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भारत और नेपाल सीमा पर ₹33 करोड़ का छारछुम मोटर पुल बनकर तैयार, लेकिन सुरक्षा चौकियों की कमी से परिचालन में देरीउत्तराखंड
4 नव॰ 2026, 5:57 pm (1 दिन पहले)· 1

भारत और नेपाल सीमा पर ₹33 करोड़ का छारछुम मोटर पुल बनकर तैयार, लेकिन सुरक्षा चौकियों की कमी से परिचालन में देरी

उत्तराखंड सीमा पर 110 मीटर लंबा डबल लेन छारछुम पुल बनकर तैयार हो चुका है, लेकिन सुरक्षा और कस्टम चौकियों के न होने से वाहनों का संचालन शुरू नहीं हो सका है।

उत्तराखंड से सटी भारत और नेपाल की 275 किलोमीटर लंबी खुली सीमा पर आवागमन का एक नया बुनियादी ढांचा खड़ा हो गया है। सीमावर्ती इलाके में पैदल चलने के लिए दर्जनों झूला पुल पहले से मौजूद हैं, लेकिन दोनों देशों के बीच चार पहिया और भारी वाहनों की आवाजाही अब तक सिर्फ बनबसा पुल तक ही सीमित थी। अब छारछुम में नया अंतरराष्ट्रीय मोटर पुल बनकर तैयार हो जाने से दोनों मुल्कों के बीच वाहनों के सीधे आवागमन का यह दूसरा बड़ा रास्ता बन गया है।

चार साल की मेहनत और ₹33 करोड़ की लागत से तैयार हुआ ढांचा

छारछुम मोटर पुल के निर्माण की शुरुआत साल 2022 में की गई थी। शुरुआत में कार्यदायी एजेंसी के लिए इस परियोजना को पूरा करने की समय सीमा केवल एक साल तय की गई थी। हालांकि, जमीनी चुनौतियों और निर्माण प्रक्रिया के चलते इसे पूरा होने में चार साल का लंबा समय लग गया। 33 करोड़ रुपये के कुल बजट से बना यह डबल लेन पुल 110 मीटर लंबा है। भारत की तरफ से इसे सड़क नेटवर्क से पहले ही जोड़ लिया गया था, और अब नेपाल की दिशा से भी इसकी कनेक्टिविटी पूरी तरह स्थापित कर दी गई है।

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कस्टम, एसएसबी और आईबी चौकियों के लिए जमीन की तलाश

पुल का बुनियादी ढांचा पूरी तरह तैयार होने के बावजूद इस पर वाहनों का नियमित परिचालन तत्काल शुरू नहीं हो पा रहा है। इसका मुख्य कारण भारत की तरफ सीमा सुरक्षा से जुड़ी आवश्यक चौकियों का न होना है। इस अंतरराष्ट्रीय मार्ग पर कस्टम, आईबी और एसएसबी की चौकियों की स्थापना अनिवार्य है। स्थानीय प्रशासन फिलहाल इन सुरक्षा और निगरानी चौकियों के निर्माण के लिए उपयुक्त भूमि तलाशने की प्रक्रिया में जुटा हुआ है। जब तक प्रशासनिक और सुरक्षा चौकियों की व्यवस्था जमीन पर मूर्त रूप नहीं ले लेती, तब तक इस पुल से सामान्य ट्रैफिक शुरू होने में देरी बनी रहेगी।

व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद

इस अंतरराष्ट्रीय संपर्क मार्ग के चालू होने से सीमांत क्षेत्र के समग्र विकास की संभावनाएं काफी बढ़ गई हैं। स्थानीय विधायक हरीश धामी के अनुसार, नया पुल शुरू होने से भारत और नेपाल के मध्य द्विपक्षीय व्यापार को गति मिलेगी और पर्यटन गतिविधियों में भी उल्लेखनीय इजाफा देखने को मिलेगा। सीमा के दोनों तरफ बसे स्थानीय नागरिकों के लिए यह संपर्क मार्ग अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा, जिससे दोनों देशों के बीच पारंपरिक रोटी-बेटी के सामाजिक और पारिवारिक संबंधों को और अधिक मजबूती मिलेगी।

