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देहरादून की संकरी गलियों में हजारों छात्रों की जान दांव पर, फायर सेफ्टी के बिना चल रहे सैकड़ों कोचिंग सेंटरउत्तराखंड
24 जून 2026, 4:01 pm (136 दिन पहले)· 4

देहरादून की संकरी गलियों में हजारों छात्रों की जान दांव पर, फायर सेफ्टी के बिना चल रहे सैकड़ों कोचिंग सेंटर

देहरादून में 200 से 300 कोचिंग सेंटर चल रहे हैं, जिनमें से कई तंग गलियों में बिना वेंटिलेशन, बिना दूसरे रास्ते और बिना फायर सेफ्टी इंतजाम के संचालित हो रहे हैं. लखनऊ अग्निकांड के बाद इनकी सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं.

‘एजुकेशन हब’ के तौर पर पहचान बना चुके देहरादून में आज हजारों छात्र-छात्राएं बेहतर भविष्य का सपना लेकर दिन-रात पढ़ाई कर रहे हैं, लेकिन जिन इमारतों में वे बैठते हैं, उनमें से कई किसी भी पल बड़े हादसे का कारण बन सकती हैं. शहर में इस वक्त करीब 200 से 300 कोचिंग सेंटर चल रहे हैं और इनमें से बहुत से सुरक्षा मानकों को पूरी तरह नजरअंदाज करके संचालित हो रहे हैं. हाल ही में लखनऊ में हुए अग्निकांड के बाद इन सेंटरों की सुरक्षा को लेकर चिंता और गहरा गई है.

शहर के मुख्य बाजारों और संकरी गलियों में चल रहे ये संस्थान न तो ढंग के वेंटिलेशन वाले हैं और न ही इनमें आपातकालीन निकास का कोई पुख्ता इंतजाम है. हालत यह है कि कई जगह खिड़कियों और छतों पर लगे बड़े-बड़े विज्ञापन बोर्ड और बैनरों ने हवा और रोशनी के रास्ते तक बंद कर दिए हैं. ऊपर से इन सेंटरों के बाहर लटके बिजली के तारों के जंजाल ने खतरे को कई गुना बढ़ा दिया है. आग या किसी भी अप्रिय स्थिति में इन इमारतों से सुरक्षित बाहर निकलना अपने आप में एक बड़ी चुनौती बन जाएगा.

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तंग गलियां और इकलौता रास्ता

देहरादून के धर्मपुर और करनपुर जैसे प्रमुख इलाकों में चल रहे ज्यादातर कोचिंग सेंटर बेहद तंग और संकरी गलियों में बने हैं. कई संस्थान तो ऐसी जर्जर और छोटी जगहों पर चल रहे हैं, जहां एंट्री और एग्जिट के लिए सिर्फ एक ही संकरा रास्ता है. यानी अगर कभी आग लगी या भगदड़ मची, तो छात्रों के पास बाहर निकलने का कोई दूसरा विकल्प ही नहीं बचेगा.

फायर सेफ्टी के नाम पर खानापूर्ति

नियम कहते हैं कि हर कोचिंग सेंटर में आग से बचाव के पूरे और पुख्ता इंतजाम तथा उपकरण होने चाहिए. लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है. देहरादून के इन सेंटरों में वॉटर स्प्रिंकलर और फायर अलार्म जैसी सबसे बुनियादी चीजें तक नदारद हैं, जो किसी बड़े हादसे को सीधे न्योता दे रही हैं.

क्या कह रहा है अग्निशमन विभाग

देहरादून के मुख्य अग्निशमन अधिकारी (CFO) अभिनव त्यागी के मुताबिक, फायर सीजन की शुरुआत से ही शहर में अग्नि सुरक्षा को लेकर लगातार अभियान चलाया जा रहा है. विभाग की टीम कोचिंग संस्थानों, होटलों और दूसरी व्यावसायिक इमारतों की बारीकी से जांच कर रही है. उन्होंने बताया कि पिछले महीने ही शहर की 200 से ज्यादा इमारतों का सेफ्टी ऑडिट कराया गया. जांच में जो भी संस्थान या इमारतें सुरक्षा मानकों पर खरी नहीं उतरीं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई और नियम तोड़ने वाले कई संस्थानों की फायर NOC तक रद्द कर दी गई. प्रशासन का साफ कहना है कि छात्रों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी संस्थान को बख्शा नहीं जाएगा.

सवाल-जवाब

देहरादून में इस समय कितने कोचिंग सेंटर चल रहे हैं?
शहर में इस वक्त करीब 200 से 300 कोचिंग सेंटर चल रहे हैं, जिनमें हजारों छात्र-छात्राएं पढ़ रहे हैं.
इन कोचिंग सेंटरों को लेकर चिंता अचानक क्यों बढ़ी?
हाल ही में लखनऊ में हुए अग्निकांड के बाद देहरादून के इन सेंटरों की सुरक्षा को लेकर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं.
किन इलाकों के कोचिंग सेंटर सबसे ज्यादा खतरे में हैं?
धर्मपुर और करनपुर जैसे प्रमुख इलाकों में चल रहे कई सेंटर बेहद तंग गलियों में हैं, जहां एंट्री और एग्जिट के लिए सिर्फ एक ही संकरा रास्ता है.
इन सेंटरों में फायर सेफ्टी की क्या स्थिति है?
नियमों के बावजूद इन सेंटरों में वॉटर स्प्रिंकलर और फायर अलार्म जैसी बुनियादी चीजें तक नदारद हैं.
खिड़कियों और छतों पर लगे बैनर खतरा कैसे बढ़ा रहे हैं?
बड़े-बड़े विज्ञापन बोर्ड और बैनरों ने हवा और रोशनी के रास्ते बंद कर दिए हैं और बाहर लटके बिजली के तारों ने खतरे को और बढ़ा दिया है.
अग्निशमन विभाग ने अब तक क्या कार्रवाई की है?
पिछले महीने 200 से ज्यादा इमारतों का सेफ्टी ऑडिट कराया गया और नियम तोड़ने वाले कई संस्थानों की फायर NOC रद्द कर दी गई.
इस मामले पर अधिकारी क्या कह रहे हैं?
मुख्य अग्निशमन अधिकारी अभिनव त्यागी के मुताबिक फायर सीजन की शुरुआत से ही कोचिंग संस्थानों, होटलों और व्यावसायिक इमारतों की लगातार जांच की जा रही है.
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