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मध्य प्रदेश में पुलिस अफसर पर कड़ी कार्रवाई के तहत हत्या के आरोपी से बेहद सस्ती जमीन लेने के आरोप में सीएसपी नेहा पच्चीसिया पर FIR और निलंबन का आदेश जारीमध्य प्रदेश
21 अग॰ 2026, 7:16 pm (68 दिन पहले)· 5

मध्य प्रदेश में पुलिस अफसर पर कड़ी कार्रवाई के तहत हत्या के आरोपी से बेहद सस्ती जमीन लेने के आरोप में सीएसपी नेहा पच्चीसिया पर FIR और निलंबन का आदेश जारी

कटनी में पदस्थ नगर पुलिस अधीक्षक नेहा पच्चीसिया पर हत्या के आरोपी से 82 लाख रुपये की जमीन महज 18 लाख रुपये में अपने नाम कराने का आरोप है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मामले की जांच के बाद अधिकारी को तत्काल निलंबित करने के निर्देश दिए हैं।

मध्य प्रदेश के कटनी जिले में पदस्थ नगर पुलिस अधीक्षक (CSP) नेहा पच्चीसिया के खिलाफ राज्य सरकार ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। एक हत्या के आरोपी के परिवार पर पुलिसिया कार्रवाई का खौफ दिखाकर करोड़ों रुपये की बेशकीमती जमीन नाममात्र के दाम पर लिखवाने के गंभीर आरोपों के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का निर्देश दिया है। इस पूरे भ्रष्टाचार और जबरन वसूली के मामले में पुलिस मुख्यालय के हस्तक्षेप के बाद कुठला पुलिस थाने में आपराधिक प्रकरण दर्ज किया गया है। कानून व्यवस्था में किसी भी तरह की लापरवाही या पद के दुरुपयोग को बर्दाश्त न करने के प्रशासनिक संदेश के साथ पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई है।

करोड़ों की जमीन को कौड़ियों के दाम कराने का पूरा मामला

विस्तृत विवरण के अनुसार, कटनी जिले के कन्हवारा क्षेत्र में स्थित एक बहुमूल्य भूमि के सौदे को लेकर यह पूरा विवाद खड़ा हुआ है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि हत्या के मामले में नामजद आरोपी रमेश लोधी और उनके परिजनों पर पुलिसिया कार्रवाई का दबाव बनाया गया। इसी दबाव और खौफ के बल पर उस जमीन की रजिस्ट्री कराई गई जिसकी सरकारी गाइडलाइन दर लगभग 82.86 लाख रुपये थी। इतने अधिक मूल्य की जमीन को महज 18.20 लाख रुपये में लिखवा लिया गया, जो कि मूल बाजार और सरकारी कीमत से बहुत कम है। जांच में यह भी उजागर हुआ है कि इस खरीद-फरोख्त के लिए जमीन के खरीदार को लगभग 15 लाख रुपये की राशि क्षितिज राज बारापत्रे के बैंक खातों से उपलब्ध कराई गई थी। रजिस्ट्री संपन्न होने के बाद जमीन का नामांतरण भी करवा लिया गया।

थाना प्रभारी की भूमिका और दर्ज की गई एफआईआर की धाराएं

इस फर्जीवाड़े और दबाव की शिकायत सामने आने के बाद पुलिस मुख्यालय ने उच्च स्तरीय जांच के निर्देश दिए थे। जांच रिपोर्ट के निष्कर्षों के आधार पर कुठला थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। इस आपराधिक प्रकरण में नगर पुलिस अधीक्षक नेहा पच्चीसिया के साथ-साथ क्षितिज राज बारापत्रे और मारूफ अहमद हनफी को नामजद आरोपी बनाया गया है। इन सभी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है, जिनमें धारा 61, 198, 199(ब), 308(7) और 318(4) शामिल हैं। इसके अलावा, इस पूरे मामले में तत्कालीन कुठला थाना प्रभारी राजेंद्र मिश्रा की भूमिका भी बेहद संदिग्ध मानी जा रही है और उन पर भी गंभीर आरोप लगे हैं। मामले से जुड़े तमाम साक्ष्यों को अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा जहां अंतिम फैसला होगा।

मुख्यमंत्री मोहन यादव का सख्त निर्देश और आधिकारिक बयान

प्रशासनिक अमले में भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग को लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कड़ा रुख अपनाया है। राज्य के मुख्य सचिव को निर्देशित करते हुए मुख्यमंत्री ने संबंधित पुलिस अधिकारी के विरुद्ध त्वरित निलंबन कार्रवाई करने का आदेश दिया। मामले की जानकारी साझा करते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) ने सामाजिक मध्यस्थ मंच एक्स पर आधिकारिक बयान जारी किया। मुख्यमंत्री कार्यालय के संदेश में स्पष्ट कहा गया कि "कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही, दबाव या पद के दुरुपयोग को स्वीकार नहीं किया जाएगा।" सरकार ने निष्पक्ष जांच प्रक्रिया पूरी करने और सभी दोषियों के खिलाफ कठोरतम वैधानिक कदम उठाने का आश्वासन दिया है।