सीमा पर कसीनो गतिविधियों पर रोक लगाने की मांग

पुल से मिलने वाले आर्थिक और सामाजिक लाभों के बीच कुछ गंभीर सामाजिक चिंताएं भी उठाई गई हैं। विधायक हरीश धामी ने नेपाल सरकार के समक्ष यह मांग रखी है कि छारछुम सीमा के नजदीक कसीनो जैसी जुआ गतिविधियों को पनपने की अनुमति बिल्कुल न दी जाए। उन्होंने चेताया कि बनबसा सीमा क्षेत्र में नेपाल की तरफ कसीनो संचालित हैं, जहां नियमों के तहत केवल विदेशियों को जुआ खेलने की अनुमति दी जाती है। इस व्यवस्था के चलते बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक वहां जुए की लत में फंसकर आर्थिक बर्बादी का शिकार हुए हैं। ऐसे में अगर छारछुम में इन गतिविधियों पर सख्ती से रोक नहीं लगी, तो नए पुल के फायदे के मुकाबले स्थानीय आबादी को भारी सामाजिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

सवाल-जवाब

छारछुम मोटर पुल की कुल लंबाई और निर्माण लागत कितनी है?
इस डबल लेन अंतरराष्ट्रीय मोटर पुल की कुल लंबाई 110 मीटर है और इसके निर्माण पर ₹33 करोड़ की लागत आई है।
पुल का निर्माण कार्य कब शुरू हुआ था और इसे पूरा होने में कितना समय लगा?
पुल निर्माण का कार्य साल 2022 में एक वर्ष के तय लक्ष्य के साथ शुरू हुआ था, जिसे पूरा करने में चार साल लग गए।
उत्तराखंड सीमा पर इससे पहले वाहनों की आवाजाही के लिए कौन सा पुल उपलब्ध था?
उत्तराखंड से सटी 275 किमी सीमा पर अब तक वाहनों के आने-जाने के लिए केवल बनबसा पुल ही एकमात्र विकल्प था।
पुल तैयार होने के बाद भी इस पर गाड़ियों की आवाजाही क्यों रुकी हुई है?
भारत की तरफ कस्टम, आईबी और एसएसबी की चौकियों का निर्माण अभी तक नहीं हो सका है, जिसके लिए जमीन तलाशी जा रही है।
स्थानीय विधायक हरीश धामी ने कसीनो को लेकर क्या मांग उठाई है?
उन्होंने मांग की है कि बनबसा की तरह छारछुम में कसीनो गतिविधियां न शुरू होने दी जाएं, ताकि भारतीय नागरिक जुए की वजह से बर्बाद न हों।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Michael Anderson@michael-anderson·15 घंटे पहले

कुछ साल पहले मैंने बनबसा क्रॉसिंग देखी थी — उस वक्त हैरान था कि इतनी लंबी सीमा पर बस एक ही मोटर रास्ता है। छारछुम पुल बनना अच्छी बात है, लेकिन बिना चौकियों के खुलेगा नहीं — यही असली अड़चन है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·15 घंटे पहले

पुल बन गया, पर चौकियों के लिए ज़मीन अभी ढूंढी जा रही है — यह प्लानिंग का वही पुराना ढर्रा है जहाँ ढाँचा पहले खड़ा होता है, बाकी सब बाद में सोचा जाता है।

Ravikash Gupta@ravikash·15 घंटे पहले

Arjun, एक साल की डेडलाइन थी, चार साल लगे — और अब ज़मीन ढूंढ रहे हैं चौकियों के लिए। आपकी बात से इनकार करना मुश्किल है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 दिन पहले

चौंतीस करोड़ खर्च करके पुल तो बना दिया, पर सुरक्षा चौकी के लिए ज़मीन अब तक ढूँढी जा रही है। गज़ब हाल है भई!

Rohan Verma@rohan-verma·1 दिन पहले

करन जी, बिल्कुल सही बात है। पर जरा सोचिए, जब पुल बनाने से पहले ज़मीन और सुरक्षा का हिसाब नहीं रखा गया, तो क्या अब ज़मीन मिलने में भी चार साल लग जाएंगे?

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