उत्तर प्रदेश के औद्योगिक शहर कानपुर में बुनियादी ढांचे की गंभीर लापरवाही सामने आई है। जाजमऊ क्षेत्र के सरैया चौराहे पर बुधवार सुबह अचानक सड़क की जमीन धंस गई, जिससे यातायात के मुख्य मार्ग पर लगभग 3 मीटर चौड़ा और 18 फीट गहरा विशाल गड्ढा बन गया। अचानक हुए इस भू-धंसाव के कारण इलाके में हड़कंप मच गया और स्थानीय निवासियों में डर का माहौल पैदा हो गया। दुर्घटना की आशंका को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने तुरंत मोर्चा संभाला और मार्ग की एक लेन पर बैरिकेडिंग लगाकर गाड़ियों की आवाजाही को पूरी तरह रोक दिया। यह रास्ता शहर के प्रमुख वीआईपी कॉरिडोर्स में से एक है, जो जाजमऊ को सीधे सर्किट हाउस से जोड़ता है। इस वजह से व्यस्त समय में सड़क बंद होने से यातायात व्यवस्था पर काफी असर पड़ा है।
एक माह पहले की अनदेखी पड़ी भारी
स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह हादसा प्रशासनिक अनदेखी का सीधा नतीजा है। करीब एक महीने पहले इसी जगह पर सड़क में एक छोटा गड्ढा बना था। उस दौरान जिम्मेदार विभाग ने जमीन के नीचे की स्थिति की कोई तकनीकी जांच नहीं कराई और केवल मलबा डालकर गड्ढे की ऊपरी सतह को भर दिया। मंगलवार रात से बुधवार सुबह तक हुई तेज बारिश के कारण मिट्टी के अंदर पानी का रिसाव बढ़ गया। नीचे की जमीन में कटाव तेज होने से ऊपरी सड़क अचानक धंस गई और देखते ही देखते वह 18 फीट गहरे कुएं जैसे गड्ढे में तब्दील हो गई। सही समय पर तकनीकी आकलन न किए जाने के कारण आज यह गंभीर स्थिति उत्पन्न हुई है।
जुलूस-ए-मोहम्मदी से पहले प्रशासन की बढ़ी परेशानी
सड़क धंसने की जानकारी मिलते ही पुलिस बल ने मौके पर पहुंचकर इलाके को सुरक्षित घेरे में ले लिया। लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए गड्ढे के करीब जाने पर रोक लगा दी गई है। हालांकि, यह घटना प्रशासनिक अधिकारियों के लिए बड़ी चुनौती बन गई है क्योंकि आगामी दिनों में जुलूस-ए-मोहम्मदी का आयोजन होना है। इस धार्मिक जुलूस के दौरान जाजमऊ के इस मुख्य मार्ग से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और आम जनता की आवाजाही होती है। ऐसे में यदि समय रहते सड़क की ठोस मरम्मत और तकनीकी जांच पूरी नहीं की गई, तो जुलूस के दौरान अव्यवस्था और किसी बड़े हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
रिहायशी इलाकों और नौ परिवारों पर मंडराया संकट
गड्ढे के बिल्कुल निकट लगभग आधा दर्जन मकान स्थित हैं, जिनमें कुल नौ परिवार निवास करते हैं। सड़क धंसने की गहराई इतनी ज्यादा है कि आसपास की जमीन में भी दरारें आने का जोखिम बढ़ गया है। यदि क्षेत्र में मूसलाधार बारिश का सिलसिला जारी रहता है, तो जमीन के अंदर मिट्टी का कटाव बढ़कर इन मकानों की नींव को नुकसान पहुंचा सकता है। क्षेत्र की निवासी सीता और मेवालाल ने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि गड्ढा बेहद खतरनाक रूप ले चुका है और उसके पास खड़ा रहना भी जानलेवा साबित हो सकता है। प्रभावित परिवारों ने मांग की है कि प्रशासनिक टीम तुरंत मौके का निरीक्षण करे और भू-गर्भीय जांच करवाकर स्थायी मरम्मत कार्य शुरू कराए।
अधिकारियों की अनुपस्थिति से स्थानीय लोगों में आक्रोश
घटना के कई घंटे बीत जाने के बाद भी संबंधित निर्माण विभाग का कोई वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। अधिकारियों की इस बेरुखी से स्थानीय नागरिकों में भारी गुस्सा है। लोगों का कहना है कि अगर केवल ऊपरी लीपापोती करके मामले को टालने की कोशिश की गई, तो भविष्य में यह मार्ग किसी बड़े हादसे का केंद्र बन सकता है। फिलहाल पुलिस की चौकसी के बल पर एक लेन का यातायात रोका गया है। अब देखना यह होगा कि नगर निगम और लोक निर्माण विभाग इस जानलेवा गड्ढे को भरने और आसपास के मकानों को सुरक्षित करने के लिए क्या त्वरित कदम उठाते हैं।





















