उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में एक बड़ी पुलिस कार्रवाई के दौरान एक लाख रुपये के इनामी अपराधी सरबजीत सिंह को एनकाउंटर में मार गिराया गया है। यह मुठभेड़ बिलसंडा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले शीतलपुर गांव में हुई। पुलिस ने घटनास्थल से एक सेमी ऑटोमैटिक पिस्टल, एक 315 बोर का तमंचा और भारी मात्रा में कारतूस जब्त किए हैं। मारे गए बदमाश की पहचान व्यापारी पप्पू गुप्ता हत्याकांड के मुख्य अभियुक्त के रूप में हुई है। इस दौरान पुलिस टीम पर भी जानलेवा हमला हुआ, जिसमें एक थाना अध्यक्ष की बुलेट प्रूफ जैकेट पर गोली लगी और दो पुलिसकर्मी घायल हो गए।
आपराधिक पृष्ठभूमि और सुपारी किलिंग
जांच में सामने आया है कि सरबजीत सिंह का आपराधिक रिकॉर्ड काफी लंबा था। उस पर लखीमपुर खीरी समेत आसपास के जिलों में हत्या के दो मामलों सहित कुल 12 मुकदमे दर्ज थे। वह मुख्य रूप से सुपारी लेकर अपराध करने के लिए जाना जाता था और इसके लिए उसने अपना एक संगठित गिरोह तैयार कर रखा था। घटना की जड़ में बिलसंडा के एक साइकिल व्यापारी पंकज कटियार और उनके ससुर रमेंश चंद्र के बीच का विवाद था। रमेंश चंद्र मूल रूप से शाहजहांपुर का निवासी है। उसी ने लखीमपुर खीरी के उचौलिया के रहने वाले शिवम उर्फ सरबजीत को पंकज पर हमला करने की सुपारी दी थी।
पप्पू गुप्ता हत्याकांड की परतें
बीते 28 मई को जब शिवम और उसके साथी बिलसंडा बाजार में पंकज कटियार को निशाना बनाने पहुंचे, तब एक स्थानीय दुकानदार पप्पू गुप्ता बीच-बचाव के लिए आगे आ गए। इस दौरान बदमाशों ने गोलीबारी की जिसमें पप्पू गुप्ता की जान चली गई। घटना के बाद रमेश चंद्र, विमल, सीतेश, लकी, संजय, सीताराम राठौर और सुमित सहित कई अज्ञात लोगों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज की गई। पुलिस ने घटना के 24 घंटे के भीतर ही लकी को एक मुठभेड़ के दौरान गिरफ्तार कर लिया था। लकी से हुई पूछताछ के बाद ही पुलिस को शिवम उर्फ सरबजीत की भूमिका के बारे में पता चला और उसे मामले में वांछित अपराधी घोषित किया गया।
एनकाउंटर का विवरण
एसपी सुकीर्ति माधव मिश्र के अनुसार, शनिवार की रात को शिवम बिलसंडा इलाके में किसी दूसरी वारदात को अंजाम देने की योजना बना रहा था। सटीक सूचना मिलने पर पुलिस टीम ने रात 9 बजकर 50 मिनट पर शीतलपुर मरौरी के जंगल में उसकी घेराबंदी की। पुलिस को देखते ही शिवम ने सेमी ऑटोमैटिक पिस्टल से ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। एक गोली बिलसंडा थाना प्रभारी जगदीप मलिक की बुलेट प्रूफ जैकेट से जा टकराई, जबकि अन्य गोलियां एसओजी दारोगा उमेश त्यागी और सिपाही हरेंद्र को लग गईं।
मुठभेड़ का अंतिम परिणाम
पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए मोर्चा संभाला। इस जवाबी फायरिंग में सरबजीत सिंह को तीन गोलियां लगीं और वह घायल होकर जमीन पर गिर पड़ा। उसे तुरंत इलाज के लिए जिला अस्पताल ले जाया गया, लेकिन रात 12 बजे के करीब डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।













