उत्तराखंड के उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्र राजनीति आमतौर पर युवा चेहरों और उनकी आपसी प्रतिस्पर्धा के इर्द-गिर्द घूमती है, परंतु कुमाऊं विश्वविद्यालय के नैनीताल स्थित डीएसबी परिसर में इस बार एक अनोखा दृश्य उभरकर सामने आया है। वहां एक मां ने अपने बेटे के चुनावी अभियान को जमीनी स्तर पर मजबूती देने के उद्देश्य से खुद उसी महाविद्यालय में नियमित विद्यार्थी के रूप में प्रवेश ले लिया है। हल्द्वानी नगर निगम के वार्ड नंबर 10 नवाबी रोड का प्रतिनिधित्व करने वाली पार्षद बीना चौहान ने परिसर में राजनीति विज्ञान विषय में स्नातकोत्तर (एमए) की पढ़ाई शुरू की है। वह कक्षाओं में उपस्थिति दर्ज कराने के साथ ही अध्यक्ष पद पर चुनाव लड़ रहे अपने पुत्र भानु प्रताप सिंह चौहान के पक्ष में छात्र मतदाताओं से संवाद भी कर रही हैं।
नैनीताल के प्रतिष्ठित परिसर में दिलचस्प चुनावी समीकरण
डीएसबी परिसर में छात्रसंघ चुनाव की तिथि 29 सितंबर तय की गई है। इस चुनाव में अध्यक्ष पद के प्रत्याशी भानु प्रताप सिंह चौहान पूरे दमखम के साथ अपनी उम्मीदवारी पेश कर रहे हैं। उनके इस सफर में उनकी मां बीना चौहान का सहपाठी बनकर परिसर में मौजूद रहना चर्चा का विषय बना हुआ है। वह हर दिन कॉलेज पहुंचकर बेटे के प्रचार में हाथ बंटाती हैं और विभिन्न संकायों के विद्यार्थियों से संपर्क साधती हैं। उनका मानना है कि परिसर का विधिवत हिस्सा बनने से उन्हें अन्य छात्र-छात्राओं की समस्याओं और उनकी अपेक्षाओं को सीधे समझने का अवसर मिल रहा है, जिसका सीधा सकारात्मक असर चुनावी संवाद पर पड़ रहा है।
विवाह के तेरह साल बाद शुरू हुआ था उच्च शिक्षा का नया सफर
सार्वजनिक जीवन में एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि के रूप में सक्रिय रहने वाली बीना चौहान का अकादमिक रिकॉर्ड निरंतर सीखने की ललक को दर्शाता है। वर्ष 2001 में वैवाहिक बंधन में बंधने के पश्चात उनकी नियमित पढ़ाई में लंबा विराम आ गया था। इसके लगभग 13 वर्ष बीत जाने पर उन्होंने वर्ष 2014 में एमबीपीजी कॉलेज हल्द्वानी में एजुकेशन विषय से परास्नातक की उपाधि हासिल की। इसके बाद भी उनके अध्ययन का क्रम थमा नहीं और वर्ष 2025 में उन्होंने विधि स्नातक (एलएलबी) की डिग्री पूरी की। अब करीब 12 वर्षों के अंतराल के बाद उन्होंने डीएसबी परिसर में दोबारा दाखिला लेकर राजनीति विज्ञान से एमए करने का निर्णय लिया है।
बीना चौहान का स्पष्ट मत है कि ज्ञान अर्जित करने के मार्ग में उम्र कभी रुकावट नहीं बन सकती। उनका कहना है कि मतदान संपन्न हो जाने के उपरांत भी वह अपनी इस पढ़ाई को पूरे मनोयोग से जारी रखेंगी और इसे बीच में छोड़ने का कोई इरादा नहीं है।
बेटे के प्रयासों को सम्बल और दोहरी जिम्मेदारियों का संतुलन
अध्यक्ष पद के उम्मीदवार भानु प्रताप सिंह चौहान के अनुसार, उनकी मां ने कला स्नातक (बीए) के अलावा दो अलग-अलग विषयों में एमए किया है, एलएलबी की पढ़ाई पूरी की है और उनके पास दो विशेष डिप्लोमा भी मौजूद हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि उनकी मां के भीतर नए ज्ञान के प्रति सदैव गहरा आकर्षण रहा है, जिसने उन्हें दोबारा औपचारिक शिक्षण संस्थान में प्रवेश लेने को प्रेरित किया।
भानु प्रताप पिछले करीब पांच वर्षों से छात्र राजनीति के धरातल पर सक्रिय रहकर संघर्ष कर रहे हैं। अपने पुत्र के इस लंबे परिश्रम को देखकर बीना चौहान को महसूस हुआ कि उन्हें केवल घर से हौसला देने के बजाय सीधे मैदान में उतरकर उनका संबल बनना चाहिए। हालांकि, परिसर में एक सक्रिय छात्रा की भूमिका निभाने और साथ ही बेटे के खान-पान एवं दैनिक आवश्यकताओं की चिंता करने के बीच तालमेल बिठाना आसान नहीं रहा। इसके बावजूद वह इसे किसी कठिन बाधा के रूप में देखने के बजाय अपने बच्चे के लक्ष्यों में सहभागी बनने का एक दुर्लभ अवसर मानती हैं। उनका विश्वास है कि जब परिवार बच्चों के परिश्रम के पीछे मजबूती से खड़ा होता है, तो उनकी संकल्प शक्ति कई गुना बढ़ जाती है।


















