बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने संस्थान में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक सख्त कदम उठाया है। समिति ने अध्यक्ष कार्यालय से जुड़े व्यक्तिगत सहायक (पीए) प्रमोद नौटियाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का निर्णय लिया है। यह कार्रवाई उस समय हुई है जब बद्रीनाथ धाम में चढ़ावे और दान के रूप में प्राप्त होने वाली धनराशि में वित्तीय गड़बड़ी की शिकायतें सामने आई थीं। इन गंभीर आरोपों के बाद स्थानीय तीर्थ पुरोहितों, हक-हकूकधारियों और विपक्षी दलों ने मामले की उच्च-स्तरीय जांच कराने के लिए जोरदार दबाव बनाया था।
जांच समिति का गठन और पड़ताल
इस पूरे मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए, चार सदस्यों वाली एक विशेष जांच समिति का गठन किया गया था। इस समिति की प्रारंभिक रिपोर्ट में प्रमोद नौटियाल के विरुद्ध लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए, जिसके बाद निलंबन की यह औपचारिक प्रक्रिया अपनाई गई है। वर्तमान में यह जांच दल बद्रीनाथ धाम में मौजूद है और मामले के हर पहलू की बारीकी से पड़ताल कर रहा है। धामी सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति का हवाला देते हुए बीकेटीसी प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मंदिर की गरिमा और साख को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी व्यक्ति को किसी भी स्थिति में माफ नहीं किया जाएगा।
जांच की प्रक्रिया और आगे की रणनीति
बद्रीनाथ धाम में चढ़ावे में हुई कथित धांधली की जांच ने अब गति पकड़ ली है। चार सदस्यीय जांच टीम ने धाम में डेरा डाल दिया है। यह टीम 10 जुलाई तक बद्रीनाथ में रहकर दस्तावेजों और मंदिर के रिकॉर्ड का गहन अध्ययन करेगी। मंदिर समिति के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) सोहन सिंह रांगड़ ने बताया कि टीम हर जरूरी रिकॉर्ड की पड़ताल कर रही है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ भी की जाएगी। सोहन सिंह रांगड़ ने जोर देते हुए कहा कि पूरी जांच प्रक्रिया पूरी तरह से निष्पक्ष होगी। यदि जांच में कोई भी दोषी पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध नियमों के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अभी जांच चल रही है और रिपोर्ट के आधार पर भविष्य के कदम तय किए जाएंगे।











