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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट के बीच सीट शेयरिंग पर भिड़े सपा और कांग्रेस नेताउत्तर प्रदेश
23 सित॰ 2026, 2:11 pm (2 घंटे पहले)· 0

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट के बीच सीट शेयरिंग पर भिड़े सपा और कांग्रेस नेता

उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर विपक्षी मोर्चे में दरार दिखने लगी है, जहां सीट बंटवारे और नेतृत्व को लेकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के सांसदों के बीच तीखी तकरार छिड़ गई है।

उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में आगामी विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही राजनीतिक तापमान अचानक बढ़ गया है। चुनावी मैदान में उतरने के लिए तमाम दल अपनी रणनीतियां तैयार करने और प्रचार अभियान की रूपरेखा खींचने में जुट चुके हैं। इसी गहमागहमी के बीच विपक्षी खेमे के दो प्रमुख सहयोगियों, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के रिश्तों में खटास खुलकर सामने आने लगी है। सीटों के बंटवारे और चुनावी अगुवाई को केंद्र में रखकर दोनों दलों के वरिष्ठ नेता एक-दूसरे पर सीधे हमले बोल रहे हैं, जिससे गठबंधन के भविष्य पर कई तरह के सवाल खड़े होने लगे हैं।

सीटों के त्वरित बंटवारे की मांग पर भड़की रार

इस सियासी विवाद की शुरुआत कांग्रेस सांसद इमरान मसूद की उस टिप्पणी के बाद हुई, जिसमें उन्होंने उत्तर प्रदेश में सीट वितरण का काम जल्द से जल्द निपटाने पर बल दिया था। मसूद का तर्क था कि वक्त तेजी से निकल रहा है, इसलिए अखिलेश यादव को बिना किसी विलंब के सीटों के तालमेल पर फैसला कर लेना चाहिए ताकि गठबंधन जमीन पर मजबूती से काम कर सके। कांग्रेस सांसद का यह बयान समाजवादी पार्टी के रणनीतिकारों को रास नहीं आया और उन्होंने इसे अनावश्यक दबाव बनाने की कोशिश करार दिया। नतीजतन, सपा की ओर से इस पर त्वरित और कड़े पलटवार का सिलसिला शुरू हो गया।

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सपा सांसदों ने संभाला मोर्चा, कांग्रेस की ताकत पर उठाए सवाल

इमरान मसूद के बयान के बाद समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन ने कांग्रेस को उसकी सियासी हैसियत का आईना दिखाते हुए कड़ा रुख अपनाया। इकरा हसन ने साफ लफ्जों में कहा कि उत्तर प्रदेश की धरती पर भारतीय जनता पार्टी को परास्त करने की वास्तविक क्षमता केवल अखिलेश यादव के पास है। उन्होंने नसीहत दी कि कांग्रेस को किसी गलतफहमी में नहीं रहना चाहिए, क्योंकि वह अपने बलबूते राज्य में कुछ भी हासिल करने की स्थिति में नहीं है। सांसद ने स्पष्ट किया कि यदि गठबंधन बना रहता है तो यह सभी के लिए अच्छा होगा, लेकिन तालमेल टूटने की सूरत में नुकसान पूरी तरह से कांग्रेस का होगा, सपा का नहीं।

अखिलेश की ताजपोशी का दावा और धर्मेंद्र यादव की चेतावनी

विवाद गहराते ही समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने भी कांग्रेस पर सीधा निशाना साधा और अपनी सहयोगी पार्टी को अपने नेताओं के बयानों पर अंकुश लगाने की नसीहत दे डाली। धर्मेंद्र यादव ने कहा कि 2024 के चुनाव में राहुल गांधी और अखिलेश यादव के साझा प्रयासों से इंडिया गठबंधन को जो अभूतपूर्व सफलता मिली थी, वह 2027 के चुनाव में और भी बड़े जनादेश में बदलने वाली है। सपा सांसद ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में अगली सरकार अखिलेश यादव के नेतृत्व में ही बनेगी और वे भारी बहुमत के साथ मुख्यमंत्री पद संभालेंगे। उन्होंने यह भी जोड़ा कि जिन्हें इस नेतृत्व पर संदेह है, वे नतीजे आने तक का इंतजार करें।

