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पूजा पाल की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, राजू पाल मर्डर केस के दो दोषियों को नोटिस जारी कर तीन हफ्ते में जवाब मांगाउत्तर प्रदेश
20 अग॰ 2026, 1:48 pm (70 दिन पहले)· 2

पूजा पाल की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, राजू पाल मर्डर केस के दो दोषियों को नोटिस जारी कर तीन हफ्ते में जवाब मांगा

2005 के राजू पाल मर्डर केस में उम्रकैद की सजा काट रहे आबिद प्रधान और जावेद को मिली जमानत को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है, जहां सीबीआई ने भी जमानत रद्द करने का समर्थन किया।

सर्वोच्च अदालत ने प्रयागराज के चर्चित राजू पाल हत्याकांड में उम्रकैद की सजा काट रहे दो दोषियों की जमानत के मामले पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने विधायक पूजा पाल की याचिका पर सुनवाई करते हुए दोनों दोषियों को नोटिस थमाया है और उनसे जवाब तलब किया है। इस अहम सुनवाई के दौरान केंद्रीय जांच एजेंसी यानी सीबीआई ने भी याचिकाकर्ता का खुलकर समर्थन किया और दोनों दोषियों की रिहाई को खारिज करने की मांग उठाई।

सर्वोच्च अदालत का नोटिस और सीबीआई का रुख

करीब बीस साल पुराने राजू पाल हत्याकांड में उम्रकैद भुगत रहे आबिद प्रधान और जावेद को मिली जमानत अब कानूनी पचड़े में फंस गई है। मृतक विधायक की पत्नी पूजा पाल ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाकर दोनों की जमानत रद्द करने की अपील की है। अदालत ने इस मामले पर संज्ञान लेते हुए दोनों दोषियों को जवाब दाखिल करने के लिए तीन हफ्ते का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद तय की गई है। अदालत के कक्ष में सुनवाई के वक्त सीबीआई के वकील ने पूजा पाल की अर्जी का पूरा समर्थन किया और स्पष्ट किया कि दोषियों की जमानत रद्द की जानी चाहिए।

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घातक हथियारों का इस्तेमाल और तथ्य छिपाने के संगीन आरोप

अदालत में पूजा पाल की तरफ से पेश हुए अधिवक्ता ने 2005 में हुए इस दर्दनाक कांड की भयावहता को सामने रखा। उन्होंने पीठ को बताया कि जनवरी 2005 में राजू पाल समेत तीन लोगों की सरेराह गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई थी। इस भीषण हमले में हमलावरों ने एके-47 जैसे अत्याधुनिक और विनाशकारी हथियारों का बेधड़क प्रयोग किया था। याचिका में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा गया कि आबिद प्रधान और जावेद ने अदालत से जमानत हासिल करते समय अपनी पुरानी आपराधिक पृष्ठभूमि और मुकदमे से जुड़े कई बेहद अहम तथ्यों को छिपाया था। इसी गुमराह करने वाले रवैये को आधार बनाकर उनकी रिहाई को चुनौती दी गई है।

2005 का बहुचर्चित हत्याकांड और शुरुआती पुलिस जांच

जनवरी 2005 में उत्तर प्रदेश के प्रयागराज शहर में तत्कालीन बीएसपी विधायक राजू पाल की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई थी। इस घटना के तुरंत बाद उनकी पत्नी पूजा पाल ने धूमनगंज पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इस मामले में बाहुबली तत्कालीन सांसद अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ उर्फ खालिद अजीम को मुख्य साजिशकर्ता के रूप में नामजद किया गया था। पुलिस ने मामले की गहन तफ्तीश करने के बाद 6 अप्रैल 2005 को अतीक अहमद और अशरफ समेत कई अन्य आरोपियों के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसा था और आरोप पत्र दाखिल किया था।

मुख्य गवाह उमेश पाल की हत्या और मुख्य आरोपियों का अंत

राजू पाल हत्याकांड का सिलसिला यहीं नहीं थमा, बल्कि इसके मुख्य गवाह उमेश पाल भी अपराधियों के निशाने पर आ गए। फरवरी 2023 में प्रयागराज के धूमनगंज इलाके में उमेश पाल के घर के ठीक बाहर आधुनिक हथियारों और देशी बमों से प्राणघातक हमला किया गया। इस हमले में उमेश पाल और उनकी सुरक्षा में तैनात दो पुलिसकर्मियों की मौके पर ही मौत हो गई। इस हत्याकांड में भी अतीक अहमद गिरोह का नाम सामने आया था। इसके बाद अप्रैल 2023 में मामले के मुख्य अभियुक्त अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की प्रयागराज में पुलिस अभिरक्षा के दौरान ही मीडिया से बातचीत के वक्त पत्रकारों के भेष में आए हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी।

सवाल-जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने राजू पाल हत्याकांड में क्या कदम उठाया है?
अदालत ने उम्रकैद की सजा काट रहे दोषी आबिद प्रधान और जावेद को नोटिस जारी करके उनकी जमानत रद्द करने की याचिका पर तीन सप्ताह में जवाब मांगा है।
सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका किसने दायर की थी?
मृतक विधायक राजू पाल की पत्नी और विधायक पूजा पाल ने दोनों दोषियों को मिली जमानत को रद्द कराने के लिए सर्वोच्च अदालत में याचिका दाखिल की थी।
सुनवाई के दौरान सीबीआई का क्या रुख रहा?
केस की जांच कर रही केंद्रीय एजेंसी सीबीआई ने अदालत में पूजा पाल की याचिका का पूरा समर्थन किया और दोषियों की जमानत रद्द करने की मांग रखी।
दोषियों की जमानत पर क्या मुख्य आरोप लगाए गए हैं?
याचिका में आरोप लगाया गया है कि आबिद प्रधान और जावेद ने जमानत लेते समय अपनी आपराधिक पृष्ठभूमि और मुकदमे से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों को अदालत से छिपाया था।
राजू पाल हत्याकांड की घटना कब और कैसे हुई थी?
जनवरी 2005 में प्रयागराज में तत्कालीन बीएसपी विधायक राजू पाल समेत तीन लोगों की दिनदहाड़े एके-47 जैसे अत्याधुनिक हथियारों से हमला करके हत्या कर दी गई थी।
मामले के मुख्य गवाह उमेश पाल के साथ क्या हुआ था?
फरवरी 2023 में धूमनगंज इलाके में स्थित उनके घर के बाहर बम और गोलियों से हमला करके मुख्य गवाह उमेश पाल और उनके दो सुरक्षाकर्मियों की हत्या कर दी गई थी।
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