उत्तर प्रदेश के युवाओं को कौशल, रोजगार, उद्योग और उद्यमिता से एक साथ जोड़ने की योजना अब सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहेगी। इस साल उत्तर प्रदेश दिवस के मौके पर घोषित सरदार वल्लभभाई पटेल रोजगार एवं औद्योगिक क्षेत्र यानी एसवीपीईआईजेड परियोजना अब जमीन पर उतरने की तैयारी में है। पहले चरण में प्रदेशभर में कुल 16 एसवीपीईआईजेड केंद्र बनाए जाएंगे और पूरे प्रदेश को नौ हब एंड स्पोक मॉडल वाले औद्योगिक व कौशल विकास नेटवर्क के रूप में विकसित किया जाएगा।
पांच अलग-अलग एजेंसियों के जिम्मे 16 केंद्र
पहले चरण में ये 16 केंद्र अलग-अलग विभागों और प्राधिकरणों के जरिए बनाए जाएंगे। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम यानी एमएसएमई विभाग 05 केंद्रों की स्थापना, विकास और संचालन करेगा। यूपीसीडा के माध्यम से भी 05 केंद्र बनेंगे, जबकि यूपीईडा को 02 केंद्रों की जिम्मेदारी दी गई है। यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण यानी यीडा 02 केंद्र विकसित करेगा। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण और गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण को एक-एक केंद्र सौंपा गया है। इस तरह पांच अलग-अलग एजेंसियां मिलकर पूरे प्रदेश में यह नेटवर्क खड़ा करेंगी।
2017 के बाद निवेश में तेज उछाल, अब चाहिए कुशल हाथ
प्रमुख सचिव, सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम शशि भूषण लाल सुशील ने बताया कि साल 2017 के बाद उत्तर प्रदेश में निवेश और औद्योगिक गतिविधियों में जबरदस्त तेजी आई है। दुनियाभर से निवेशक आ रहे हैं, नए औद्योगिक क्षेत्र तेजी से फैल रहे हैं और तकनीक की जरूरतें भी लगातार बदल रही हैं। इस वजह से आने वाले सालों में बड़ी संख्या में कुशल कामगारों की मांग बढ़ने वाली है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा को ध्यान में रखते हुए इसी जरूरत को पूरा करने के लिए एसवीपीईआईजेड की अवधारणा तैयार की गई है, ताकि प्रदेश के युवाओं को सीधे उद्योगों की मांग के हिसाब से प्रशिक्षित किया जा सके और उन्हें रोजगार या स्वरोजगार से जोड़ा जा सके।
नौ हब एंड स्पोक जोन में बंटेगा पूरा प्रदेश
प्रमुख सचिव के मुताबिक प्रदेश को कुल नौ हब एंड स्पोक जोन में विकसित किया जाएगा। पहला जोन गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद और हापुड़ का होगा। दूसरे जोन में सहारनपुर मंडल के साथ मेरठ, बागपत और बुलंदशहर आएंगे। तीसरा जोन मुरादाबाद और बरेली मंडल का बनेगा। चौथे जोन में आगरा और अलीगढ़ मंडल शामिल होंगे। पांचवां जोन लखनऊ और अयोध्या मंडल को मिलाकर बनेगा, जबकि छठा जोन कानपुर और प्रयागराज मंडल का होगा। सातवें जोन में चित्रकूट, झांसी और विंध्याचल मंडल आएंगे। आठवां जोन वाराणसी और आजमगढ़ मंडल का बनाया जाएगा और नौवां जोन गोरखपुर, बस्ती और देवीपाटन मंडल का होगा। हर जोन को वहां की मौजूदा औद्योगिक ताकत, उपलब्ध संसाधनों और निवेश की गुंजाइश के हिसाब से अलग तरीके से विकसित किया जाएगा।
एक ही जगह मिलेगा कौशल, प्लॉट और रोजगार सहायता
