दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर मेरठ टोल प्लाजा के दोनों किनारों पर पीले रंग में सजे 40 बुलडोजरों की कतारों के बीच भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जोरदार स्वागत किया गया। जैसे ही पार्टी अध्यक्ष का काफिला टोल से आगे बढ़ा, बुलडोजरों की बकेट से फूलों की बौछार की गई और मुख्यमंत्री ने गुलदस्ता भेंट कर राष्ट्रीय अध्यक्ष की अगवानी की। 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीतिक जमीन तैयार करने और सांगठनिक मशीनरी को सक्रिय करने के मकसद से यह दौरा आयोजित हुआ है। टोल प्लाजा का यह दृश्य न केवल पार्टी कार्यकर्ताओं के उत्साह को दिखा रहा था, बल्कि आगामी चुनावी मुकाबले के लिए पार्टी के मुख्य विमर्श को भी रेखांकित कर रहा था।
शहीद स्मारक पर नमन और युवाओं से सीधा संवाद
दौरे की शुरुआत करते हुए नितिन नवीन ने सबसे पहले मेरठ स्थित ऐतिहासिक शहीद स्मारक पहुंचकर देश के वीर सपूतों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद वे स्वामी विवेकानंद सुभारती यूनिवर्सिटी पहुंचे, जहां मांगल्या ऑडिटोरियम में युवाओं और जेन जी (Gen-Z) छात्रों के लिए आयोजित एक विशाल युवा सम्मेलन को संबोधित किया। छात्रों के साथ बातचीत में उन्होंने रेखांकित किया कि राज्य की पहचान अब अपराध और माफिया तत्वों से बदलकर आधुनिक एक्सप्रेसवे, विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे और अपराधियों पर कड़ी कार्रवाई करने वाले बुलडोजर से स्थापित हो चुकी है। पहली बार मताधिकार का प्रयोग करने वाले मतदाताओं को जोड़ना इस पूरे संवाद का प्रमुख केंद्र बिंदु रहा।
शक्ति केंद्र संयोजकों और मंडल अध्यक्षों का महासम्मेलन
दोपहर के सत्र में विश्वविद्यालय परिसर में ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लगभग 4,800 शक्ति केंद्र संयोजकों और मंडल अध्यक्षों का सम्मेलन आयोजित हुआ। इस बड़े सांगठनिक कार्यक्रम के मंच पर राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी भी उपस्थित रहे। सम्मेलन में निचले स्तर के कार्यकर्ताओं को चुनावी तैयारियों में अभी से जुटने और मतदान केंद्रों पर पकड़ मजबूत करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए। बूथ स्तर तक संवाद स्थापित करने और कार्यकर्ताओं का मनोबल ऊंचा रखने के उद्देश्य से दोनों शीर्ष नेताओं ने सांगठनिक दायित्वों की समीक्षा की।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सीटों का गणित और सामाजिक समीकरण
आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव के लिहाज से पश्चिमी उत्तर प्रदेश का इलाका राजनीतिक दृष्टिकोण से काफी संवेदनशील और निर्णायक माना जाता है। इस क्षेत्र के 14 जिलों में कुल मिलाकर 71 विधानसभा सीटें आती हैं। चुनावी इतिहास पर नजर डालें तो 2017 के चुनाव में बीजेपी ने इनमें से 54 सीटों पर विजय प्राप्त की थी, जबकि 2022 के चुनाव में पार्टी की सीटों की संख्या घटकर 41 रह गई थी। इसी अंतर को पाटने और अपने कैडर को दोबारा पूरी तरह से सक्रिय करने के लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष का यह पहला दौरा बेहद अहम माना जा रहा है। दौरे के दौरान किसान, गन्ना मूल्य भुगतान, जाट और गुर्जर जैसे सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों पर जमीनी कार्यकर्ताओं से सीधा फीडबैक जुटाया जा रहा है।
समीक्षा बैठकें, रात्रि विश्राम और सहारनपुर का आगामी कार्यक्रम
सोमवार की शाम और रात का समय व्यापक राजनीतिक व रणनीतिक चर्चाओं के नाम रहा। ब्रवुरा रिसॉर्ट में नितिन नवीन ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के पूर्व सांसदों, विधायकों, विधान परिषद सदस्यों (एमएलसी), मौजूदा जिला अध्यक्षों और क्षेत्रीय पदाधिकारियों के साथ मैराथन बैठकें कीं। 2027 के चुनावी रोडमैप को लेकर वरिष्ठ नेताओं के साथ जमीनी चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया गया। नितिन नवीन 21 सितंबर की रात मेरठ में ही रुकेंगे। इसके बाद मंगलवार, 22 सितंबर को वे सुबह मेरठ के अघोरनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगे। दर्शन के बाद वे सहारनपुर रवाना होंगे, जहां मां शाकंभरी देवी मंदिर में दर्शन करेंगे और वहां के स्थानीय कार्यकर्ताओं व पदाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठकें करेंगे।
बुलडोजर प्रतीक, प्रशासनिक मॉडल और सियासी टकराव
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि टोल प्लाजा पर बुलडोजरों का जमावड़ा केवल एक औपचारिक स्वागत नहीं था, बल्कि इसके गहरे राजनीतिक मायने हैं। योगी आदित्यनाथ के 9 साल के शासनकाल में बुलडोजर सिर्फ निर्माण या अतिक्रमण हटाने वाली मशीन नहीं रहा, बल्कि संगठित अपराध और भू-माफियाओं के विरुद्ध सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का राष्ट्रीय प्रतीक बन चुका है। हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों के बाद समाजवादी पार्टी और कांग्रेस गठबंधन को पीछे धकेलने के लिए पार्टी कैडर ने यह दर्शाया है कि वह मुख्यमंत्री के कड़े प्रशासनिक रुख के साथ मजबूती से खड़ा है।
एक तरफ जहां सत्ता पक्ष इसे बिना किसी भेदभाव के सख्त कानून व्यवस्था और आधुनिक बुनियादी ढांचे के प्रतीक के रूप में पेश कर रहा है, वहीं समाजवादी पार्टी और कांग्रेस इसे असंवैधानिक व एकतरफा कार्रवाई बताते रहे हैं। विपक्ष बेरोजगारी, भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक और महंगाई जैसे बुनियादी मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है। इसी बीच राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी है कि यदि अखिलेश यादव बीजेपी के दलित नेता कौशल किशोर को अपने पाले में लाने में सफल होते हैं, तो यह बीजेपी के लिए बड़ा नुकसान साबित हो सकता है। मेरठ से शुरू हुआ यह घटनाक्रम स्पष्ट करता है कि 2027 के चुनावी समर में बीजेपी अपने आक्रामक प्रशासनिक मॉडल और मजबूत सांगठनिक ढांचे के दम पर मैदान में उतर रही है।



















