उत्तर प्रदेश के कानपुर में चर्चित दवा कारोबारी विनीत मिनोचा की सनसनीखेज हत्या के मामले में एक बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। इस हत्याकांड के आरोप में 22 दिनों तक जेल में बंद रहीं मृतक की बहू शालू को अदालत ने रिहा करने का आदेश जारी कर दिया। पुलिस की विस्तृत विवेचना के दौरान शालू के खिलाफ आपराधिक साजिश में संलिप्तता की पुष्टि करने वाला कोई ठोस आधार नहीं पाया गया। नतीजतन, जांच अधिकारियों ने शालू के पक्ष में अदालत में अंतिम क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी। मामले की सुनवाई करते हुए सक्षम अदालत ने 50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर शालू को कारागार से मुक्त करने का निर्देश दिया, जिसके बाद शाम लगभग 7:30 बजे वह जेल परिसर से बाहर आ गईं।
अदालत ने अपने रिहाई आदेश में यह स्पष्ट शर्त भी रखी है कि भविष्य में विवेचना अथवा अदालती कार्यवाही के दौरान जब भी जांच अधिकारी या न्यायपीठ द्वारा तलब किया जाएगा, शालू को उपस्थित होना अनिवार्य रहेगा। शालू के भाई धीरज अरोड़ा ने इस घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि जिस पुलिस बल ने आरंभिक चरण में हड़बड़ी में उनकी बहन को संदेह के घेरे में लेकर सलाखों के पीछे भेज दिया था, उसी पुलिस की गहन जांच में अंततः यह पूरी तरह साफ हो गया कि इस जघन्य हत्याकांड में उनकी बहन की रत्ती भर भी कोई भूमिका नहीं थी।
इंदिरा नगर के अपार्टमेंट में 17 बार चाकू से हमला कर हुई थी हत्या
यह पूरा मामला 5 सितंबर की तारीख का है, जब दवा व्यापारी विनीत मिनोचा की उनके इंदिरा नगर क्षेत्र स्थित रतन ऑर्बिट अपार्टमेंट के फ्लैट में बर्बरतापूर्वक हत्या कर दी गई थी। हमलावरों ने कारोबारी पर धारदार चाकू से ताबड़तोड़ 17 वार किए थे, जिससे मौके पर ही उनकी जान चली गई थी। वारदात के तुरंत बाद शुरुआती पड़ताल में पुलिस ने पारिवारिक कलह और संदिग्ध बयानों के आधार पर बहू शालू को भी हत्या की साजिश में शामिल मानते हुए गिरफ्तार कर लिया था।
हालांकि जैसे ही पुलिस की तफ्तीश आगे बढ़ी, घटना की एक बेहद चौंकाने वाली परत सामने आई। पुलिस जांच ने कारोबारी के सगे बेटे सुब्रत मिनोचा को पूरे हत्याकांड का मुख्य सूत्रधार और मास्टरमाइंड पाया। पुलिस के अनुसार, सुब्रत ने हिरासत में सघन पूछताछ के दौरान अपने पिता की योजनाबद्ध तरीके से हत्या कराने का जुर्म कबूल कर लिया। उसने जांचकर्ताओं को बताया कि उसने अपने पुराने मुलाजिम विशाल गौतम और उसके साथी राजकिशोर को इस खूनी वारदात को अंजाम देने के लिए तैयार किया था। इसके अलावा जांच में यह घिनौनी हकीकत भी उजागर हुई कि सुब्रत ने जानबूझकर अपनी बेगुनाह पत्नी शालू को फंसाने के लिए आपराधिक सबूतों का एक कृत्रिम ताना-बाना गढ़ा था।
पत्नी को मुजरिम ठहराने के लिए सुब्रत ने रची थी सुनियोजित पटकथा
पुलिस के बयानों के मुताबिक, पिता की जान लेने की खौफनाक साजिश रचने के बाद सुब्रत को यह गहरा खौफ सता रहा था कि कानून का शिकंजा सीधा उसी पर कसेगा। अपने बचाव के लिए उसने शुरू में अपने सगे चाचा पुनीत मिनोचा को इस कत्ल के झूठे मुकदमे में घसीटने का मंसूबा बनाया था। जब वहां बात नहीं बनी, तो उसने अपनी पत्नी शालू को ही साजिश की मुख्य किरदार बनाकर पेश करने की चाल चली।