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सवाल-जवाब

कटनी की सीएसपी नेहा पच्चीसिया पर क्या गंभीर आरोप लगे हैं?
उन पर हत्या के आरोपी के परिवार पर पुलिसिया दबाव बनाकर 82.86 लाख रुपये की गाइडलाइन वाली जमीन केवल 18.20 लाख रुपये में अपने नाम कराने और भ्रष्टाचार करने का आरोप है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस मामले में क्या कार्रवाई के निर्देश दिए हैं?
मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को सीएसपी नेहा पच्चीसिया को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने और निष्पक्ष जांच कर कठोर वैधानिक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
किन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है और कौन सी धाराएं लगाई गई हैं?
सीएसपी नेहा पच्चीसिया, क्षितिज राज बारापत्रे और मारूफ अहमद हनफी के खिलाफ कुठला थाने में बीएनएस की धारा 61, 198, 199(ब), 308(7) और 318(4) के तहत मामला दर्ज हुआ है।
इस जमीन सौदे में तत्कालीन थाना प्रभारी की क्या भूमिका बताई गई है?
जांच रिपोर्ट के अनुसार तत्कालीन कुठला थाना प्रभारी राजेंद्र मिश्रा पर भी आरोपी के परिवार पर दबाव बनाने और जमीन लिखवाने में सहयोग करने के गंभीर आरोप लगे हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Arjun Mehta@arjun-mehta·67 दिन पहले

यह प्रकरण कानून के रखवालों द्वारा पद के दुरुपयोग और जबरन वसूली का गंभीर उदाहरण है। मुख्यमंत्री द्वारा त्वरित निलंबन और एफआईआर के आदेश से यह संकेत मिलता है कि राज्य सरकार पुलिस महकमे में भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रही है। आगे की न्यायिक प्रक्रिया और अन्य संलिप्त अधिकारियों पर कार्रवाई से ही यह तय होगा कि प्रशासनिक जवाबदेही कितनी सख्ती से लागू की जाती है।

Ravikash Gupta@ravikash·67 दिन पहले

कानून के संरक्षकों द्वारा इस प्रकार का शक्ति का दुरुपयोग न केवल प्रशासनिक व्यवस्था को खोखला करता है, बल्कि निवेशकों और कॉरपोरेट जगत में भी राज्य की कानून-व्यवस्था को लेकर गलत संदेश जाता है। इस मामले में वित्तीय लेन-देन, विशेषकर बैंक खातों के जरिए फंड ट्रांसफर के जो साक्ष्य मिले हैं, वे आर्थिक भ्रष्टाचार की परतें उघाड़ने के लिए काफी हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आगे की जांच में वित्तीय ट्रेल (money trail) और अन्य संदिग्धों की संलिप्तता पर कितनी सख्ती से शिकंजा कसा जाता है, जिससे प्रशासनिक जवाबदेही और साख दोनों बहाल हो सकें।

Karan Malhotra@karan-malhotra·67 दिन पहले

यह मामला खाकी की वर्दी पर सबसे बड़ा दाग है, जहाँ कानून के रखवालों ने ही अपराधियों के डर का फायदा उठाकर जबरन वसूली की। भारतीय न्याय संहिता की गंभीर धाराओं के तहत दर्ज इस प्रकरण में, अब अदालती सुनवाई के दौरान यह साबित करना होगा कि वित्तीय लेन-देन और बैंक खातों के जरिए कैसे साक्ष्य छिपाए गए। इस कार्रवाई से यह तो स्पष्ट है कि पुलिस महकमे में आंतरिक शुचिता बहाल करने के लिए भ्रष्टाचार के खिलाफ अब अदालत और शासन का शिकंजा और कसने वाला है।

Rohan Verma@rohan-verma·67 दिन पहले

करण मल्होत्रा के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, पुलिस महकमे में ऐसी घटनाएं प्रशासनिक नियंत्रण की गंभीर विफलता को दर्शाती हैं। जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं, तो ज़मीनी स्तर पर कानून के शासन में जनता का भरोसा डगमगाता है। इस मामले में मुख्यमंत्री कार्यालय के सीधे हस्तक्षेप से यह तय हो गया है कि भविष्य में ऐसे मामलों में त्वरित निलंबन और कठोर आपराधिक मुकदमे ही मानक बनेंगे, जिससे भ्रष्ट तत्वों में कड़ा संदेश जाएगा।

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