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हरिद्वार में तीन किमी के लिए 300 रुपये मांगना विक्रम चालक को पड़ा भारी, यात्री बनकर पहुंचे परिवहन अधिकारी ने मौके पर वाहन किया जब्तउत्तराखंड
23 सित॰ 2026, 5:09 pm (25 मिनट पहले)· 0

हरिद्वार में तीन किमी के लिए 300 रुपये मांगना विक्रम चालक को पड़ा भारी, यात्री बनकर पहुंचे परिवहन अधिकारी ने मौके पर वाहन किया जब्त

हरिद्वार में तीर्थयात्रियों से मनमाना किराया वसूलने की शिकायतों पर एआरटीओ खुद आम यात्री बनकर उतरे, जहां 50 रुपये की जगह 300 रुपये मांगने पर विक्रम को तुरंत सीज कर दिया गया।

उत्तराखंड के प्रमुख धार्मिक स्थल हरिद्वार में बाहरी राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय यात्रियों से मनमाना किराया वसूलने वाले वाहन चालकों पर परिवहन विभाग ने कड़ा शिकंजा कसा है। अक्सर तीर्थस्थलों पर ऑटो, ई-रिक्शा और विक्रम चालक नियमों की अनदेखी कर मनमाने दाम वसूलते हैं, लेकिन हरिद्वार में एक चालक को यह हिमाकत बेहद भारी पड़ गई। चालक जिसे आम मुसाफिर समझकर तीन गुना से भी ज्यादा रकम मांग रहा था, वे असल में परिवहन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी थे। तय किराए से कई गुना अधिक रकम मांगने पर तुरंत मौके पर ही वाहन को जब्त कर लिया गया।

तीर्थयात्रियों की लगातार मिल रही शिकायतों पर हुआ बड़ा एक्शन

हरिद्वार में बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं से ऑटो, विक्रम और बैटरी रिक्शा चालकों द्वारा तय दर से कहीं अधिक किराया वसूलने की लगातार शिकायतें प्रशासन तक पहुंच रही थीं। इस गंभीर समस्या का संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने सख्त जांच के निर्देश जारी किए। इन निर्देशों के अनुपालन में एआरटीओ प्रशासन निखिल शर्मा और एआरटीओ प्रवर्तन नेहा झा के नेतृत्व में परिवहन विभाग की टीम ने शहर भर में किराए की औचक जांच का एक विशेष अभियान शुरू किया।

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आम मुसाफिर बनकर मैदान में उतरे एआरटीओ निखिल शर्मा

सड़क पर वाहनों की वास्तविक स्थिति और अवैध वसूली का सच जानने के लिए अधिकारियों ने बेहद अनोखा तरीका अपनाया। एआरटीओ निखिल शर्मा ने किसी सरकारी लाव-लश्कर के बिना, एक साधारण मुसाफिर की तरह विभिन्न वाहनों में सफर करने का फैसला किया। वे आम नागरिक के रूप में रानीपुर मोड़ पहुंचे और रेलवे स्टेशन जाने के लिए एक विक्रम में सवार होने की बात की। रानीपुर मोड़ से रेलवे स्टेशन की दूरी लगभग तीन किलोमीटर है, जिसके लिए निर्धारित सरकारी किराया मात्र 50 रुपये है।

बहस करते ही फंसा चालक, मौके पर वाहन सीज

उस तीन किलोमीटर के सफर के लिए विक्रम चालक ने सीधे 300 रुपये की मांग रख दी। जब साधारण वेशभूषा में खड़े अधिकारी ने पूछा कि मात्र तीन किलोमीटर की दूरी के लिए 300 रुपये बहुत ज्यादा नहीं हैं, तो चालक ने अकड़ दिखाते हुए कहा कि हां ज्यादा तो है। अधिकारी ने दोबारा सवाल किया कि क्या ज्यादा ही किराया लोगे, जिस पर चालक की मनमानी साफ जाहिर हो गई। इसके तुरंत बाद अधिकारी ने अपनी पहचान उजागर करते हुए त्वरित कार्रवाई की और मौके पर ही दो विक्रम वाहनों को जब्त कर लिया। इन वाहनों को विभागीय कार्यालय परिसर में खड़ा कराकर चालकों के खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

जांच अभियान में 105 वाहनों के चालान और 25 गाड़ियां जब्त

परिवहन विभाग की इस औचक कार्रवाई का दायरा केवल एक-दो वाहनों तक सीमित नहीं रहा। पूरी टीम ने विभिन्न चौराहों और मार्गों पर सघन चेकिंग अभियान चलाया। इस व्यापक जांच के दौरान कुल 105 वाहनों के चालान काटे गए और गंभीर उल्लंघन पाए जाने पर 25 वाहनों को जब्त किया गया। इस कार्रवाई में क्षमता से अधिक सवारी बैठाने वाला एक ई-रिक्शा और बिना किसी पंजीकरण के सड़कों पर दौड़ रहे दो ई-रिक्शा भी पकड़े गए, जिन्हें अधिकारियों ने तत्काल सीज कर दिया। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यात्रियों से अवैध वसूली करने वालों के खिलाफ यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।

सवाल-जवाब

हरिद्वार में विक्रम चालक ने 3 किलोमीटर की दूरी के लिए कितना किराया मांगा था?
रानीपुर मोड़ से रेलवे स्टेशन तक करीब 3 किलोमीटर की दूरी के लिए विक्रम चालक ने 300 रुपये का मनमाना किराया मांगा था।
रानीपुर मोड़ से रेलवे स्टेशन के बीच निर्धारित सरकारी किराया कितना है?
परिवहन विभाग के नियमों के अनुसार इस मार्ग पर 3 किलोमीटर की दूरी का आधिकारिक किराया केवल 50 रुपये निर्धारित है।
अवैध वसूली पकड़ने के लिए एआरटीओ निखिल शर्मा ने क्या तरीका अपनाया?
एआरटीओ निखिल शर्मा बिना किसी सरकारी अमले के साधारण यात्री बनकर विक्रम में सवार हुए और खुद अधिक किराए की मांग का अनुभव किया।
जांच अभियान के दौरान परिवहन विभाग ने कुल कितने वाहनों पर कार्रवाई की?
जांच के दौरान टीम ने कुल 105 वाहनों के चालान किए और 25 वाहनों को विभिन्न नियमों के उल्लंघन में जब्त किया।
कार्रवाई के दौरान ई-रिक्शा में क्या कमियां पाई गईं?
जांच में एक ई-रिक्शा क्षमता से अधिक ओवरलोडिंग करता मिला, जबकि दो अन्य ई-रिक्शा सड़कों पर बिना पंजीकरण के चलते पकड़े गए।
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