प्रमुख सचिव ने बताया कि हर एसवीपीईआईजेड केंद्र एक वन स्टॉप इंडस्ट्रियल, स्किल एंड एम्प्लॉयमेंट इकोसिस्टम की तरह काम करेगा। यहां कौशल विकास केंद्र, औद्योगिक भूखंड, प्लग एंड प्ले औद्योगिक शेड, साझा सुविधा केंद्र, रोजगार सहायता केंद्र और उद्यमिता सहायता केंद्र होंगे। इसके अलावा डिजिटल साक्षरता, विदेशी भाषा प्रशिक्षण, व्यावसायिक सेवाएं और आधुनिक आधारभूत सुविधाएं भी युवाओं के लिए उपलब्ध रहेंगी। प्लग एंड प्ले व्यवस्था के तहत उद्यमियों को पहले से तैयार औद्योगिक परिसर, बिजली, पानी, सड़क और बाकी जरूरी सुविधाएं एक साथ मिल जाएंगी, जिससे वे बहुत कम समय में उत्पादन शुरू कर सकेंगे। इससे निवेश की रफ्तार तेज होगी और स्थानीय युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के मौके बनेंगे।
जमीन की कमी वाली जगहों पर बनेंगी बहुमंजिला फैक्ट्रियां
प्रमुख सचिव ने बताया कि परियोजना में जमीन का इस्तेमाल भी आज की औद्योगिक जरूरतों के हिसाब से तय किया गया है। कौशल विकास, औद्योगिक इकाइयों, प्लग एंड प्ले सुविधाओं, हरित क्षेत्र, सड़क व आधारभूत संरचना और वाणिज्यिक गतिविधियों के लिए अलग-अलग क्षेत्र बनाए जाएंगे। जिन जगहों पर पर्याप्त जमीन उपलब्ध नहीं है, वहां बहुमंजिला औद्योगिक परिसर और फ्लैटेड फैक्ट्री मॉडल अपनाया जाएगा, ताकि सीमित जमीन में भी ज्यादा उद्योग समा सकें।
हर हब का चेयरमैन बनेगा वहां का सबसे बड़ा निवेशक
प्रमुख सचिव ने बताया कि हर हब के लिए एक अलग एसपीवी यानी स्पेशल परपज व्हीकल बनाया जाएगा, और उस हब में सबसे बड़ा निवेश करने वाले उद्योगपति को ही उसका अध्यक्ष बनाया जाएगा। इससे उद्योगों की सीधी भागीदारी सुनिश्चित होगी और परियोजना का संचालन ज्यादा असरदार और नतीजों पर केंद्रित रहेगा।
गुजरात और महाराष्ट्र में टाटा समूह के मॉडल का किया अध्ययन
प्रमुख सचिव के अनुसार परियोजना का खाका तैयार करने से पहले अधिकारियों की एक टीम ने गुजरात और महाराष्ट्र जाकर टाटा समूह द्वारा विकसित औद्योगिक एवं कौशल विकास मॉडल का दौरा किया और उसका बारीकी से अध्ययन किया। वहां के सफल अनुभवों और वैश्विक मानकों को आधार बनाकर उत्तर प्रदेश के लिए उपयुक्त मॉडल तैयार किया गया है। परियोजना के विकास और संचालन में प्रतिष्ठित औद्योगिक संस्थानों को भी साथ जोड़ा जाएगा।
जहां जमीन तैयार, वहां जल्द शुरू होगा निर्माण
प्रमुख सचिव ने बताया कि जिन स्थानों पर जमीन पहले से उपलब्ध है, वहां निर्माण कार्य जल्द शुरू कर दिया जाएगा। बाकी जगहों पर यूपीसीडा, यूपीईडा, यीडा और अन्य विकास प्राधिकरणों की मदद से जमीन उपलब्ध कराकर परियोजना का विस्तार किया जाएगा। साथ ही निर्माण कार्य के साथ-साथ युवाओं के कौशल विकास और प्रशिक्षण की प्रक्रिया भी शुरू कर दी जाएगी, ताकि जब तक उद्योग काम करना शुरू करें, तब तक प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार मिल सके।
सिर्फ औद्योगिक परिसर नहीं, समेकित केंद्र बनाने की योजना
प्रमुख सचिव ने साफ किया कि मुख्यमंत्री की मंशा एसवीपीईआईजेड को केवल एक औद्योगिक परिसर के रूप में विकसित करने की नहीं है। इसे निवेश, कौशल विकास, रोजगार, नवाचार और उद्यमिता का समेकित केंद्र बनाया जाएगा। यह परियोजना प्रदेश की युवा शक्ति को आने वाले समय की औद्योगिक अर्थव्यवस्था के हिसाब से तैयार करेगी और उत्तर प्रदेश को देश का अग्रणी विनिर्माण, कौशल विकास और रोजगार सृजन केंद्र बनाने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगी।











