अयोध्या राम मंदिर से जुड़ी दान राशि के कथित गबन के मामले में लगातार बढ़ते दबाव के बीच एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और अनिल मिश्रा ने अंततः अपना इस्तीफा ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास को सौंप दिया है। यह कदम तब उठाया गया है जब पिछले दिनों मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अयोध्या दौरे के दौरान चंपत राय को उनके आधिकारिक कार्यक्रमों से दूर रखा गया था।
संसद में गूंजेगी दान चोरी की गूंज
इस पूरे मामले को लेकर राजनीतिक सरगर्मी काफी तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने स्पष्ट किया है कि वे अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के इस गंभीर विषय को संसद के आगामी मानसून सत्र में प्रमुखता से उठाएंगे। उनका कहना है कि यह देश के सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक है और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था इससे जुड़ी है, इसलिए सरकार को इसका जवाब देना ही होगा।
जांच और कानूनी कार्रवाई का भरोसा
उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार ने घटना को लेकर सख्त रुख अपना लिया है। मामले में एफआईआर दर्ज कर ली गई है और कानून के अनुसार दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। उधर, वरिष्ठ अधिवक्ता हरि शंकर जैन ने इस पर अपनी बात रखते हुए कहा कि जांच जारी है और सच सामने आना बाकी है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि घोटाला होने की स्थिति में कोई भी राम भक्त इसका समर्थन नहीं कर सकता और हर कोई दोषियों के लिए सख्त सजा की मांग कर रहा है।
जेल में आरोपियों की सुरक्षा व्यवस्था
कानूनी कार्रवाई के तहत इस मामले में आठ लोगों को जेल भेजा गया है। मंडलीय जेल अधीक्षक मुकेश कुमार के अनुसार, इन सभी आठों कैदियों को विशेष निगरानी में रखा गया है। जेल प्रशासन ने एहतियात के तौर पर इन्हें अलग-अलग बैरक में बंद किया है ताकि किसी अन्य कैदी से इनका सामना न हो सके और सुरक्षा पूरी तरह बनी रहे।













