आगामी पर्वों जैसे श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, विश्वकर्मा पूजा और गणेश चतुर्थी के अवसर पर सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को पुख्ता रखने के लिए उच्च स्तर पर निर्देश जारी किए गए हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिस और प्रशासनिक तंत्र को पूरी संवेदनशीलता और सतर्कता के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने को कहा है। प्रदेशभर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है, जिसे देखते हुए भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों विशेषकर मथुरा और वृंदावन के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने पर जोर दिया गया है। बांके बिहारी मंदिर प्रबंधन के साथ बेहतर तालमेल बिठाने और आवश्यकतानुसार होल्डिंग एरिया विकसित करने के भी निर्देश दिए गए हैं ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
थानों में मनेगी जन्माष्टमी और तय होगी मूर्तियों की ऊंचाई
वृंदावन क्षेत्र में एक नए पुलिस सर्किल का गठन करते हुए वहां पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती सुनिश्चित करने को कहा गया है। इसके साथ ही मथुरा और वृंदावन के लिए अलग-अलग जॉइंट मजिस्ट्रेट नियुक्त किए जाएंगे। प्रदेश के सभी पुलिस थानों और पुलिस लाइनों में इस पावन पर्व को भव्य रूप से मनाने के निर्देश हैं, जहां आकर्षक झांकियां सजाई जाएंगी और आम नागरिकों की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी। दूसरी ओर, गणेश चतुर्थी के बाद आने वाले प्रतिमा विसर्जन कार्यक्रमों को लेकर भी सुरक्षा के कड़े इंतजाम करने को कहा गया है। हाईटेंशन बिजली तारों से होने वाली संभावित दुर्घटनाओं को टालने के उद्देश्य से मूर्तियों की ऊंचाई एक तय सीमा के भीतर ही रखने के निर्देश दिए गए हैं। मौजूदा समय में कई नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी को देखते हुए विसर्जन स्थलों पर विशेष सुरक्षा घेरा बनाने की हिदायत दी गई है।
राजस्व अदालतों में पेंडिंग मामलों पर सख्ती
समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने राजस्व न्यायालयों में वर्षों से लंबित मुकदमों के जल्द निस्तारण पर विशेष बल दिया। आम नागरिकों की भूमि, संपत्ति और उनके कानूनी अधिकारों से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की हीलाहवाली बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अदालतों में चली आ रही तारीख पर तारीख की पुरानी संस्कृति को हर हाल में समाप्त करने के निर्देश दिए गए हैं। नायब तहसीलदार की अदालत से लेकर राजस्व परिषद तक पांच साल से ज्यादा समय से अटके सभी मामलों की पहचान कर उन्हें नियोजित तरीके से सुलझाने को कहा गया है। खासतौर पर धारा 33 के तहत आने वाले अविवादित वरासत मामलों को मिशन मोड में पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
कागजी खानापूर्ति नहीं बल्कि वास्तविक समाधान
समीक्षा बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजित की गई थी, जिसमें शासन के वरिष्ठ अधिकारी और फील्ड में तैनात पुलिस-प्रशासन के अधिकारी शामिल हुए। इस दौरान जनता दर्शन और आईजीआरएस पोर्टल पर मिलने वाली शिकायतों के त्वरित और संतोषजनक निस्तारण पर जोर दिया गया। यह स्पष्ट किया गया कि शिकायतों का निपटारा सिर्फ कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि पीड़ित व्यक्ति की वास्तविक समस्या का स्थायी समाधान होना चाहिए। किसी भी प्रकरण को बंद करने से पहले उससे जुड़े दस्तावेजों और तथ्यों की उचित जांच अनिवार्य की गई है। जिन मामलों में गलत या अधूरी रिपोर्ट लगाकर प्रकरण बंद कर दिए गए हैं, वहां असंतुष्ट फीडबैक के आधार पर दोबारा समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं।
अपराध नियंत्रण और महिला सुरक्षा पर विशेष जोर
बैठक के दौरान पिछले कुछ हफ्तों के दौरान राज्य में दर्ज अपराधों के आंकड़ों की भी समीक्षा की गई। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि कानून व्यवस्था की स्थिति में सुधार हुआ है और विभिन्न श्रेणियों के तहत दर्ज मुकदमों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है। इसके बावजूद महिलाओं और बच्चों से जुड़े अपराधों में पूरी संवेदनशीलता और सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। जोन और रेंज स्तर पर साप्ताहिक आधार पर अपराधों का विश्लेषण करने को कहा गया है ताकि स्थिति का सही आकलन हो सके। महिला बीट पुलिस अधिकारियों को मैदान में अधिक सक्रिय रहने और छेड़खानी तथा चेन स्नेचिंग जैसी वारदातों पर बिना किसी नरमी के सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
माफियाओं पर शिकंजा और बाढ़ राहत कार्यों की निगरानी
राज्यभर में माफिया तत्वों के खिलाफ चल रही कार्रवाई को लगातार जारी रखने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा गो-तस्करी, धर्मांतरण, धार्मिक स्थलों को नुकसान पहुंचाने और महापुरुषों की प्रतिमाओं से छेड़छाड़ जैसी घटनाओं को लेकर पुलिस और प्रशासन को चौबीसों घंटे अलर्ट रहने को कहा गया है। चित्रकूट, फर्रुखाबाद, अयोध्या, आजमगढ़ और बाराबंकी जैसे जिलों में बाढ़ राहत कार्यों की विशेष समीक्षा की गई। बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री की गुणवत्ता खुद जिलाधिकारी सुनिश्चित करेंगे और राहत शिविरों में लोगों को भरतनाट्यम व गर्म भोजन उपलब्ध कराया जाएगा। जलभराव वाले क्षेत्रों में सांप काटने की घटनाओं से निपटने के लिए अस्पतालों में एंटी-वेनम और एंटी-रेबीज इंजेक्शनों की पर्याप्त उपलब्धता रखने के निर्देश दिए गए हैं, जबकि पशुओं में फैलने वाली लंपी बीमारी से बचाव के लिए पशुपालन विभाग को तुरंत कदम उठाने को कहा गया है।



















