया। इसके बाद पुलिस और फॉरेंसिक यूनिट को सूचित किया गया, जिन्होंने घटनास्थल की बारीकी से जांच-पड़ताल करने के बाद शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया था।
भारी पुलिस बल की तैनाती और लाठीचार्ज
रविवार की शाम जब पोस्टमार्टम के बाद शव को वापस लाया जा रहा था, तब मायके पक्ष ने आरोप लगाया कि पुलिस ने ससुराल वालों के खिलाफ कोई सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं की है। इसी आक्रोश में उन्होंने हाईवे पर शव रखकर प्रदर्शन किया। पुलिसकर्मियों पर हुए हमले की खबर मिलते ही एडीसीपी शिवा सिंह और एसीपी आशुतोष सिंह समेत कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। हालात की गंभीरता को भांपते हुए चार थानों की फोर्स के साथ-साथ पीएसी की एक टुकड़ी को भी तुरंत बुलाया गया। बिगड़ते हालातों को काबू में करने के लिए पुलिस ने अंततः लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया और भीड़ को तितर-बितर कर हाईवे से खदेड़ दिया, जिसके बाद यातायात को सुचारु कराया जा सका।
प्रशासनिक कार्रवाई और हिरासत
पूर्वी जोन के डीसीपी सत्यजीत गुप्ता ने इस मामले की जानकारी देते हुए बताया कि विरोध प्रदर्शन के दौरान कुछ लोग, जिनमें महिलाएं और पुरुष दोनों शामिल थे, कथित तौर पर नशे की हालत में थे। इसी भीड़ ने पुलिस टीम पर अचानक पथराव कर दिया जिसमें दो से तीन पुलिसकर्मियों को चोटें आईं। घायल सभी पुलिसकर्मियों को तुरंत प्राथमिक उपचार के लिए कांशीराम अस्पताल भेजा गया, जहां से इलाज के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल गई। पुलिस ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए मौके से पांच संदिग्धों को हिरासत में ले लिया है। मृतका के परिवार की औपचारिक शिकायत के आधार पर संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और वीडियो फुटेज के आधार पर पथराव तथा हाईवे जाम करने वाले अन्य उपद्रवियों की पहचान की जा रही है।
























