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अल-नीनो के साये में सितंबर, मौसम विभाग की चेतावनी से बढ़ी चिंताबिहार
1 सित॰ 2026, 9:50 am (1 घंटे पहले)· 1

अल-नीनो के साये में सितंबर, मौसम विभाग की चेतावनी से बढ़ी चिंता

मौसम विभाग के मुताबिक सितंबर में बारिश सामान्य से कम रहने के आसार हैं, जिससे पूरे साल के मॉनसून सीजन पर असर पड़ सकता है। इससे पहले अगस्त का महीना 125 सालों में सबसे गर्म दर्ज किया गया है।

मॉनसून के आखिरी दौर की शुरुआत के साथ ही मौसम को लेकर चिंताएं गहरी हो गई हैं। आमतौर पर सितंबर के महीने में झमाझम बारिश देखने को मिलती है, लेकिन इस बार पूरे सीजन पर अल-नीनो का साया बना रहा है। भारतीय मौसम विभाग की ओर से इस महीने को लेकर जारी की गई ताजा चेतावनियों ने लोगों और कृषि क्षेत्र की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के आंकड़ों के अनुसार सितंबर महीने में देश भर में बारिश का आंकड़ा औसत से नीचे रह सकता है और इस बार मॉनसून का यह चक्र सूखे हालातों के साथ विदा हो सकता है। अगर बीते महीने यानी अगस्त की बात करें तो पूरे देश में कुल बारिश का स्तर 213.3 एमएम दर्ज किया गया था। यह आंकड़ा सामान्य स्तर से 16.3% कम था।

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केवल कम बारिश ही इस महीने की एकमात्र विशेषता नहीं रही, बल्कि तापमान के लिहाज से भी इसने रिकॉर्ड तोड़े हैं। अगस्त का यह महीना पिछले 125 साल के इतिहास में सबसे गर्म महीना साबित हुआ है। इस अवधि में औसत न्यूनतम तापमान 24.36 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो साल 1901 के बाद से अब तक का सबसे उच्च स्तर है। वहीं, पूरे महीने का औसत तापमान भी 28.01 डिग्री सेल्सियस रहा, जो इन तमाम वर्षों के रिकॉर्ड में सबसे ज्यादा गर्मी का गवाह बना है।

मौसम विशेषज्ञों का साफ कहना है कि अगस्त के दौरान पानी की कमी और कमजोर बरसने के कारण ही तापमान में इतनी भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई। अब यही कमजोर रुख सितंबर में भी बने रहने की आशंका जताई जा रही है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने सितंबर महीने के लिए देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम बारिश का अनुमान जताया है। चूंकि यह मॉनसून सीजन का अंतिम महीना है, इसलिए यह पूर्वानुमान बेहद चिंताजनक है और इसका असर पूरे साल की आर्थिकी पर पड़ सकता है।

आंकड़ों के मुताबिक सितंबर के दौरान बारिश का स्तर सामान्य से लगभग 9 फीसदी कम रह सकता है। आईएमडी की रिपोर्ट बताती है कि अल-नीनो के प्रभाव के कारण जून से लेकर अगस्त तक देश में कुल वर्षा सामान्य से 14 प्रतिशत कम दर्ज की जा चुकी है। यदि सितंबर में भी बादलों की आवाजाही कमजोर रहती है, तो पूरे सीजन का घाटा और अधिक बढ़ जाएगा, जिसका सीधा असर कृषि फसलों से लेकर आम जनजीवन में महंगाई के रूप में सामने आ सकता है।

हालांकि मौसम वैज्ञानिकों का यह भी अनुमान है कि देश के कुछ विशिष्ट इलाकों में स्थिति थोड़ी अलग हो सकती है। उत्तर-पश्चिम, पूर्वोत्तर, पूर्वी, पूर्व-मध्य और दक्षिण-पूर्वी प्रायद्वीपीय भारत के चुनिंदा क्षेत्रों में सामान्य या फिर सामान्य से अधिक बारिश होने की संभावना जताई गई है। इसके बावजूद व्यापक पैमाने पर हालात सूखे की ओर इशारा कर रहे हैं।

इस पूरे वर्ष का मॉनसून चक्र बेहद असमान और उतार-चढ़ाव वाला रहा है। अल-नीनो के असर की वजह से जून के महीने में बारिश में भारी गिरावट आई थी और यह सामान्य से 35 प्रतिशत तक कम दर्ज हुई थी। हालांकि जुलाई के दौरान स्थिति में थोड़ा सुधार हुआ और बारिश सामान्य स्तर पर रही, लेकिन अगस्त के खत्म होते-होते कुल वर्षा का घाटा फिर से बढ़कर 14 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गया। देश भर के कुल 741 जिलों में से 312 यानी करीब 42 प्रतिशत जिलों में सामान्य से कम बारिश रिकॉर्ड की गई, जबकि 38 जिलों में वर्षा की भारी कमी देखी गई है।

सितंबर में अगर बारिश इसी तरह कमजोर रहती है तो खेती और किसानों पर भारी दबाव आना तय है। अधिकांश खरीफ फसलों की बुआई का काम लगभग पूरा हो चुका है, लेकिन इस बार पिछले साल के मुकाबले कुल बोया गया क्षेत्र लगभग 2 प्रतिशत कम रहा है। यदि आने वाले दिनों में पर्याप्त पानी नहीं बरसा, तो किसानों को अपनी फसलों को बचाने के लिए सिंचाई पर बहुत अधिक खर्च करना पड़ेगा। सिंचाई के साधन न जुटने की स्थिति में उनकी लागत में बेतहाशा वृद्धि होगी।

