उत्तर प्रदेश के भदोही जिले में पुलिस ने मेडिकल कॉलेजों में दाखिला दिलाने के नाम पर चल रहे एक बड़े फर्जीवाड़ा सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। यह गिरोह NEET-UG 2025 की प्रवेश परीक्षा में कम अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों को अपना शिकार बनाता था और फर्जी दस्तावेजों का सहारा लेकर उन्हें MBBS पाठ्यक्रम में प्रवेश दिलाने का झांसा देता था। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए गिरोह के मुख्य सरगना संजय दुबे सहित छह आरोपियों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया है। इस नेटवर्क से जुड़े दिनेश वर्मा को भी पुलिस ने आरोपी के तौर पर चिन्हित किया है।
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे के नाम पर ठगी
पुलिस जांच के दौरान गिरोह की कार्यशैली का पूरा खाका सामने आया है। यह नेटवर्क NEET परीक्षा में कम अंक लाने वाले हताश छात्रों और उनके अभिभावकों से संपर्क साधता था। गिरोह के सदस्य इन छात्रों को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटा के तहत आरक्षित मेडिकल सीटों पर आसानी से दाखिला दिलाने का लालच देते थे। इस प्रक्रिया को अंजाम देने के लिए सिंडिकेट के सदस्य स्वयं ही फर्जी और कूटरचित स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र तैयार करते थे। इन्हीं फर्जी कागजातों के आधार पर मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाता था। पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, गिरोह ने कुल नौ छात्रों के फर्जी दस्तावेज तैयार कर उन्हें इस विशेष कोटे के जरिए मेडिकल कॉलेज में दाखिला दिलाने का प्रयास किया था।
विभागीय जांच और भौतिक सत्यापन से खुला राज
इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा तब संभव हो सका जब मेडिकल विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने संदिग्ध मामलों में सतर्कता बरतते हुए दस्तावेजों की गहराई से जांच कराने के निर्देश दिए। अगस्त 2025 में भेजे गए एक आधिकारिक पत्र के बाद जब संबंधित राजस्व और प्रशासनिक विभागों ने इन नौ छात्रों के कागजों की जांच-पड़ताल की, तो बड़ा सच उजागर हुआ। भौतिक सत्यापन के दौरान पता चला कि नौ के नौ छात्रों द्वारा प्रस्तुत किए गए स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र पूरी तरह से जाली और नकली थे। कागजातों में यह गंभीर धोखाधड़ी सामने आते ही पुलिस तुरंत हरकत में आई और मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी गई।
सरगना संजय दुबे समेत 6 गिरफ्तार, प्रशासनिक संपर्कों की पड़ताल
मामले में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद भदोही पुलिस की विशेष टीम ने गिरोह के काम करने के तरीके और उसके सदस्यों की सटीक जानकारी जुटाई। इसके बाद पुलिस ने योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाकर गिरोह के मास्टरमाइंड संजय दुबे को गिरफ्तार कर लिया। संजय दुबे से पूछताछ के आधार पर इस फर्जीवाड़ा नेटवर्क में शामिल पांच अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तार किए गए सभी छह आरोपियों को वैधानिक प्रक्रियाओं के बाद सलाखों के पीछे भेज दिया गया है।
फिलहाल भदोही पुलिस इस पूरे सिंडिकेट से जुड़े अन्य बिचौलियों, दलालों और संलिप्त संदिग्धों की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है। पुलिस इस बिंदु पर भी गहराई से पड़ताल कर रही है कि इन जाली प्रमाण पत्रों को तैयार करने और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को पार कराने के लिए सरकारी स्तर पर किन-किन अधिकारियों या कर्मचारियों से सांठगांठ की गई थी।



















