स्ट्रीट फूड के शौकीन अक्सर तीखी लाल चटनी के नुकसान से बचने के लिए हरी मिर्च वाली चटनी का विकल्प चुनते हैं। देहरादून समेत कई शहरों में खानपान के स्टॉल्स पर लोग यह मान बैठते हैं कि हरी मिर्च प्राकृतिक होने की वजह से पाचन के लिए सुरक्षित है। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि नियमित या जरूरत से ज्यादा मात्रा में इसका उपयोग शरीर के कई अंगों पर गंभीर असर डाल सकता है। खानपान की आदतों में यह बदलाव असल में पाचन तंत्र के लिए उतना ही संवेदनशील साबित होता है जितना कि कोई अन्य तीखा खाद्य पदार्थ।
कैप्साइसिन और पेट की आंतरिक परत पर प्रभाव
देहरादून के आयुर्वेदिक चिकित्सक सिराज सिद्दीकी बताते हैं कि हरी मिर्च में मौजूद सक्रिय घटक कैप्साइसिन अधिक मात्रा में जाने पर आंतों और पेट की अंदरूनी परत को तेजी से उत्तेजित करता है। जब यह अस्तर लगातार उत्तेजित होता है, तो सीने में जलन, एसिडिटी, पेट में मरोड़ और अल्सर जैसी जटिलताएं जन्म लेने लगती हैं। इसके अलावा शरीर में अत्यधिक आंतरिक गर्मी बनने लगती है, जिससे पाचन का संतुलन गड़बड़ा जाता है। जिन लोगों को भोजन करने के तुरंत बाद लेटने पर सीने में जलन महसूस होती है अथवा नाक में गैस जैसी बेचैनी का अनुभव होता है, उन्हें हरी मिर्च के इस्तेमाल से तुरंत परहेज करना चाहिए।
बाजार की चटनी में प्रिजर्वेटिव्स और सोडियम का खतरा
बाजारों और फूड स्टॉल्स पर मिलने वाली हरी चटनी केवल सादी पिसी हुई मिर्च नहीं होती। उसके तीखेपन और रंग को लंबे समय तक टिकाए रखने के मकसद से भारी मात्रा में सोडियम और रासायनिक प्रिजर्वेटिव्स मिलाए जाते हैं। यह अतिरिक्त सोडियम न केवल पाचन क्रिया को धीमा करता है, बल्कि हाई ब्लड प्रेशर की समस्या को भी गंभीर बना देता है। इसके साथ ही शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकालने वाले महत्वपूर्ण अंग किडनी पर भी लगातार अतिरिक्त दबाव पड़ता रहता है। स्वाद के लालच में इस चटनी को रोजमर्रा की डाइट का हिस्सा बनाना सेहत पर दोहरा वार करता है।
बच्चों की संवेदनशील गट लाइनिंग और भविष्य के जोखिम
कई अभिभावक यह गलतफहमी पाल लेते हैं कि लाल मिर्च के बजाय हरी मिर्च में खाना पकाने से छोटे बच्चों को कोई नुकसान नहीं होगा। डॉ. सिराज सिद्दीकी आगाह करते हैं कि छोटे बच्चों के लिए दोनों ही प्रकार की मिर्च समान रूप से हानिकर हैं। छोटे बच्चों के पेट की आंतरिक दीवार बेहद नाजुक और संवेदनशील होती है। बचपन में मिर्च का तीखापन इस परत को क्षतिग्रस्त कर सकता है, जिसका नतीजा यह होता है कि बड़े होने पर ऐसे व्यक्तियों को उम्रभर पाचन संबंधी गंभीर बीमारियों का सामना करना पड़ता है।
किन बीमारियों में पूरी तरह वर्जित है हरी मिर्च
विशेषज्ञों के अनुसार कुछ खास स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे मरीजों को हरी मिर्च से पूरी तरह दूरी बना लेनी चाहिए। पाइल्स और फिशर की तकलीफ से पीड़ित लोगों के लिए इसका तीखापन असहनीय जलन और दर्द पैदा कर सकता है। इसके अलावा इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम से परेशान मरीजों को भी इसका सेवन नहीं करना चाहिए। जो लोग टाइफाइड की बीमारी से जूझ रहे हैं या हाल ही में इस संक्रमण से उबरकर ठीक हुए हैं, उन्हें अपने आहार में हरी मिर्च बिल्कुल शामिल नहीं करनी चाहिए। त्वचा की समस्याओं जैसे सोरायसिस, एक्जिमा और रोजेशिया से ग्रस्त लोगों में भी हरी मिर्च सूजन और खुजली की तीव्रता को काफी बढ़ा सकती है।


















