अपने घर के आंगन या बालकनी में खूबसूरत हरियाली और फूलों की बहार लाने के लिए बालसम एक बहुत ही बेहतरीन विकल्प है। इस पौधे की खास बात यह है कि इसकी डालियों पर खिलने वाले रंग-बिरंगे फूल देखने में छोटे गुलाब की तरह नजर आते हैं। जब पौधे को उपयुक्त माहौल और संतुलित पोषण मिलता है, तो यह काफी तेजी से फैलकर घना हो जाता है। इसे उगाने में बहुत ज्यादा परेशानी नहीं होती है, लेकिन इसके लिए मिट्टी की गुणवत्ता, पर्याप्त धूप, सही मात्रा में पानी और समय-समय पर जैविक खाद का ध्यान रखना जरूरी होता है। अगर आप भी अपने होम गार्डन में बालसम उगाने की सोच रहे हैं, तो कुछ आसान गार्डनिंग तरीकों को अपनाकर शानदार नतीजे पा सकते हैं।
बालसम उगाने के लिए सितंबर का महीना क्यों है सबसे उपयुक्त
पौधों की बेहतर बढ़वार के लिए सही मौसम का चुनाव करना बहुत जरूरी माना जाता है। बालसम के बीजों को बोने के लिए सितंबर का महीना सबसे मुफीद रहता है। इस दौरान वातावरण में हल्की नमी बनी रहती है और तापमान न तो बहुत अधिक गर्म होता है और न ही ज्यादा ठंडा। यह संतुलित मौसम बीजों के तेजी से अंकुरित होने और शुरुआती चरणों में पौधों के विकास के लिए काफी अनुकूल साबित होता है। अत्यधिक कड़क धूप के बजाय यह पौधा हल्की और मध्यम धूप में ज्यादा बेहतर तरीके से फलता-फूलता है। सही समय पर रोपाई करने से पौधा बिना किसी रुकावट के तेजी से अपनी जड़ें जमा लेता है।
गमले के लिए मिट्टी तैयार करने का सही तरीका
बालसम के पौधे की अच्छी सेहत के लिए भुरभुरी और उपजाऊ मिट्टी की आवश्यकता होती है। ऐसी मिट्टी तैयार करना जरूरी है जिससे अतिरिक्त पानी आसानी से बाहर निकल सके, क्योंकि जड़ों के आसपास पानी ठहरा रहने से पौधा खराब हो सकता है। गमले का मिश्रण तैयार करते समय सही अनुपात का ध्यान रखना चाहिए
- बगीचे की सामान्य मिट्टी: कुल मिश्रण का 50 फीसदी हिस्सा साधारण बगीचे की मिट्टी का रखें, जो पौधे को मजबूत आधार प्रदान करती है।
- जैविक खाद का उपयोग: लगभग 30 फीसदी हिस्से के रूप में अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद या वर्मीकम्पोस्ट मिलाएं, जिससे मिट्टी में आवश्यक पोषक तत्व बने रहें।
- रेत की मात्रा: मिट्टी में 20 फीसदी रेत मिलाना जरूरी है। इससे मिट्टी भुरभुरी बनी रहती है और जल निकासी की व्यवस्था बेहतर होती है।
यदि गमले में पानी जमा रहेगा तो बालसम की नाजुक जड़ों में सड़न पैदा हो सकती है, इसलिए ड्रेनेज होल को खुला रखें और भुरभुरे मिश्रण का ही इस्तेमाल करें।
बीज बोने की सही विधि और अंकुरण की प्रक्रिया
बालसम को बीज की मदद से उगाना बेहद आसान और सरल प्रक्रिया है। सबसे पहले तैयार की गई मिट्टी की ऊपरी सतह पर बीजों को हल्के हाथ से बिखेर दें। इसके बाद बीजों के ऊपर मिट्टी या कोकोपीट की एक बहुत ही बारीक परत बिछा दें ताकि बीज ढक जाएं। बीजों को पानी देते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि सीधे तेज धार से पानी न डालें। तेज धार से बीज अपनी जगह से हट सकते हैं या मिट्टी में बहुत गहराई में दब सकते हैं। इसलिए पानी देने के लिए वॉटर स्प्रे का उपयोग करना चाहिए।
सामान्यता बीजों के रोपण के 5 से 7 दिनों के भीतर छोटे-छोटे अंकुर बाहर निकलने लगते हैं। जब ये नए पौधे बढ़कर लगभग 3 से 4 इंच की ऊंचाई हासिल कर लें, तब इन्हें सावधानीपूर्वक निकालकर किसी बड़े गमले या क्यारी में रोपा जा सकता है। स्थानांतरण के समय जड़ों को नुकसान न पहुंचे, इसका विशेष ध्यान रखें।
धूप, सिंचाई और सही खाद का नियम
बालसम के पौधे को अच्छी ग्रोथ और अधिक कलियां देने के लिए रोशनी और पानी का सही संतुलन चाहिए होता है। रोजाना सुबह के समय लगभग 3 से 4 घंटे की हल्की धूप इस पौधे के लिए बेहद फायदेमंद मानी जाती है। दोपहर की तेज और चुभने वाली धूप में इसे रखने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे पत्तियां झुलस सकती हैं और पौधा मुरझा सकता है।
सिंचाई करते समय हमेशा गमले की मिट्टी की ऊपरी परत को छूकर नमी की जांच करें। मिट्टी में हल्की नमी बनी रहनी चाहिए, लेकिन पानी का भराव नहीं होना चाहिए। मौसम के बदलाव के अनुसार पानी की मात्रा में फेरबदल करें। पौधे के विकास को गति देने और भरपूर फूल पाने के लिए हर 15 से 20 दिन के अंतराल पर थोड़ी मात्रा में वर्मीकम्पोस्ट या सड़ी गोबर की खाद दें। जब पौधे में कलियां बनने की शुरुआत हो जाए, तब सरसों की खली के तरल घोल जैसी जैविक खाद का प्रयोग करना लाभकारी रहता है।
पिंचिंग तकनीक से पौधे को बनाएं घना और सुरक्षित
जब बालसम का पौधा छोटा होता है और उसकी मुख्य ऊपरी शाखा तेजी से ऊपर की तरफ बढ़ने लगे, तो उसकी ऊपरी कली की टिप को उंगलियों से हल्का पिंच करके तोड़ देना चाहिए। इस पिंचिंग प्रक्रिया से पौधा सीधा लंबा होने के बजाय साइड से नई-नई शाखाएं निकालने लगता है। कुछ ही समय में पौधा चारों तरफ फैलकर काफी घना हो जाता है, जिससे बाद में उस पर बहुत अधिक संख्या में कलियां और फूल आते हैं।
बालसम के पौधे पर कई बार एफिड्स जैसे छोटे कीड़ों या फंगल संक्रमण का खतरा बन जाता है। इससे बचाव के लिए पत्तियों और नई डालियों का नियमित निरीक्षण करते रहें। समस्या की शुरुआत में ही नीम के तेल का हल्का छिड़काव करने से कीट दूर रहते हैं। यदि कोई शाखा या पत्ती सूखी अथवा बीमार दिखे, तो उसे तुरंत काट कर अलग कर दें और पौधे में अत्यधिक पानी देने से बचें। बालसम का पौधा आमतौर पर 1 से 2 फीट की ऊंचाई तक बढ़ता है और इसका तना रसदार होता है। पत्तों के बीच में खिलने वाले रंग-बिरंगे मिनी गुलाब जैसे फूल पूरे बगीचे की शोभा बढ़ा देते हैं।



















