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देहरादून में जर्जर पेड़ बने जानलेवा खतरा, मानसून से पहले ही राहगीरों पर मंडरा रहा मौत का सायाउत्तराखंड
2 घंटे पहले· 3

देहरादून में जर्जर पेड़ बने जानलेवा खतरा, मानसून से पहले ही राहगीरों पर मंडरा रहा मौत का साया

उत्तराखंड के देहरादून में मानसून की दस्तक से पहले ही शहर की सड़कों के किनारे खड़े दशकों पुराने जर्जर पेड़ राहगीरों और वाहन चालकों के लिए जानलेवा खतरा बन चुके हैं। पर्यावरण विशेषज्ञ कुलदेव सिंह नेगी ने मानसून से पहले कटाई-छटाई की मांग की है, जबकि नगर आयुक्त आलोक कुमार पांडे ने नगर निगम की पूरी तैयारी का भरोसा दिलाया है।

Arshdeep AhluwaliaArshdeep AhluwaliaNorth India Correspondent 3 मिनट पढ़ें AI के लिए
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उत्तराखंड में मानसून का इंतजार शुरू हो गया है, लेकिन देहरादून के लोगों के लिए यह मौसम सिर्फ राहत की खबर नहीं लाता। शहर की ऐतिहासिक सड़कों के किनारे दशकों से खड़े विशालकाय और अब जर्जर हो चुके पेड़ राहगीरों के लिए गंभीर खतरा बन गए हैं। प्री-मानसून बौछारों और तेज आंधी-तूफान ने जहां भीषण गर्मी से कुछ राहत दी है, वहीं इन कमजोर पेड़ों के अचानक गिरने का डर भी पैदा कर दिया है। जैसे-जैसे मानसून की भारी बारिश करीब आ रही है, यह खतरा और बड़ा होता जा रहा है।

किन इलाकों में है सबसे ज्यादा खतरा?

ईसी रोड, राजपुर रोड, सुभाष रोड और कैंट जैसे देहरादून के प्रमुख इलाकों में सालों पुराने विशालकाय पेड़ अपनी उम्र पूरी कर चुके हैं। इन पेड़ों की जड़ें कंक्रीट की सड़कों और फुटपाथ के निर्माण की वजह से अंदर ही अंदर दम तोड़ चुकी हैं। नतीजा यह है कि मामूली आंधी या हवा का एक तेज झोंका भी इन भारी-भरकम पेड़ों को ताश के पत्तों की तरह धराशायी करने के लिए काफी साबित हो रहा है। बीते दिनों आए अंधड़ में शहर के कई हिस्सों में पेड़ उखड़े और टहनियां टूटीं, जिससे यातायात ठप हुआ और कई वाहन भी इसकी चपेट में आए। मानसून की मूसलधार बारिश में जब मिट्टी पूरी तरह नम और ढीली हो जाएगी, तब इन पेड़ों के गिरने का खतरा कई गुना बढ़ जाएगा।

यह समस्या सिर्फ मुख्य सड़कों तक सीमित नहीं है। रायपुर, चकराता, रोडराजपुर रोड, प्रेमनगर, जोहड़ी और मालसी जैसे इलाकों में भी ऐसे बुजुर्ग पेड़ लोगों के सिर पर खतरे की तरह मंडरा रहे हैं। कुछ महीनों में ही मसूरी, पलटन बाजार और राजपुर रोड पर पेड़ गिरने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। राजीव गांधी कांप्लेक्स के नजदीक तो एक महिला पेड़ के नीचे दब गई थी, जो दर्शाता है कि यह खतरा कितना असली है। शहर में वैसे भी अब ज्यादा पेड़ नहीं बचे हैं, लेकिन जो बचे हैं उनमें से कई बेहद खतरनाक स्थिति में हैं।

पर्यावरण विशेषज्ञ की राय: मानसून से पहले हो कार्रवाई

देहरादून के पर्यावरणविद कुलदेव सिंह नेगी ने TrendKia से बातचीत में कहा कि सड़क के किनारे या ट्रैक के साइड खड़े पेड़ों का संज्ञान नगर निगम और वन विभाग को अपने-अपने क्षेत्र में लेना चाहिए, क्योंकि ऐसे जर्जर पेड़ हादसों को दावत देते हैं। नेगी के मुताबिक जो भी पेड़ कमजोर दिखे और बरसात में गिर सकता हो, उसे पहले ही काट देना चाहिए। लॉपिंग और कटाई-छटाई के जरिए इसे सुरक्षित किया जा सकता है। अगर पेड़ बहुत ज्यादा जर्जर हो तो उसे वहां से हटाकर उसकी जगह नए पौधे लगाने चाहिए ताकि भविष्य में यह सुरक्षित वातावरण में योगदान दे सके।

