राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद यानी एनसीईआरटी ने कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान पाठ्यपुस्तक का नया संस्करण पेश किया है। इस नई पुस्तक में भारत के मध्यकालीन इतिहास को एक पूरी तरह से नए दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया गया है। जहां पहले का पाठ्यक्रम अक्सर विदेशी संदर्भों से शुरू होता था, वहीं अब भारतीय नायकों के ऐतिहासिक संघर्षों, स्थानीय प्रतिरोधों और सामाजिक समन्वय को प्राथमिकता दी गई है। इसके साथ ही, अर्थशास्त्र और नागरिक शास्त्र को सैद्धांतिक परिभाषाओं से बाहर निकालकर व्यावहारिक जीवन से जोड़ा गया है। इसमें छात्रों को न केवल कर व्यवस्था और बीमा के नियम सिखाए जाएंगे, बल्कि लिज्जत पापड़ और ओबेरॉय समूह जैसे सफल व्यावसायिक मॉडलों की केस स्टडी भी पढ़ाई जाएगी।
इतिहास पाठ्यक्रम में भारतीय प्रतिरोध और समन्वय को प्रमुख स्थान
नया पाठ्यक्रम राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2023 पर आधारित है। इसमें मध्यकालीन इतिहास को वर्ष 1000 से 1700 ईस्वी के कालखंड में रखकर देखा गया है। नए अध्याय रेजिस्टेंस एंड रेजिलिएंस के अंतर्गत उन घटनाओं और ऐतिहासिक चरित्रों को प्रमुखता दी गई है जिन्होंने विभिन्न कालखंडों में भारत पर हुए विदेशी हमलों का डटकर मुकाबला किया। इसमें वर्ष 1178 में माउंट आबू के निकट रानी नायकी देवी द्वारा मुहम्मद गोरी को पराजित करने की ऐतिहासिक घटना शामिल है। इसके अतिरिक्त, मेवाड़ के महाराणा प्रताप का अद्वितीय संघर्ष, सरायघाट के युद्ध में लचित बरफुकन द्वारा अहोम साम्राज्य की रक्षा, और मुगलों के खिलाफ सिख गुरुओं व योद्धाओं के संगठित विरोध को विस्तृत रूप से समझाया गया है।
इतिहास के इस पुनर्गठन में केवल उत्तर भारत के संघर्षों तक सीमित न रहकर तटीय और दक्षिण भारतीय इतिहास को भी स्थान दिया गया है। पुर्तगाली औपनिवेशिक ताकतों के खिलाफ उल्लाल की रानी अब्बक्का चौटा के साहसिक प्रतिरोध को पुस्तक में शामिल किया गया है। यह अध्याय केवल युद्धों और विदेशी आक्रमणों का वर्णन नहीं करता, बल्कि मंदिरों के विनाश और उनके पुनः निर्माण की गाथा को भी सामने रखता है। इसके साथ ही, इस बात पर विशेष प्रकाश डाला गया है कि भक्ति आंदोलन और अंतर-क्षेत्रीय व्यापारिक संपर्कों ने किस प्रकार कठिन समय में भी भारतीय समाज को एकजुट रखा।
सामंजस्य और सामाजिक-सांस्कृतिक ताने-बाने पर जोर
इस नई पुस्तक में मध्यकालीन दौर को केवल युद्धों और टकराव के कालखंड के रूप में नहीं प्रस्तुत किया गया है, बल्कि सामाजिक सहयोग और सांस्कृतिक मेलजोल की परंपरा को भी रेखांकित किया गया है। पुस्तक में मुगल शासक अकबर के शासनकाल के बाद उभरी समावेशी संस्कृतियों का उल्लेख है। सूफी संत परंपरा और भक्ति आंदोलन के माध्यम से समाज में भाईचारे के संदेश को उभारा गया है। इस संदर्भ में मुस्लिम कवियों जैसे रसखान और रहीम के भक्ति साहित्य में योगदान को प्रमुखता से शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य छात्रों को यह समझाना है कि भारतीय इतिहास में सत्ता संघर्षों के साथ-साथ सांस्कृतिक और सामाजिक सामंजस्य की एक सशक्त धारा हमेशा प्रवाहित होती रही है।
अर्थशास्त्र में थ्योरी के बजाय व्यावहारिक वित्तीय साक्षरता
