उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर में साइबर अपराधियों ने एक दुस्साहसिक वारदात को अंजाम देते हुए केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सी-पीडब्ल्यूडी) के एक सेवानिवृत्त अधिकारी को अपने शिकंजे में ले लिया। जालसाजों ने फर्जी जांच एजेंसियों और पुलिस का खौफ दिखाकर बुजुर्ग अधिकारी को लगातार 12 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट में रखा और उनके अलग-अलग बैंक खातों से कुल 1 करोड़ 83 लाख रुपये की विशाल रकम विभिन्न खातों में ट्रांसफर करा ली। ठगों ने मनी लॉन्ड्रिंग के मनगढ़ंत केस में फंसाने, तत्काल गिरफ्तारी करने और अदालत से उम्रकैद या फांसी जैसी कड़ी सजा दिलवाने का डर दिखाकर इस पूरी वारदात को अंजाम दिया। लगातार मिल रही धमकियों और सरकारी मुहर लगे फर्जी दस्तावेजों के कारण पीड़ित अफसर बुरी तरह घबरा गए और उन्होंने कई दिनों तक इस खौफनाक आपबीती की भनक अपने परिवार के सदस्यों तक को नहीं लगने दी।
क्रेडिट कार्ड के फर्जी ट्रांजेक्शन से शुरू हुआ ठगी का जाल
साइबर अपराध का यह सनसनीखेज मामला कानपुर के कल्याणपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत आवास विकास नंबर-1 स्थित सत्यम विहार इलाके से सामने आया है। यहां रहने वाले 65 वर्षीय सुभाष चंद्र दोहरे सी-पीडब्ल्यूडी से उच्च पद से सेवानिवृत्त अधिकारी हैं। पीड़ित अधिकारी द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, जालसाजी का यह घटनाक्रम 13 जुलाई को शुरू हुआ था। उस दिन सुभाष चंद्र के मोबाइल फोन पर एक अज्ञात नंबर से कॉल आई। फोन करने वाले व्यक्ति ने दावा किया कि उनके नाम पर एक नया क्रेडिट कार्ड जारी किया गया है, जिससे 1 लाख रुपये से अधिक की खरीदारी की गई है। जब सुभाष चंद्र ने किसी भी प्रकार का क्रेडिट कार्ड बनवाने या उसका इस्तेमाल करने से साफ इनकार कर दिया, तो कॉल करने वाले ने बात खत्म कर दी। हालांकि, यह महज एक शुरुआती जाल था। अगले दिन यानी 14 जुलाई को उनके पास दोबारा एक फोन आया, जिसने पूरी घटना को गंभीर मोड़ दे दिया।
मुंबई पुलिस और ईडी का फर्जी अफसर बनकर दी फांसी की धमकी
14 जुलाई को आई दूसरी कॉल में फोन करने वाले ने खुद को मुंबई के बांद्रा पुलिस स्टेशन का वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी सुनील कुमार गौतम बताया। फर्जी पुलिस अधिकारी ने सुभाष चंद्र को डराते हुए कहा कि संदीप नाम के एक अंतरराष्ट्रीय अपराधी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध वित्तीय लेनदेन के बड़े मामले में उनका नाम सामने आया है। ठगों ने पीड़ित को भरोसा दिलाया कि उनके नाम पर खुले बैंक खातों का इस्तेमाल गैरकानूनी गतिविधियों में हुआ है। साइबर अपराधियों ने बुजुर्ग अधिकारी पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने के लिए व्हाट्सऐप पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की मुहर और पत्र शीर्ष वाले फर्जी कानूनी दस्तावेज भेजे। इन नकली अदालती और जांच पत्रों में सुभाष चंद्र दोहरे का नाम प्रमुखता से दर्ज था। इसके साथ ही आरोपियों ने उन्हें वीडियो कॉल पर भी लिया। वीडियो कॉल के दौरान ठगों ने पीछे का माहौल बिल्कुल किसी वास्तविक पुलिस स्टेशन और सरकारी जांच एजेंसी के कार्यालय जैसा बना रखा था, जहां वर्दीधारी लोग और फाइलें दिख रही थीं। इससे पीड़ित का संदेह पूरी तरह खत्म हो गया और वे गहरे खौफ में आ गए।
12 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट रखकर ऐंठे 1.83 करोड़ रुपये
ठगों ने सुभाष चंद्र को सख्त हिदायत दी कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा और अति गोपनीय जांच से जुड़ा मामला है, इसलिए इसके बारे में पत्नी, बच्चों या किसी भी परिचित को जानकारी नहीं दी जानी चाहिए। यदि उन्होंने यह बात किसी से साझा की, तो उन्हें तुरंत गिरफ्तार कर जेल भेज दिया जाएगा और मामले की गंभीरता को देखते हुए फांसी या उम्रकैद की सजा हो सकती है। जांच के नाम पर कमरे में बंद रहने और लगातार कैमरे के सामने मौजूद रहने की इसी स्थिति को डिजिटल अरेस्ट कहा जाता है। 14 जुलाई से शुरू होकर अगले 12 दिनों तक पीड़ित अधिकारी ठगों के बताए निर्देशों का पालन करते रहे। जालसाजों ने खातों के सत्यापन और रकम को 'वैध' साबित करने के नाम पर पीड़ित से अलग-अलग बैंक खातों में कुल 1 करोड़ 83 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि ट्रांसफर करवा ली। ठगों ने यह झूठा आश्वासन भी दिया था कि भारतीय रिजर्व बैंक और ईडी की संयुक्त जांच पूरी होते ही उनकी पूरी रकम उनके मूल बैंक खाते में वापस भेज दी जाएगी।
कॉल बंद होने पर हुआ ठगी का अहसास, पुलिस जांच में जुटी
जब 12 दिनों के बाद खातों से पैसे ट्रांसफर करने का सिलसिला थमा और सुभाष चंद्र ने अपनी जमा पूंजी वापस मांगी, तो जालसाजों का रुख बदल गया। कुछ ही देर में ठगों के सभी संपर्क नंबर स्विच ऑफ आने लगे और व्हाट्सऐप संवाद बंद हो गया। काफी प्रयास के बाद भी जब किसी नंबर से संपर्क नहीं हो सका, तब सुभाष चंद्र को खुद के साथ हुई बड़ी धोखाधड़ी का अहसास हुआ। सदमे में आए रिटायर अफसर ने तुरंत अपने परिजनों को पूरी घटना की जानकारी दी। 1.83 करोड़ रुपये जैसी जीवन भर की गाढ़ी कमाई लुट जाने की बात जानकर परिवार में कोहराम मच गया और अत्यधिक मानसिक तनाव के कारण पीड़ित अधिकारी की स्वास्थ्य स्थिति भी बिगड़ गई। इसके बाद परिजनों ने उन्हें संभाला और तुरंत साइबर थाना पुलिस से संपर्क कर औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। साइबर थाना प्रभारी के मुताबिक, पीड़ित की तहरीर पर भारतीय न्याय संहिता और आईटी एक्ट की संबंधित गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस की विशेष साइबर टीम उन सभी बैंक खातों की गहन जांच कर रही है जिनमें पैसे ट्रांसफर किए गए थे। इसके अलावा, कॉल में इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबरों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और लोकेशन ट्रेस कर अपराधियों के ठिकाने का पता लगाया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि इस अंतरराज्यीय साइबर गिरोह के सदस्यों को जल्द से जल्द चिह्नित कर गिरफ्तार कर लिया जाएगा।



















