समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बुधवार को लखनऊ स्थित पार्टी मुख्यालय में संवाददाताओं को संबोधित करते हुए प्रशासनिक बुलडोजर ध्वस्तीकरण अभियान पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। उन्होंने ऐलान किया कि शासन द्वारा बुलडोजर एक्शन के तहत तोड़े गए मकानों, दुकानों और नष्ट की गई निजी संपत्ति का हर्जाना वर्तमान सरकार को चुकाना चाहिए। यदि मौजूदा प्रशासन इस नुकसान की भरपाई नहीं करता है, तो भविष्य में समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर प्रभावित परिवारों को उनके एक-एक पैसे के नुकसान का पूरा मुआवजा दिया जाएगा।
सामान निकालने तक का अवसर नहीं दिए जाने पर जताई नाराजगी
प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिलेश यादव ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि गरीबों की जीवनभर की मेहनत की गाढ़ी कमाई उनके आशियाने में लगी होती है। सरकार का रुख निर्धन वर्ग के प्रति संवेदनशील और उदार होना चाहिए, लेकिन इसके विपरीत बस्तियों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर बेरहमी से बुलडोजर चला दिए गए। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी ध्वस्तीकरण से पहले नागरिकों को अपने घरेलू उपकरण, जरूरी कागजात और निजी सामान सुरक्षित बाहर निकालने की पर्याप्त मोहलत मिलनी चाहिए थी।
सपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि पीड़ितों को उनका सामान समेटने की इजाजत नहीं दी गई और अधिकारियों ने घर की सारी चीजें बुलडोजर की मदद से भरवाकर कहीं अन्यत्र भिजवा दीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि समाजवादी पार्टी हर पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है और सत्ता में आने पर संरचनात्मक क्षति के साथ-साथ खोए हुए सामान की पाई-पाई की भरपाई सुनिश्चित करेगी।
पीड़ितों ने बताई अपनी आपबीती, साझा किया गया संपत्तियों का ब्योरा
पार्टी मुख्यालय में आयोजित इस बातचीत के दौरान बुलडोजर कार्रवाई से प्रभावित महिलाओं ने सीधे मंच से अपनी पीड़ा बयां की। महिलाओं ने बताया कि किस तरह बिना किसी पूर्व चेतावनी और तैयारी के उनके घरों को मलबे में तब्दील कर दिया गया। इसके पश्चात अखिलेश यादव ने प्रशासनिक ध्वस्तीकरण की चपेट में आए प्रभावित नागरिकों के नाम और उनकी नष्ट हुई संपत्तियों का आधिकारिक विवरण भी सार्वजनिक किया, जिससे हुए नुकसान का आकलन स्पष्ट हो सके।
चुनाव आयोग और प्रांतीय चुनावों की निष्पक्षता पर गंभीर आरोप
अखिलेश यादव ने प्रशासनिक कार्रवाई के अलावा चुनाव आयोग की भूमिका पर भी विस्तार से सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि बीते 10 महीनों की अवधि में आयोग के विभिन्न अधिकारियों ने 14 बार अपनी आंतरिक आपत्तियां और असहमति नोट दर्ज कराए हैं। सपा प्रमुख ने कहा कि इतने बड़े पैमाने पर आंतरिक आपत्तियां दर्ज होना इस बात का प्रमाण है कि संवैधानिक संस्थाएं किसके दबाव में काम कर रही हैं। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए एक अत्यंत घातक संकेत करार दिया।
इसके साथ ही उन्होंने बिहार और पश्चिम बंगाल के चुनावों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में केंद्रीय पुलिस बलों का दुरुपयोग करके चुनावी नतीजों और पूरी प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास किया गया। अखिलेश के अनुसार इस प्रकार के अनुचित हस्तक्षेप से नवनिर्मित सरकारों की संवैधानिक वैधता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं और निष्पक्ष लोकतांत्रिक परंपराओं को गहरी ठेस पहुंचती है।
मताधिकार की ताकत से जवाब देगी जनता
सपा प्रमुख ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर विश्वास जताते हुए कहा कि जनता को अपने भविष्य का फैसला करने का मौका चुनाव में मिलता है। उन्होंने कहा कि नागरिक आने वाले चुनावों में अपने मताधिकार का पूरी ताकत से इस्तेमाल करेंगे और वोट की शक्ति से इस सरकार को सत्ता से हमेशा के लिए बाहर का रास्ता दिखा देंगे।



















