तीर्थनगरी ऋषिकेश में सप्ताहांत शुरू होते ही आगंतुकों और सैलानियों की भारी आमद देखने को मिलती है। शनिवार और रविवार के दिनों में शहर के मुख्य बाजारों, प्रमुख चौराहों और गंगा घाटों के समीप भारी भीड़भाड़ और चहल-पहल दर्ज की जाती है। बाहर के शहरों से पहुंचने वाले मुसाफिरों को विभिन्न स्थलों तक जाने के लिए टैक्सी, ऑटो रिक्शा और अन्य स्थानीय वाहनों की जरूरत पड़ती है। इस भारी मांग के चलते शहर के स्थायी निवासियों को अपने रोजमर्रा के आवागमन के लिए गाड़ियां जुटाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय बाशिंदों की शिकायत है कि अधिकांश टैक्सियां और ऑटो पहले से ही पर्यटकों द्वारा आरक्षित कर लिए जाते हैं, जिस वजह से चालक सामान्य मुसाफिरों को बैठाने से साफ इनकार कर देते हैं। इसका सबसे प्रतिकूल असर उन नागरिकों पर देखा जा रहा है जिन्हें अपने दफ्तर, चिकित्सालय, स्थानीय बाजार अथवा अन्य आवश्यक कार्यों के लिए निर्धारित समय पर पहुंचना अनिवार्य होता है।
पड़ोसी शहरों और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से पर्यटकों का निरंतर प्रवाह
सप्ताहांत के अवकाश पर ऋषिकेश की ओर दिल्ली, नोएडा, हरिद्वार, देहरादून तथा आसपास के अन्य मैदानी व नजदीकी क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग भ्रमण के लिए रुख करते हैं। रिवर राफ्टिंग, कैंपिंग, गंगा आरती, प्रमुख घाटों और आसपास के अन्य आकर्षणों तक सफर करने के लिए आगंतुक पहले से ही अथवा मौके पर पहुंचकर स्थानीय टैक्सियों और तिपहिया वाहनों को बुक कर लेते हैं। आगंतुकों की तादाद में अचानक उछाल आने से स्थानीय स्तर पर संचालित वाहनों की मांग बहुत अधिक बढ़ जाती है। जो सार्वजनिक और किराये के वाहन आम दिनों में स्थानीय निवासियों को सामान्य रूप से उपलब्ध हो जाया करते थे, वे सप्ताहांत के दौरान पूरी तरह से टूरिस्ट बुकिंग में व्यस्त हो जाते हैं।
कम दूरी के सफर के लिए भी लंबा इंतजार और मनमाना किराया
स्थानीय नागरिक सूरज कुमार के अनुसार, सप्ताहांत पर बाहरी क्षेत्रों से आने वाले लोगों की संख्या में भारी वृद्धि दर्ज की जाती है। ऐसी परिस्थिति में अधिकांश तिपहिया और चारपहिया वाहन पहले से ही बुक मिलते हैं। स्थानीय बाशिंदों को कम दूरी तक जाने के लिए भी कोई साधन नहीं मिल पाता और उन्हें सड़कों पर घंटों खड़े रहकर प्रतीक्षा करनी पड़ती है। यह कठिनाई केवल वाहन मिलने तक ही सीमित नहीं रहती, बल्कि उपलब्ध वाहनों में किराये की समस्या भी जुड़ जाती है। कई अवसरों पर यदि कोई वाहन उपलब्ध भी होता है, तो चालक सप्ताहांत की भारी मांग का लाभ उठाते हुए सामान्य से काफी अधिक किराया वसूलने का प्रयास करते हैं। इसका सर्वाधिक नुकसान उन यात्रियों को उठाना पड़ता है जिन्हें महज कुछ किलोमीटर की दूरी तय करनी होती है। लाचार होकर कई यात्री सड़कों पर खड़े होकर लंबे समय तक अन्य साधनों का इंतजार करते हैं, जबकि जरूरी काम वाले लोग विवश होकर अत्यधिक किराया चुकाकर अपने गंतव्य की ओर रवाना होते हैं।
प्रशासनिक हस्तक्षेप और संतुलित व्यवस्था की मांग
शहर के एक अन्य निवासी तुलसी नौटियाल ने इस संदर्भ में अपनी बात रखते हुए कहा कि पर्यटकों के आने से शहर के स्थानीय व्यापार और अर्थव्यवस्था को सीधा लाभ मिलता है तथा यहां का कारोबार फलता-फूलता है। फिर भी, स्थानीय निवासियों को भी अपने जरूरी कार्यों के निष्पादन हेतु समय पर परिवहन साधन उपलब्ध होने चाहिए। सप्ताहांत के दौरान पूर्व बुकिंग का हवाला देकर स्थानीय दैनिक यात्रियों को बैठाने से मना कर दिया जाना उचित नहीं है। उनका मानना है कि नगर प्रशासन और परिवहन विभाग को ऐसी संतुलित व्यवस्था स्थापित करनी चाहिए जिससे पर्यटकों की आवाजाही भी सुचारु बनी रहे और स्थानीय लोगों को भी दैनिक आवागमन में असुविधा न झेलनी पड़े।
ऋषिकेश में स्थानीय आबादी का एक बहुत बड़ा वर्ग अपनी नियमित दिनचर्या के लिए सार्वजनिक ऑटो और टैक्सियों पर ही निर्भर है। नौकरीपेशा कर्मियों, अध्ययनरत विद्यार्थियों, अस्पताल जाने वाले मरीजों तथा घरेलू खरीदारी के लिए बाजार जाने वाले लोगों को प्रतिदिन इन वाहनों से सफर करना पड़ता है। सप्ताहांत पर अधिकांश वाहनों के पर्यटक सेवाओं में स्थानांतरित हो जाने के कारण इन नियमित यात्रियों का आवागमन बुरी तरह बाधित हो रहा है और वे घंटों सड़कों पर खड़े रहने को मजबूर हैं।


















