उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट तेज होते ही स्थानीय धरातलीय समस्याओं को लेकर आम जनता का आक्रोश सरेआम सड़कों पर दिखाई देने लगा है। नोएडा के सेक्टर 22 में स्थित चौड़ा सादतपुर गांव के निवासियों ने क्षेत्र की बदहाली, लगातार जलभराव और लचर प्रशासनिक कार्यप्रणाली से त्रस्त होकर अपने स्थानीय विधायक और नोएडा प्राधिकरण के आलाधिकारियों को 10 में से शून्य अंक दिया है। गांव के बुजुर्गों, उत्साही युवाओं और आगामी चुनाव में पहली बार मतदान करने जा रहे नए मतदाताओं ने एक स्वर में अपनी भड़ास निकाली है। निवासियों का साफ कहना है कि वे राज्य स्तर पर मुख्यमंत्री योगी बाबा की सरकार के कामकाजी तरीके से तो पूरी तरह संतुष्ट हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर चुने हुए प्रतिनिधियों और प्रशासनिक अफसरों की अनदेखी ने उनके रोजमर्रा के जीवन को अत्यंत कष्टप्रद बना दिया है।
प्रधानी व्यवस्था बनाम प्राधिकरण शासन का बढ़ता अंतर
गांव के वरिष्ठ नागरिकों ईश्वरचंद और खेमचंद बैरागी ने पुरानी पंचायती व्यवस्था को याद करते हुए वर्तमान प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि पूर्व में जब गांव में प्रधानी व्यवस्था लागू थी, तब ग्रामीण किसी भी समस्या या बुनियादी शिकायत को लेकर सीधे अपने गांव के प्रधान के पास चले जाते थे और उनकी सुनवाई के साथ काम तुरंत पूरा हो जाता था। हालांकि, जब से इस पूरे क्षेत्र को नोएडा प्राधिकरण के प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र में लाया गया है, तब से ग्रामीणों के लिए केवल समस्याएं और मुसीबतें ही बढ़ी हैं। बुजुर्गों का दर्द है कि प्राधिकरण का कोई भी अधिकारी ग्रामीणों की शिकायतें सुनने या उनका स्थाई समाधान करने को तैयार नहीं होता, जिससे गांव की हालत दिन-पर-दिन अधिक खराब होती जा रही है और ग्रामीणों को रोज इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।
सेक्टरों और गांवों के बीच दोहरा रवैया
विकास दीक्षित, आदित्य, अभिषेक बैरागी और टीनू राणा जैसे स्थानीय युवाओं का आरोप है कि नोएडा प्राधिकरण शहरी सेक्टरों और गांवों के बीच स्पष्ट रूप से सौतेला व्यवहार करता है। नोएडा के विकसित सेक्टरों में चौड़ी सड़कें, स्वच्छ पेयजल, सुचारू बिजली आपूर्ति, नियमित साफ-सफाई और रखरखाव की बेहतरीन सुविधाएं मुहैया कराई जाती हैं, जबकि गांवों की बुनियादी आवश्यकताओं को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया जाता है। चौड़ा सादतपुर गांव की पतली गलियों में नालियों का उचित निर्माण न होने से हर तरफ कीचड़, गंदा पानी और गंदगी का साम्राज्य व्याप्त रहता है। ग्रामीणों का कहना है कि वे चाहे जितनी भी मनमर्जी शिकायतें दर्ज करा लें, जिम्मेदार अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंगती और न ही कोई जनप्रतिनिधि गांव का दौरा करने आता है। गांव में सफाई, बिजली, पानी और अन्य मूलभूत सुविधाओं का भारी अभाव बना हुआ है।
सीवर ओवरफ्लो से बाधित होती पढ़ाई और नए मतदाताओं की पीड़ा
वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में पहली बार अपने मताधिकार का प्रयोग करने जा रहे कनिष्क कुमार और अन्य नए युवा मतदाताओं ने अपनी दैनिक दिनचर्या की गंभीर परेशानियां साझा की हैं। इन छात्रों का कहना है कि हल्की सी बारिश होते ही या सीवर ओवरफ्लो होने पर पूरी गंदगी, मलबा और दूषित पानी गांव की संकरी गलियों में भर जाता है। जब वे सुबह स्कूल जाने के लिए घर से निकलते हैं, तो नालियों की बदबूदार गंदगी उनके जूतों में भर जाती है और कपड़े पूरी तरह खराब हो जाते हैं। कई बार स्थिति इतनी विकट हो जाती है कि वे स्कूल तक नहीं पहुंच पाते। इन नए मतदाताओं का कहना है कि बार-बार गुहार लगाने और ध्यान आकर्षित करने के बाद भी कोई उनकी समस्या को देखने या सुनने को तैयार नहीं है। बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहने के कारण ये युवा खुद को असहाय महसूस करते हैं और अपनी स्थिति को लेकर चिंतित हैं।



