पुराने पाठ्यक्रम में कक्षा 9 के छात्र अर्थशास्त्र की शुरुआत गांवों में उत्पादन की व्यवस्था, गरीबी और खाद्य सुरक्षा जैसे पारंपरिक विषयों से करते थे। नई पाठ्यपुस्तक में इस दृष्टिकोण को पूरी तरह बदल दिया गया है। अब छात्रों को रोजमर्रा की आर्थिक गतिविधियों और व्यक्तिगत वित्तीय फैसलों से परिचित कराया जाएगा। इसके तहत छात्र इनकम टैक्स स्लैब की कार्यप्रणाली, विभिन्न प्रकार के ऋण, तथा निवेश से जुड़े जोखिमों के बारे में विस्तार से सीखेंगे।
स्वास्थ्य बीमा और जन कल्याणकारी योजनाओं को समझाने के लिए देश की आयुष्मान भारत योजना का व्यावहारिक उदाहरण प्रस्तुत किया गया है। वहीं, देश के आर्थिक विकास और विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए उद्यमिता की अवधारणा को पाठ्यक्रम का अभिन्न हिस्सा बनाया गया है।
लिज्जत पापड़ और ओबेरॉय की केस स्टडी से बिजनेस की सीख
उद्यमिता और व्यवसाय निर्माण की व्यावहारिक समझ विकसित करने के लिए नई किताब में भारत के प्रसिद्ध सफल उपक्रमों को केस स्टडी के रूप में शामिल किया गया है। छात्र पढ़ेंगे कि किस तरह महिलाओं के एक छोटे से समूह ने मिलकर लिज्जत पापड़ जैसे विशाल सहकारिता आंदोलन को जन्म दिया और आत्मनिर्भरता की मिसाल कायम की। इसके साथ ही, प्रसिद्ध उद्योगपति मोहन सिंह ओबेरॉय द्वारा एक छोटे स्तर से विश्वस्तरीय होटल श्रृंखला स्थापित करने की सफलता की कहानी भी पढ़ाई जाएगी। इन उदाहरणों के माध्यम से विद्यार्थियों को नए व्यावसायिक विचार खोजने, संसाधनों का प्रबंधन करने और जोखिम उठाने की भावना को समझने में मदद मिलेगी।
लोक नीति और शासन प्रणाली में नागरिकों की भूमिका
राजनीतिक विज्ञान और शासन से संबंधित अध्यायों में भारतीय प्रशासनिक परंपराओं को आधुनिक संदर्भों के साथ जोड़ा गया है। इसमें महात्मा गांधी के रामराज्य के आदर्श, चोल राजवंश के सेंगोल के ऐतिहासिक महत्व, और प्राचीन भारतीय ग्रंथों में वर्णित संस्थागत आदर्श वाक्यों का संदर्भ दिया गया है। नई शिक्षा नीति NEP 2020 को एक आदर्श लोक नीति निर्माण प्रक्रिया के रूप में पेश किया गया है, जिसमें व्यापक जन-परामर्श, विशेषज्ञों की राय और लोकतांत्रिक प्रक्रिया का समावेश था।
इसके अलावा, खेलो भारत नीति 2025 के माध्यम से यह समझाया गया है कि केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, विभिन्न खेल निकायों और नागरिकों के बीच बेहतर समन्वय किस प्रकार काम करता है। पुस्तक में सरकारी अधिकारियों की जवाबदेही तय करने, जनसेवाओं की सुलभता, और प्रशासनिक भ्रष्टाचार या पद के दुरुपयोग को रोकने में नागरिकों के सक्रिय फीडबैक की भूमिका पर विशेष बल दिया गया है।
नई पाठ्यपुस्तक की संरचना और परिवर्तन का दायरा
इस नई पुस्तक का नाम अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड है, जिसका भाग 2 छह अध्यायों में विभाजित है। इसमें इतिहास, भूगोल, राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र चारों विषयों को एक एकीकृत दृष्टिकोण के साथ पेश किया गया है। भूगोल खंड में ओशन्स एंड लाइफ और लाइफ ऑन अर्थ जैसे अध्याय जोड़े गए हैं, जो पर्यावरण और पृथ्वी पर जीवन के संतुलन को समझाते हैं। इससे पहले कक्षा 9 के इतिहास का पहला अध्याय फ्रांसीसी क्रांति से शुरू होता था, लेकिन अब भारतीय संदर्भ और वैश्विक जुड़ाव को एक नए स्वरूप में पढ़ाया जाएगा।



