पुलिस तफ्तीश के रिकॉर्ड बताते हैं कि पिता की हत्या की तारीख से लगभग 20 दिन पहले सुब्रत अपनी पत्नी शालू को साथ लेकर शहर के परेड चौराहा इलाके में गया था। वहां पहले से तय योजना के मुताबिक उसकी मुलाकात विशाल गौतम से हुई। इसके पश्चात तीनों लोग गाड़ी में सवार होकर जेड स्क्वायर मॉल पहुंचे। सुब्रत खुद बाहर कार में बैठा रहा, जबकि उसने शालू और विशाल को एक साथ शॉपिंग करने के लिए मॉल के भीतर भेज दिया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस पूरे ड्रामे के पीछे सुब्रत का एकमात्र मकसद ऐसा डिजिटल और प्रत्यक्ष माहौल तैयार करना था, जिससे भविष्य में पुलिस पड़ताल में मोबाइल टावर लोकेशन, सीसीटीवी फुटेज और गवाहों के बयानों में शालू तथा विशाल की एक साथ मौजूदगी साबित हो सके। इसी साजिश की कड़ी के तहत उसने शालू और विशाल को 80 फीट रोड पर स्थित एक चाय की दुकान सहित शहर के अन्य सार्वजनिक स्थानों पर भी जानबूझकर साथ भेजा था।
वारदात की रात फ्लैट में ऐसे घुसे थे हमलावर
वारदात वाले दिन 5 सितंबर की रात को इस हत्याकांड को अंजाम देने से ठीक पहले सुब्रत ने अपने मोहरे विशाल गौतम के साथ फोन पर लगातार कई बार बातचीत की थी। पुलिस जांच के अनुसार, सुब्रत ने विशाल को अपने रतन ऑर्बिट स्थित फ्लैट की चाबी पहले ही सौंप दी थी। रात लगभग 9:30 बजे सुब्रत अपनी पत्नी शालू को घर से लेकर बाहर निकल गया ताकि दोनों के बाहर रहने का पक्का बहाना तैयार रहे।
सुब्रत और शालू के घर से निकलते ही विशाल और उसका साथी राजकिशोर चाबी की मदद से शांतिपूर्वक फ्लैट के अंदर दाखिल हो गए। पुलिस के मुताबिक, अपराधियों की मूल योजना विनीत मिनोचा को इस तरह ठिकाने लगाने की थी जिससे हत्या का कोई शक न हो और पूरी घटना एक स्वाभाविक अथवा सामान्य मौत लगे। दोनों हमलावर कमरे के भीतर छिपकर इस बात की प्रतीक्षा कर रहे थे कि विनीत कब गहरी नींद में सो जाएं। लेकिन आधी रात के बाद जब विनीत मिनोचा अपने कमरे में पहुंचे और उन्होंने कमरे की बत्ती जलाई, तो कमरे में छिपे विशाल पर उनकी सीधी नजर पड़ गई। विनीत ने विशाल को पहचान लिया और उसे घर में घुसा चोर समझते हुए जोर-जोर से शोर मचाना शुरू कर दिया। शोर मचते ही घबराए विशाल ने बिना सोचे-समझे चाकू निकाल लिया और कारोबारी पर जानलेवा हमला कर दिया। विनीत के शरीर पर 17 मर्तबा चाकू से गहरे घाव किए गए, जिससे उनकी मौत हो गई। इसके फौरन बाद विशाल और राजकिशोर अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गए।
सीसीटीवी कैमरे के फुटेज से खुली पहली कड़ी, रिमांड में खुला सच
हत्या की सूचना मिलते ही जब पुलिस टीम मौके पर पहुंची, तो अपार्टमेंट परिसर के प्रवेश और निकास द्वारों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की पड़ताल की गई। कैमरों की रिकॉर्डिंग में दोनों संदिग्धों की संदिग्ध आवाजाही कैद हो गई थी। इसी फुटेज के सुरागों को जोड़ते हुए पुलिस टीम विशाल तक पहुंचने में कामयाब रही। पुलिस का कहना है कि जब विशाल को पकड़कर पूछताछ की गई, तो उसने सुब्रत द्वारा सिखाई गई पटकथा के आधार पर शालू का नाम उगल दिया। इसी शुरुआती बयान और सुब्रत द्वारा तैयार किए गए झूठे संपर्कों के आधार पर पुलिस ने शालू की भूमिका को संदिग्ध करार देते हुए उसे सलाखों के पीछे भेज दिया था।
