हरिद्वार में शुक्रवार की सुबह अचानक मौसम ने ऐसा करवट लिया कि कुछ ही पलों के भीतर सामान्य जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया। मानसून का दौर खत्म होने के बाद जहां शहर हल्की गुलाबी ठंड की ओर बढ़ रहा था, वहीं सुबह आसमान में घने काले बादल घिर आए। बादलों के डेरा डालते ही तेज मूसलाधार बारिश शुरू हो गई और देखते ही देखते आसमान से बड़े आकार के ओले बरसने लगे। इस अप्रत्याशित मौसमी मार ने सड़क पर मौजूद राहगीरों, स्थानीय नागरिकों और वाहन चालकों को संभलने तक का अवसर नहीं दिया।
आसमान से तीव्र गति से गिरते ओलों के कारण राह चलते लोग दहशत में आ गए। ओलों की रफ्तार और मारक क्षमता इतनी अधिक थी कि चोट लगने के डर से लोग सिर छिपाने के लिए आसपास की दुकानों, बरामदों और सुरक्षित ठिकानों की ओर दौड़ते नजर आए। कुछ ही मिनटों की ओलावृष्टि के बाद धर्मनगरी की मुख्य सड़कें और संकरी गलियां ओलों की सफेद चादर से ढक गईं। पूरे क्षेत्र का दृश्य किसी पर्वतीय हिल स्टेशन पर हुई भारी बर्फबारी जैसा दिखने लगा, जिससे यातायात पूरी तरह थम गया।
वाहनों को भारी नुकसान और तापमान में गिरावट
इस अप्रत्याशित मौसमी आफत का सबसे गंभीर असर खुले में और सड़क किनारे खड़े वाहनों पर देखा गया। आसमान से बरसे बड़े पत्थरों जैसे ओलों की सीधी टक्कर से कई कारों के विंडशील्ड और खिड़कियों के शीशे चकनाचूर हो गए। इसके साथ ही दोपहिया वाहनों की हेडलाइट्स और अन्य हिस्सों को भी व्यापक क्षति पहुंची, जिससे वाहन स्वामियों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। यद्यपि इस तेज बौछार और ओलों के बाद तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे उमस भरे माहौल से लोगों को निजात मिली, किंतु शहर की दैनिक रफ्तार और बुनियादी व्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई।
मौसम विज्ञानी कारणों का विश्लेषण
मानसून की आधिकारिक विदाई के काफी समय बाद इस प्रकार की विकराल ओलावृष्टि होने से हर कोई स्तब्ध है। पर्यावरण और मौसम के जानकारों के अनुसार इस बेमौसम मौसमी उथल-पुथल के पीछे कई प्रमुख वातावरणीय प्रक्रियाएं सक्रिय थीं।
पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता: उत्तर भारत और उत्तराखंड जैसे पर्वतीय अंचलों में मानसून बीत जाने के बाद भी जब पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होता है, तब ऊपरी वायुमंडल में अचानक अत्यधिक नमी और सर्द हवाओं का जमावड़ा हो जाता है। धरातल की गर्म हवा जब तेजी से ऊपर उठकर इस सर्द वायु प्रवाह के संपर्क में आती है, तो बादलों में संघनन अर्थात कंडेनसेशन की प्रक्रिया असाधारण गति से होती है। यही तीव्र प्रक्रिया बादलों के भीतर भारी और बड़े ओले तैयार करती है।
क्युमुलॉनिम्बस बादलों का निर्माण: दिन के वक्त सतही तापमान की गर्माहट और वायुमंडल के ऊपरी परतों में अचानक विकसित हुए वायुदाब के बड़े अंतर ने क्युमुलॉनिम्बस बादलों को जन्म दिया। इस श्रेणी के बादल तीव्र गरज-चमक, आंधी, मूसलाधार जलवर्षा और प्रचंड ओलावृष्टि के लिए जाने जाते हैं।
जलवायु परिवर्तन का प्रभाव: पर्यावरण विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन के कारण पारंपरिक मौसमी चक्र अनियंत्रित हो गया है। अब मौसमी घटनाएं अपने निर्धारित महीनों तक सीमित नहीं रह गई हैं, बल्कि बिना मौसम चरम मौसमी घटनाओं की आवृत्ति और तीव्रता दोनों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।
फसलों पर संकट और आने वाले दिनों की चेतावनी
हरिद्वार में हुई इस ओलावृष्टि ने केवल शहरी व्यवस्था, गाड़ियों और आम जनजीवन पर ही असर नहीं डाला, बल्कि आसपास के ग्रामीण इलाकों में किसानों की बची-खुची फसलों के लिए भी गंभीर संकट उत्पन्न कर दिया है। खेतों में खड़ी फसलों को ओलों की मार से नुकसान पहुंचने की आशंका बढ़ गई है। मौसम विभाग ने भी परिस्थितियों को देखते हुए आम जनता और किसानों को सतर्क रहने के परामर्श जारी किए हैं। यह मौसमी घटनाक्रम इस बात की पुष्टि करता है कि पर्वतीय और मैदानी दोनों क्षेत्रों में आने वाले दिनों में मौसम बार-बार अचानक रुख बदल सकता है, जिसके लिए पूर्व तैयारी आवश्यक है।



















