बिहार स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (बीयूएचएस), पटना से संबद्ध विभिन्न शिक्षण संस्थानों में हाल ही में जारी हुए परीक्षा परिणामों ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। बी.फार्मा और बीएससी नर्सिंग के घोषित नतीजों में कथित तौर पर लगभग 90 प्रतिशत छात्र-छात्राओं को अनुत्तीर्ण कर दिया गया है। इस भारी असफलता के बाद विद्यार्थियों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पटना, समस्तीपुर, रोहतास और जहानाबाद समेत राज्य के कई जिलों में आक्रोशित छात्र सड़कों पर उतरकर लगातार नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
बिहार के कई जिलों में उग्र हुआ छात्रों का प्रदर्शन
परीक्षा परिणाम सामने आने के बाद से ही विभिन्न जिलों के कॉलेजों में तनाव का माहौल बना हुआ है। छात्रों का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर विद्यार्थियों का फेल होना परीक्षा प्रणाली और मूल्यांकन की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। राज्य के कई हिस्सों में विद्यार्थियों ने मुख्य सड़कों पर जाम लगाकर अपनी मांगें रखीं। प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि परीक्षा परिणामों की तुरंत समीक्षा की जानी चाहिए ताकि कई हजार छात्रों का भविष्य खराब होने से बचाया जा सके।
पैसे लेने और सेंटर मैनेज करने के गंभीर आरोप
प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों ने कॉलेज प्रबंधन पर कई संगीन आरोप लगाए हैं। छात्रों का दावा है कि नामांकन के समय कॉलेज अधिकारियों ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि परीक्षा प्रक्रिया और परीक्षा केंद्र पूरी तरह से मैनेज रहेंगे। पास कराने की गारंटी के नाम पर कई संस्थानों में प्रत्येक छात्र से 8000 रुपये की अग्रिम राशि ली गई थी। हालांकि, जब परीक्षाएं आयोजित हुईं तो परीक्षा केंद्रों पर काफी सख्ती बरती गई। इसी कड़ाई के कारण अलग-अलग कॉलेजों में 50 प्रतिशत से लेकर 80 से 90 प्रतिशत तक विद्यार्थी अनुत्तीर्ण घोषित हो गए।
शिक्षकों की कमी और कम नंबर मिलने पर सवाल
विद्यार्थियों ने संस्थानों में बुनियादी सुविधाओं और योग्य शैक्षणिक स्टाफ की भारी कमी को भी अपनी असफलता का प्रमुख कारण बताया है। उनका आरोप है कि कॉलेजों में नियमित कक्षाएं नहीं चलती हैं और शैक्षणिक सत्र अपने निर्धारित समय से काफी पीछे चल रहा है। इसके अलावा, कई छात्रों ने मूल्यांकन प्रक्रिया पर आश्चर्य जताते हुए कहा कि उत्तर पुस्तिकाओं में कई पन्ने लिखने के बावजूद उन्हें महज 3, 4, 5 या 9 अंक दिए गए हैं। इस विसंगति को देखते हुए बड़ी संख्या में छात्रों ने बीयूएचएस में उत्तर पुस्तिकाओं की निष्पक्ष दोबारा जांच और परिणाम समीक्षा की मांग की है। कई विद्यार्थियों ने अपनी कॉपियों के पुनर्मूल्यांकन के लिए फॉर्म भी भर दिए हैं।
विश्वविद्यालय प्रशासन का रुख और आगे की प्रक्रिया
मामले पर बीयूएचएस के परीक्षा नियंत्रक ने स्पष्ट रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि अतीत में क्या व्यवस्थाएं थीं, उससे वर्तमान प्रशासन का कोई संबंध नहीं है और अब सभी परीक्षाएं पूरी कड़ाई के साथ आयोजित की जा रही हैं। परीक्षा नियंत्रक ने यह भी कहा कि जिन छात्रों को अपने परिणामों पर कोई संदेह है, वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपनी उत्तर पुस्तिकाएं देख सकते हैं।
दूसरी तरफ, सेंटर मैनेज करने और पास कराने के नाम पर 8000 रुपये वसूले जाने के आरोपों की फिलहाल स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। संबंधित कॉलेजों और विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से विस्तृत आधिकारिक जवाब आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। फिलहाल इस घटनाक्रम ने राज्य में स्वास्थ्य शिक्षा से जुड़े संस्थानों की साख और परीक्षा मूल्यांकन की पारदर्शिता पर गंभीर बहस छेड़ दी है।


