बंगाल का हवाला देकर इमरान मसूद का पलटवार

सपा सांसदों की ओर से आई तीखी प्रतिक्रियाओं के बाद कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने एक बार फिर मोर्चा संभालते हुए जवाबी वार किया। मसूद ने समाजवादी पार्टी को तृणमूल कांग्रेस और पश्चिम बंगाल के पिछले घटनाक्रम की याद दिला दी। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि बयानबाजी करने वालों को यह देखना चाहिए कि बंगाल में जब ऐसी ही बातें की गई थीं तब क्या हश्र हुआ था। इमरान मसूद ने आगाह करते हुए कहा कि दोनों दलों की भलाई इसी में है कि वे मिल-जुलकर चलें, क्योंकि एकजुटता ही सुकून और चुनावी सफलता का रास्ता खोल सकती है। दोनों खेमों की यह तल्खी अब राज्य की सियासत में चर्चा का सबसे बड़ा मुद्दा बन चुकी है।

सवाल-जवाब

उत्तर प्रदेश में सपा और कांग्रेस नेताओं के बीच विवाद क्यों शुरू हुआ?
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद द्वारा अखिलेश यादव से जल्द सीट बंटवारा करने की सार्वजनिक मांग के बाद दोनों दलों के नेताओं में बयानबाजी तेज हो गई।
सपा सांसद इकरा हसन ने कांग्रेस को लेकर क्या बयान दिया?
इकरा हसन ने कहा कि यूपी में भाजपा को सिर्फ अखिलेश यादव हरा सकते हैं और कांग्रेस अपने दम पर कुछ नहीं कर पाएगी।
सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने मुख्यमंत्री पद को लेकर क्या दावा किया?
धर्मेंद्र यादव ने दावा किया कि 2027 के चुनाव में इंडिया गठबंधन को भारी जीत मिलेगी और अखिलेश यादव पूर्ण बहुमत से मुख्यमंत्री बनेंगे।
इमरान मसूद ने सपा नेताओं को किसका उदाहरण देकर चेतावनी दी?
इमरान मसूद ने पश्चिम बंगाल और तृणमूल कांग्रेस के पिछले घटनाक्रम की याद दिलाते हुए सपा को एकजुट होकर साथ चलने की सलाह दी।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Ananya Iyer@ananya-iyer·40 मिनट पहले

मुझे पिछले साल लखनऊ में ऐसे ही एक प्रेस इवेंट के दौरान याद है जब नेता मंच पर मुस्कुरा रहे थे और बाहर उनके समर्थक आपस में भिड़ गए थे। टिकट बंटवारे का यह झगड़ा चुनाव से पहले ही गठबंधन को अंदर से खोखला कर रहा है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·1 घंटे पहले

चुनाव से पहले ही सीट के लिए खींचतान शुरू हो गई है। अगर आपसी कलह ऐसे ही चलती रही तो जमीन पर तैयारी का क्या होगा?

Ravikash Gupta@ravikash·1 घंटे पहले

अर्जुन भाई, बिल्कुल सही कह रहे हैं आप। पिछली बार जब मैं लखनऊ गया था, तब भी ऐसे ही आपसी झगड़े में ज़मीनी कार्यकर्ताओं का जोश ठंडा पड़ते देखा था।

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

इकरा हसन ने तो एक झटके में कांग्रेस को उसकी औकात बता दी, चुनाव से पहले ही गठबंधन टूटने की नौबत आ गई है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

रोहन भाई, पिछली बार भी जब मैं कवरेज के सिलसिले में लखनऊ गया था, तो नेताओं के ऐसे ही तेवर देखकर समझ आ गया था कि गठबंधन सिर्फ कागजों पर ही टिकता है।

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