मौसम विभाग का विश्लेषण बताता है कि वर्तमान में भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के क्षेत्र में मजबूत अल-नीनो की स्थितियां बनी हुई हैं। यहाँ समुद्र की सतह का तापमान अपने सामान्य स्तर से काफी ऊपर चल रहा है। अल-नीनो की यह परिघटना आमतौर पर भारत में मानसूनी हवाओं को कमजोर करती है, जिसका सीधा असर सितंबर की बारिश पर भी पड़ना तय माना जा रहा है।

इसी समयावधि में हिंद महासागर में तटस्थ इंडियन ओशियन डाइपोल (आईओडी) की स्थिति बनी हुई है। उम्मीद है कि सितंबर के महीने में भी यही तटस्थ स्थिति बरकरार रहेगी। हालांकि एक सकारात्मक आईओडी बारिश की मात्रा बढ़ाने में मददगार साबित होता है, लेकिन तटस्थ स्थिति से किसी भी प्रकार के विशेष लाभ की उम्मीद बेहद कम है।

मौसम में क्या रहने वाला है खास?

अगस्त महीने में मॉनसून की चाल बेहद सुस्त और धीमी रही है। इस दौरान मौसम में इतनी अधिक गर्मी महसूस की गई कि पिछले 125 साल का पुराना रिकॉर्ड टूट गया। पिछले महीने बादलों के बरसने में कंजूसी के चलते तापमान में लगातार उछाल बना रहा है।

मौसम वैज्ञानिकों का स्पष्ट मानना है कि इस पूरे महीने भी मॉनसून का कमजोर रुख जारी रहने वाला है। अल-नीनो के प्रभाव के चलते सितंबर के दौरान मॉनसून के पूरी तरह सक्रिय होने के कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिल रहे हैं, और इस दौरान गर्मी का प्रकोप और बढ़ने की संभावना है।

आईएमडी के आंकड़ों के मुताबिक सितंबर की सामान्य बारिश का पैमाना 167.9 mm है। लेकिन देश के तमाम हिस्सों में इससे काफी कम पानी गिरने के आसार हैं और यह सामान्य से करीब 9 फीसदी तक कम रह सकता है। एक अनुमान के तहत इस बार सामान्य आंकड़े के मुकाबले लगभग 91% बारिश होने की ही संभावना जताई गई है।

यदि चार महीनों के पूरे मॉनसून सीजन के कुल आंकड़ों पर नजर डालें, तो जून से लेकर 31 अगस्त तक बारिश का कुल घाटा 13.8% तक पहुंच चुका है। यदि सितंबर का महीना भी सूखा ही बीतता है, तो यह कमी और अधिक विकराल रूप ले सकती है।

मौसम का पूर्वानुमान यह भी कहता है कि अल-नीनो के प्रभाव के कारण सितंबर में केवल कम बारिश ही नहीं होगी, बल्कि देश के अधिकांश क्षेत्रों में औसत अधिकतम तापमान भी सामान्य से अधिक दर्ज किया जाएगा। इसके अलावा औसत न्यूनतम तापमान के भी ज्यादा बने रहने के पूरे आसार हैं। इन तमाम वजहों से उमस भरी गर्मी बढ़ सकती है और कई इलाकों में सूखे जैसे हालात पैदा हो सकते हैं। बारिश की इस कमी का एक अन्य असर यह भी होगा कि इस बार सर्दियों की शुरुआत में देरी देखने को मिल सकती है।

सवाल-जवाब

सितंबर महीने में बारिश को लेकर मौसम विभाग का क्या अनुमान है?
मौसम विभाग के अनुसार सितंबर में बारिश औसत से कम रह सकती है और यह सामान्य से करीब 9 फीसदी तक कम हो सकती है।
अगस्त महीने में तापमान का क्या हाल रहा है?
अगस्त का महीना 125 साल के इतिहास में सबसे गर्म दर्ज किया गया है, जिसमें औसत न्यूनतम तापमान 24.36 डिग्री सेल्सियस रहा।
जून से अगस्त तक देश में बारिश की कमी कितनी दर्ज की गई है?
अल-नीनो के असर के चलते जून से अगस्त तक देश में कुल बारिश सामान्य से 14 प्रतिशत कम दर्ज की गई है।
देश के कितने जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई है?
देश के 741 जिलों में से 312 जिलों यानी 42 प्रतिशत हिस्से में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है।
इस स्थिति का कृषि पर क्या असर पड़ सकता है?
कम बारिश के कारण खरीफ फसलों की सिंचाई पर अधिक खर्च करना पड़ सकता है और उत्पादन लागत बढ़ सकती है।
भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में वर्तमान में क्या स्थिति है?
भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में मजबूत अल नीनो की स्थिति बनी हुई है और समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से ज्यादा है।
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टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·22 मिनट पहले

यह जलवायु संकट अब केवल कृषि व्यवस्था या अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर सार्वजनिक सुरक्षा और विधि-व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। मौसम की यह चरम अनिश्चितता और संभावित सूखे जैसे हालात भविष्य में जल संकट, आंतरिक विस्थापन और संसाधनों की कमी को जन्म देंगे, जिससे सामाजिक तनाव और आपराधिक घटनाओं में वृद्धि की पूरी आशंका है।

Rohan Verma@rohan-verma·21 मिनट पहले

सहकर्मी करण मल्होत्रा की इस बात को आगे बढ़ाते हुए, उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में कमजोर मॉनसून और संभावित सूखे के हालात का सीधा असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। खासकर धान और खरीफ की अन्य फसलों को होने वाले नुकसान से किसानों की मुश्किलें बढ़ेंगी। पानी की कमी और आय घटने से राज्य के ग्रामीण इलाकों में सामाजिक असंतोष गहरा सकता है, जिससे प्रशासनिक मशीनरी और कानून-व्यवस्था के सामने गंभीर चुनौतियां खड़ी होने की पूरी आशंका है।

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