नेगी ने यह भी बताया कि बरसात का मौसम नए पेड़ लगाने के लिए सबसे बेहतर समय होता है क्योंकि इस दौरान पौधे आसानी से जीवित रह जाते हैं। खुद कैंटोनमेंट क्षेत्र में रहने वाले नेगी के अनुसार वहां का प्रशासन समय-समय पर पेड़ों का मुआयना करता है और जहां भी असुरक्षित टहनियां या कमजोर पेड़ दिखते हैं, उन्हें काट दिया जाता है। उनका कहना है कि शहर के बाकी हिस्सों में भी संबंधित विभागों को इसी तरह काम करना चाहिए।

नगर निगम का दावा: तैयारी पूरी है

देहरादून नगर आयुक्त आलोक कुमार पांडे ने कहा कि देहरादून नगर निगम मानसून के लिए पूरी तरह से तैयार है। नगर निगम परिसर में एक कंट्रोल रूम स्थापित किया जा चुका है। पांडे ने बताया कि प्रशासन को 7 इलेक्ट्रिक चेनशा मशीनों के लिए प्रस्ताव भेजा गया है, जो इस तरह के खतरनाक पेड़ों की समस्या का जल्द समाधान कर देंगी।

इसका आप पर असर

  • उत्तराखंड में: मानसून के दौरान पुराने और जर्जर पेड़ों के नीचे खड़े रहना या वाहन पार्क करना जानलेवा हो सकता है, इसलिए हर नागरिक को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी चाहिए।
  • देहरादून में: ईसी रोड, राजपुर रोड, सुभाष रोड, कैंट, रायपुर, प्रेमनगर और मालसी जैसे इलाकों से गुजरते वक्त तेज हवा या बारिश में पुराने पेड़ों से दूरी बनाए रखें और उनके नीचे रुकने से बचें।

सवाल-जवाब

देहरादून में किन सड़कों पर पेड़ों का सबसे ज्यादा खतरा है?
ईसी रोड, राजपुर रोड, सुभाष रोड और कैंट के अलावा रायपुर, चकराता, रोडराजपुर रोड, प्रेमनगर, जोहड़ी और मालसी में भी जर्जर पेड़ खतरनाक स्थिति में हैं।
इन पेड़ों की जड़ें इतनी कमजोर क्यों हो गई हैं?
कंक्रीट की सड़कों और फुटपाथ के निर्माण की वजह से इन पेड़ों की जड़ें अंदर ही अंदर दम तोड़ चुकी हैं, जिससे ये ऊपर से विशालकाय लेकिन अंदर से बेहद कमजोर हो गए हैं।
पर्यावरणविद कुलदेव सिंह नेगी ने क्या सुझाव दिए?
नेगी ने कहा कि कमजोर और जर्जर पेड़ों की मानसून से पहले लॉपिंग, कटाई-छटाई या जरूरत पड़ने पर पूरी तरह कटाई की जाए और उनकी जगह नए पौधे लगाए जाएं।
राजीव गांधी कांप्लेक्स के पास क्या हुआ था?
राजीव गांधी कांप्लेक्स के नजदीक एक महिला पेड़ के नीचे दब गई थी, जो शहर में पेड़ गिरने के खतरे की गंभीरता को सीधे दर्शाता है।
देहरादून नगर निगम ने मानसून के लिए क्या तैयारी की है?
नगर आयुक्त आलोक कुमार पांडे के मुताबिक नगर निगम परिसर में कंट्रोल रूम बनाया गया है और प्रशासन को 7 इलेक्ट्रिक चेनशा मशीनों के लिए प्रस्ताव भेजा गया है।
नए पेड़ लगाने का सबसे सही समय कौन सा है?
कुलदेव सिंह नेगी के अनुसार बरसात का मौसम नए पेड़ लगाने के लिए सबसे उपयुक्त होता है क्योंकि इस दौरान पौधे आसानी से जीवित रह जाते हैं।
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