मेरठ जिले में वरिष्ठ पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों पर गंभीर आरोप सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। भारतीय किसान यूनियन (बीआर अंबेडकर) के पदाधिकारियों ने पुलिस कस्टडी में बर्बरतापूर्वक मारपीट किए जाने का सनसनीखेज दावा किया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश शासन ने सहारनपुर के डीआईजी को पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच का जिम्मा सौंपा है। इसके साथ ही प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फेरबदल करते हुए तत्कालीन एसएसपी का स्थानांतरण लखनऊ कर दिया गया है।
एसएसपी कार्यालय में वार्ता के दौरान विवाद और टॉरचर के गंभीर आरोप
संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिग्विजय भाटी और जिलाध्यक्ष मोहित जाटव ने आरोप लगाया है कि 19 अगस्त को वे दलित छात्रा ललिता गौतम की हत्या के मामले में अपना पक्ष रखने के लिए मेरठ एसएसपी दफ्तर पहुंचे थे। दिग्विजय भाटी के अनुसार, वार्ता के दौरान तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अविनाश पांडे क्षुब्ध हो गए। इसके बाद उन्हें एक बंद चैंबर वार्ता कक्ष में ले जाया गया, जहां लगभग डेढ़ घंटे तक उनके साथ शारीरिक मारपीट की गई।
पीड़ित किसान नेता का कहना है कि कक्ष में मारपीट के उपरांत उन्हें एसओजी कार्यालय भेज दिया गया। वहां एसओजी इंस्पेक्टर अखिलेश गौड़ को बुलाकर उन्हें सौंप दिया गया। आरोप है कि एसओजी कार्यालय में दिग्विजय भाटी के पैर बांधकर उन्हें उल्टा लटकाया गया और लकड़ी के फट्टों तथा लाठियों से तलवों, पीठ और कमर पर लगातार वार किए गए। इस दौरान उनके साथ मौजूद संगठन के जिलाध्यक्ष मोहित जाटव को भी थर्ड डिग्री दी गई।
दिग्विजय भाटी ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने बलपूर्वक एक सादे सफेद कागज पर उनसे यह लिखवा लिया कि उनके शरीर पर लगी चोटें किसी सड़क दुर्घटना का परिणाम हैं। उन्होंने पुलिस बल पर जूतों, घूंसों और लातों से हमला करने की बात कही है। पीड़ित के चेहरे और आंख पर गंभीर सूजन तथा चोट के स्पष्ट निशान देखे गए हैं।
पुलिस प्रशासन की ओर से एक्सीडेंट का दावा
दूसरी ओर, एसएसपी कार्यालय के सूत्रों ने पुलिस पर लगे आरोपों को सिरे से खारिज किया है। सूत्रों का कहना है कि 19 अगस्त को कार्यालय परिसर में केवल कहासुनी हुई थी, जिसके बाद किसान नेता वहां से रवाना हो गए थे। पुलिस पक्ष के अनुसार, दफ्तर से निकलने के बाद रास्ते में दिग्विजय भाटी का वाहन एक्सीडेंट हो गया था, जिससे उन्हें शरीर और आंख पर चोटें आई हैं।
9 जुलाई की पुरानी घटना और ललिता गौतम हत्याकांड की पृष्ठभूमि
यह पहला मौका नहीं है जब मेरठ में पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठे हों। इससे पूर्व 9 जुलाई को दलित छात्रा ललिता गौतम हत्याकांड के विरोध में प्रदर्शन के दौरान भी भारी बखेड़ा हुआ था। उस समय तत्कालीन एसएसपी अविनाश पांडे पर पुलिस पिकअप वाहन के भीतर प्रदर्शनकारी वकील रवि को पीटने का आरोप लगा था। वह मामला अभी पूरी तरह शांत भी नहीं हुआ था कि 19 अगस्त की यह नई घटना सामने आ गई।
राजनीतिक हलचल और सपा नेताओं की कार्रवाई की मांग
मामले की जानकारी मिलते ही राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस पूरे प्रकरण का संज्ञान लिया। इसके बाद शुक्रवार को दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव ने सरधना से सपा विधायक अतुल प्रधान के आवास पर पहुंचकर एक प्रेस वार्ता की।
प्रेस के समक्ष अपनी आपबीती सुनाते हुए पीड़ित नेताओं ने पुलिस पर लगाए गए आरोपों को दोहराया। सरधना विधायक अतुल प्रधान और दिग्विजय भाटी ने संयुक्त रूप से मांग की कि तत्कालीन एसएसपी अविनाश पांडे और इसमें संलिप्त अन्य पुलिस कर्मियों के विरुद्ध आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाए। उन्होंने पूरे मामले की पारदर्शी तथा निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है।
सहारनपुर डीआईजी को सौंपी गई जांच और प्रशासनिक फेरबदल
प्रकरण की संवेदनशीलता को देखते हुए स्थानीय डीआईजी ने अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजी) भानु भास्कर को पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया, जिसके बाद राज्य शासन को रिपोर्ट भेजी गई। शासन के निर्देशों के अनुसार, इस पूरे मामले की विस्तृत जांच सहारनपुर डीआईजी को सौंपी गई है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद तथ्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
इस बीच उत्तर प्रदेश शासन ने प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 2015 बैच के आईपीएस अधिकारी अविनाश पांडे (आईपीएस-आरआर-2015) को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मेरठ के पद से स्थानांतरित कर पुलिस अधीक्षक, संबद्ध मुख्यालय पुलिस महानिदेशक, लखनऊ के पद पर भेज दिया है। वहीं, 2015 बैच के ही आईपीएस अधिकारी बी.बी.जी.टी.एस. मूर्ति (आईपीएस-आरआर-2015) को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक झांसी के पद से हटाकर मेरठ का नया वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नियुक्त किया गया है।





