लेकिन जैसे-जैसे जांच वैज्ञानिक साक्ष्यों, कॉल डेटा और वित्तीय लेन-देन की ओर मुड़ी, शालू के खिलाफ कोई भी वास्तविक आपराधिक सबूत नहीं मिला। इसके बाद जांच एजेंसी ने कस्टडी रिमांड के दौरान सुब्रत और विशाल को आमने-सामने बैठाकर सख्त पूछताछ की। दोनों के बयानों में भारी विरोधाभास और विसंगतियां सामने आईं, जिससे पूरी साजिश बेनकाब हो गई। सुब्रत टूट गया और उसने स्वीकार किया कि उसने अपने पिता के कत्ल की योजना बनाई थी, विशाल और राजकिशोर को सुपारी देकर शामिल किया था, और खुद को पूरी तरह बेदाग साबित करने के लिए मासूम पत्नी शालू को फंदे में फंसाने का पूरा षड्यंत्र रचा था। इसके बाद पुलिस ने अपनी गलती सुधारते हुए शालू के खिलाफ क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की।
चाचा पुनीत ने कहा- विवाद नहीं था, मुझे क्यों फंसाना चाहा
इस हत्याकांड की जांच में जब सुब्रत के चाचा पुनीत मिनोचा को भी फंसाने की योजना का खुलासा हुआ, तो उन्होंने इस पर गहरा आश्चर्य जताया। पुनीत मिनोचा ने बताया कि वह पिछले 37 वर्षों से अपने बड़े भाई विनीत मिनोचा से बिल्कुल अलग रह रहे हैं। वह नवाबगंज के सिग्नेचर सिटी इलाके में निवास करते हैं और निर्माण क्षेत्र के अपने स्वतंत्र कारोबार में व्यस्त रहते हैं। पुनीत के अनुसार, बड़े भाई विनीत से उनकी बहुत कम मुलाकातें होती थीं और पारिवारिक या व्यावसायिक तौर पर दोनों भाइयों के बीच किसी भी प्रकार का मनमुटाव अथवा विवाद नहीं था। पुनीत ने कहा कि उन्हें आज तक यह बात समझ नहीं आई कि उनका भतीजा सुब्रत इतने गंभीर कत्ल के मामले में उन्हें क्यों घसीटना और फंसाना चाहता था।
कर्ज और संपत्ति विवाद की बात स्वीकारी, अदालत तय करेगी अंतिम फैसला
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि सुब्रत अपने पिता विनीत मिनोचा से अंदर ही अंदर बेहद नाराज और खफा था। उसने पूछताछ में पुलिस के सामने दावा किया कि उसके पिता के कई महिलाओं के साथ रिश्ते थे और उसे यह अंदेशा था कि आने वाले समय में परिवार की संपत्ति को लेकर कोई बड़ा विवाद पैदा हो सकता है या संपत्ति उसके हाथ से निकल सकती है। इसके साथ ही सुब्रत ने अपने ऊपर लगभग 40 लाख रुपये का भारी-भरकम कर्ज होने की बात भी कही। उसका कहना था कि इस भीषण आर्थिक तंगी के बावजूद उसके पिता ने उसे किसी प्रकार की वित्तीय मदद देने से साफ मना कर दिया था।
सुब्रत ने पुलिस के समक्ष यह भावनात्मक दावा भी किया कि जब उसकी बेगुनाह पत्नी शालू जेल भेज दी गई, तो वह भयंकर अपराधबोध और आत्मग्लानि में डूब गया था। उसने कहा कि यदि पुलिस उसे जल्दी गिरफ्तार न करती, तो वह पश्चाताप में आत्महत्या करने की योजना बना चुका था। बहरहाल, सुब्रत द्वारा दिए गए इन बयानों, उसके दावों और पुलिस विवेचना की वैज्ञानिक रिपोर्ट की अंतिम कानूनी सत्यता अदालत के पटल पर चलने वाली जिरह और न्यायिक प्रक्रिया के जरिए ही निर्धारित होगी। फिलहाल सक्षम अदालत के आदेश के बाद बेकसूर बहू शालू 22 दिनों की प्रताड़ना के बाद जेल से आजाद हो चुकी है, जबकि पिता की जघन्य हत्या की खूनी साजिश रचने वाले आरोपी बेटे सुब्रत पर कानूनी मुकदमा मजबूती से जारी रहेगा।
























