वैश्विक व्यापार और कूटनीति के बदलते परिदृश्य में सप्लाई चेन की सुरक्षा और आर्थिक जोखिमों को कम करना अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सबसे बड़ा विमर्श बन चुका है. कैरेबियाई राष्ट्र एंटीगुआ और बारबुडा के सेंट जॉन्स में आयोजित कॉमनवेल्थ शासनाध्यक्षों की बैठक (CHOGM 2026) के दौरान भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सदस्य देशों के सामने एक दूरदर्शी और व्यावहारिक रूपरेखा पेश की. उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार को भविष्य के खतरों से सुरक्षित रखने के लिए केवल पुराने तौर-तरीकों पर निर्भर नहीं रहा जा सकता. देशों को अपने आर्थिक रिश्तों में जोखिम घटाने होंगे और नए तथा छोटे भरोसेमंद व्यापारिक गलियारे तलाशने होंगे. सम्मेलन में भारत की ओर से साझा किया गया दृष्टिकोण यह दर्शाता है कि भविष्य का आर्थिक ढांचा भरोसे, तकनीक और लचीली आपूर्ति पर टिकेगा.
भरोसेमंद सप्लाई चेन और कनेक्टिविटी पर विशेष जोर
विदेश मंत्री ने कॉमनवेल्थ देशों के शासनाध्यक्षों और अंतरराष्ट्रीय कारोबारी नेताओं को संबोधित करते हुए व्यापारिक आपूर्ति मार्गों को सुरक्षित बनाने की आवश्यकता रेखांकित की. उन्होंने कहा कि जब दुनिया भू-राजनीतिक उथल-पुथल और बाजार के व्यवधानों से जूझ रही है, तब छोटे और विश्वसनीय सप्लाई रूट्स सबसे सुरक्षित विकल्प बनकर उभरते हैं. इसके लिए केवल पारंपरिक समुद्री या हवाई मार्गों पर निर्भर रहने के बजाय बहुआयामी कनेक्टिविटी कॉरिडोर विकसित करने होंगे. ऐसे गलियारे न केवल लॉजिस्टिक्स लागत घटाते हैं, बल्कि स्थानीय वितरण प्रणालियों को भी मजबूती प्रदान करते हैं. भारत का मानना है कि जमीनी हकीकत पर काम करने वाले उद्यमियों, एमएसएमई और सामान्य नागरिकों तक व्यापार के लाभ पहुंचाने के लिए वितरण नेटवर्क को स्थानीय स्तर तक कुशल बनाना अनिवार्य है.
सहयोग को विस्तार देने के लिए विदेश मंत्री के नौ अहम बिंदु
कॉमनवेल्थ मंच पर बहुपक्षीय सहयोग को ठोस परिणाम में बदलने के लिए भारत ने नौ प्राथमिकताओं को सूचीबद्ध किया
- आर्थिक जोखिम में कमी और सप्लाई चेन मजबूती: सदस्य देशों को अपनी आपूर्ति व्यवस्था में एकाधिकारवादी निर्भरता घटाकर छोटे और भरोसेमंद विकल्पों को प्राथमिकता देनी चाहिए ताकि वैश्विक संकट के समय आर्थिक गतिविधियां न रुकें.
- कनेक्टिविटी कॉरिडोर का विस्तार: सीमा पार व्यापार और माल ढुलाई को सुगम बनाने के लिए नए संपर्क मार्गों का निर्माण और स्थानीय वितरण नेटवर्क का आधुनिकीकरण किया जाए.
- कौशल संवर्धन और क्षमता निर्माण: तकनीकी प्रशिक्षण और कार्यबल की क्षमता बढ़ाकर साझेदार देशों को आर्थिक प्रगति के नए अवसर उपलब्ध कराए जाने चाहिए.
- प्रवासी भारतीय व्यापार समुदाय की ताकत: दुनिया भर में फैला भारतीय डायस्पोरा और कारोबारी वर्ग कॉमनवेल्थ देशों के लिए एक रणनीतिक आर्थिक संसाधन है, जिसका लाभ द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने में लिया जा सकता है.
- डिजिटल तकनीक का अंगीकरण: डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक तकनीक अपनाने से प्रशासनिक व्यवस्था पारदर्शी बनती है और आर्थिक विकास को नई रफ्तार मिलती है.
- जलवायु संरक्षण के साझा प्रयास: अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) और आपदा प्रतिरोधी बुनियादी ढांचे के लिए गठबंधन (सीडीआरआई) जैसी वैश्विक पहलों का उपयोग करके जलवायु चुनौतियों का सामूहिक मुकाबला किया जाए.
- स्थानीय स्तर पर आपदा राहत केंद्र: आपातकालीन मानवीय अभियानों और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान तुरंत सहायता पहुंचाने के लिए स्थानीय केंद्रों की स्थापना की जानी चाहिए, जिसमें भारत अपने अनुभवों का योगदान देने को तत्पर है.
- कुशल कार्यबल की सुगम आवाजाही: प्रशिक्षित पेशेवरों और कुशल श्रमिकों की सदस्य देशों के बीच निर्बाध गतिशीलता के लिए नियम सरल बनाए जाएं ताकि सभी अर्थव्यवस्थाओं को लाभ मिले.
- ऐतिहासिक भरोसे का आर्थिक लाभ: कॉमनवेल्थ देशों के बीच पहले से मौजूद ऐतिहासिक संबंधों, साझी समझ और स्वाभाविक सहजता को साझा समृद्धि में तब्दील किया जाना चाहिए.
ब्रिटिश प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम से द्विपक्षीय बातचीत
एंटीगुआ और बारबुडा में शिखर सम्मेलन से इतर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम से भी महत्वपूर्ण द्विपक्षीय मुलाकात की. विदेश मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से ब्रिटिश प्रधानमंत्री को शुभकामनाएं पहुंचाईं. इस दौरान दोनों देशों के बीच व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते (CETA) के संदर्भ में व्यापारिक साझेदारी को नई ऊंचाई देने पर गहन विमर्श हुआ. दोनों नेताओं ने वैश्विक कूटनीतिक परिदृश्य और समकालीन आर्थिक चुनौतियों पर भी अपने विचार साझा किए.
डिजिटल बुनियादी ढांचा और व्यापार समझौतों की भूमिका
सेंट जॉन्स में आयोजित कॉमनवेल्थ शासनाध्यक्षों की कार्यकारी बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए विदेश मंत्री ने 4 नवंबर को देश के डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर मॉडल की सफलता का ब्योरा रखा. इस साल सम्मेलन की थीम समृद्ध कॉमनवेल्थ के लिए साझेदारी और निवेश को गति देना तय की गई है. भारत ने बताया कि किस तरह डिजिटल पहचान, त्वरित भुगतान प्रणाली और डेटा संरक्षण के समन्वय से नागरिकों का सशक्तिकरण संभव हुआ है. साथ ही हाल के वर्षों में भारत द्वारा हस्ताक्षरित मुक्त व्यापार समझौतों के जरिए संतुलित और निष्पक्ष आर्थिक सहभागिता के नए मानक स्थापित किए गए हैं. भारत की यह पहल दर्शाती है कि वह कॉमनवेल्थ समूह को केवल एक औपचारिक मंच नहीं, बल्कि आर्थिक विकास, पर्यावरण संरक्षण और तकनीकी नवाचार का सक्रिय साझेदार बनाना चाहता है.

















