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लखीमपुर खीरी में शारदा नदी निगल रही घर और खेत, राजेश्वरी ने कहा जल्द डूब सकता है उनका मकानउत्तर प्रदेश
22 जुल॰ 2026, 2:54 am (99 दिन पहले)· 0

लखीमपुर खीरी में शारदा नदी निगल रही घर और खेत, राजेश्वरी ने कहा जल्द डूब सकता है उनका मकान

लखीमपुर खीरी के ग्रंट नंबर 12 गांव में शारदा नदी का कटान फिर तेज हो गया है, जिसमें खेत और मकान लगातार नदी में समा रहे हैं। गांव की महिला राजेश्वरी का कहना है कि उनका घर कभी भी नदी में डूब सकता है, जबकि प्रशासन कोई ध्यान नहीं दे रहा।

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में शारदा नदी का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। पहाड़ों पर हो रही भारी बारिश से नदी का जलस्तर लगातार ऊपर-नीचे हो रहा है और हर बार पानी घटते ही किनारे के गांवों में कटान तेज हो जाता है। देखते ही देखते खेत और घर नदी की धारा में समा रहे हैं, जिससे तराई इलाके के लोगों की रातों की नींद उड़ गई है।

पहाड़ों की बारिश ने बढ़ाई तराई की मुसीबत

पहाड़ी इलाकों में हो रही लगातार बारिश का सीधा असर मैदानी इलाकों की नदियों पर पड़ रहा है। बारिश के चलते नदियों का जलस्तर बढ़ जाता है और इसी उतार-चढ़ाव के बीच शारदा नदी का कटान और तेज हो जाता है। जैसे ही पानी उतरता है, किनारे की मिट्टी कमजोर पड़ जाती है और कृषि योग्य जमीन का बड़ा हिस्सा चंद घंटों में नदी में विलीन हो जाता है। इलाके में कई मकान भी नदी की धारा में बहते नजर आए, जिसका वीडियो भी सामने आया। इसके बावजूद जिला प्रशासन की ओर से कटान रोकने के लिए कोई ठोस कदम उठाया जाता नहीं दिख रहा, जिससे ग्रामीणों की नाराजगी दिन पर दिन बढ़ती जा रही है।

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ग्रंट नंबर 12 गांव में सैकड़ों घर उजड़े

निघासन तहसील क्षेत्र के ग्रंट नंबर 12 गांव की तस्वीर इस तबाही को सबसे साफ ढंग से बयां करती है। इस गांव की कुल आबादी करीब 2200 है, लेकिन पिछले साल आई बाढ़ में यहां के करीब 200 मकान नदी में समा चुके हैं। अब एक बार फिर शारदा नदी ने अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। कटान धीरे-धीरे बढ़ते हुए गांव की सीमा के और करीब आता जा रहा है, और लगातार मकान नदी की धारा में गिर रहे हैं। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से इस पर कोई ठोस कार्रवाई होती नजर नहीं आ रही।

कभी भी नदी में समा सकता है मकान

गांव की महिला राजेश्वरी ने बताया कि शारदा नदी का कटान पिछले साल से लगातार जारी है और इस साल पिछले 15 दिन से रुक-रुक कर कटान हो रहा है। उन्होंने बताया कि एक मकान पहले ही नदी में समा चुका है, जबकि किसानों की हजारों एकड़ जमीन भी शारदा की धारा में कट चुकी है, जिससे लोगों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं।

राजेश्वरी ने आगे कहा, "मेरा मकान बिल्कुल नदी के किनारे आ गया है, किसी दिन भी यह नदी में समा सकता है।" उनका कहना है कि आने वाले कुछ दिनों में उनके घर का वजूद भी पूरी तरह मिट सकता है, लेकिन प्रशासन की ओर से इस दिशा में अब तक कोई ध्यान नहीं दिया गया है। जिन परिवारों के मकान पिछले साल नदी में समा गए थे, वे लोग आज भी बंधे पर झोपड़ी डालकर किसी तरह अपना जीवन गुजार रहे हैं।

क्या 2027 के विधानसभा चुनाव में दिखेगा गुस्सा?

साल 2027 में उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं, और इस बढ़ते आक्रोश का असर चुनाव पर भी पड़ सकता है। राजेश्वरी बताती हैं कि क्षेत्रीय विधायक इस समस्या पर कोई ध्यान नहीं दे रहे, इसलिए इस बार गांव के लोग भी वोट देते समय ध्यान नहीं देंगे। उनका कहना है कि जो कोई भी असल में उनकी मदद करेगा, गांव वाले अपना भरोसा उसी पर जताएंगे। लगातार हो रहे कटान के चलते ग्रामीणों में कहीं ना कहीं गहरी नाराजगी साफ देखी जा रही है, और आने वाले दिनों में यह मुश्किलें और बढ़ने की आशंका है।

सवाल-जवाब

शारदा नदी का कटान कहां हो रहा है?
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले की निघासन तहसील के ग्रंट नंबर 12 गांव में शारदा नदी का कटान लगातार जारी है।
गांव की आबादी और नुकसान कितना है?
गांव की कुल आबादी करीब 2200 है और पिछले साल आई बाढ़ में करीब 200 मकान नदी में समा चुके हैं।
राजेश्वरी ने अपने मकान को लेकर क्या बताया?
राजेश्वरी ने बताया कि उनका मकान बिल्कुल नदी किनारे आ गया है और यह कभी भी नदी में समा सकता है, जबकि प्रशासन ध्यान नहीं दे रहा।
कटान की समस्या का मुख्य कारण क्या है?
पहाड़ों पर हो रही लगातार बारिश से नदियों का जलस्तर बढ़ता है और पानी घटने पर शारदा नदी का कटान तेज हो जाता है।
क्या इसका असर आगामी विधानसभा चुनाव पर पड़ेगा?
राजेश्वरी के मुताबिक 2027 के विधानसभा चुनाव में ग्रामीण उसी को वोट देंगे जो असल में उनकी मदद करेगा, क्योंकि मौजूदा विधायक इस समस्या पर ध्यान नहीं दे रहे।
पिछले साल बेघर हुए लोग अभी कहां रह रहे हैं?
पिछले साल जिनके मकान नदी में समा गए थे, वे लोग आज भी बंधे पर झोपड़ी डालकर जीवन यापन कर रहे हैं।
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