हिमालय के बर्फीले विस्तार और दुर्गम ग्लेशियरों की ओर कदम बढ़ाना रोमांच से भरा सपना हो सकता है, लेकिन बर्फीले धरातल पर सामान्य पहाड़ी पगडंडियों के मुकाबले खतरे कई गुना बढ़ जाते हैं। ग्लेशियर के इलाके में मौसम पलक झपकते ही करवट बदल लेता है, चारों तरफ जमी बर्फ की परत के ठीक नीचे सैकड़ों फीट गहरे क्रेवास छिपे रहते हैं और अधिक ऊंचाई पर घटता ऑक्सीजन स्तर सांसों की गति धीमी कर देता है। इस तरह के संवेदनशील प्राकृतिक परिवेश में की गई जरा सी भी असावधानी जानलेवा साबित हो सकती है। बागेश्वर के पर्वतारोही भुवन चौबे ने स्पष्ट किया है कि बर्फ की वादियों में कदम रखने से पहले रोमांच की चाहत पर सुरक्षा को प्राथमिकता देना ही सबसे अहम नियम है।
शारीरिक तैयारी और आधिकारिक अनुमति के साथ करें शुरुआत
किसी भी कठिन ग्लेशियर अभियान पर निकलने से पहले अपनी फिटनेस और सहनशक्ति का सही आकलन करना अनिवार्य होता है। भुवन चौबे के अनुसार, ट्रेक की तकनीकी जटिलता, अधिकतम ऊंचाई और उस क्षेत्र के मौसम के बदलते मिजाज की पूरी पड़ताल पहले ही कर लेनी चाहिए। जो लोग पहली बार ग्लेशियर के सफर पर निकल रहे हैं, उन्हें अकेले जाने की भूल कतई नहीं करनी चाहिए बल्कि किसी मंझे हुए और प्रशिक्षित गाइड के साथ ही आगे बढ़ना चाहिए। तकनीकी ग्लेशियर पर बिना जरूरी प्रशिक्षण, विशेष साजो-सामान और अनुभवी दल के बिना चलना भारी मुसीबत को न्योता देना है। इसके अलावा यात्रा शुरू करने से पहले स्थानीय प्रशासन, वन विभाग या संबंधित ट्रेक प्रबंधन तंत्र से रास्ते की वर्तमान स्थिति जाननी चाहिए और सभी कानूनी स्वीकृतियां पूरी करनी चाहिए।
सुबह की शुरुआत और मौसम के संकेतों का सम्मान
बर्फ के रास्तों पर समय प्रबंधन का बहुत बड़ा महत्व होता है। आमतौर पर सुबह के शुरुआती घंटों में यात्रा शुरू करना सबसे सुरक्षित माना जाता है, हालांकि निकलने का सटीक समय स्थानीय जलवायु, पगडंडी की बनावट और ट्रेक की कुल दूरी पर निर्भर करता है। भुवन चौबे ने समझाया कि दिन के भरपूर उजाले में सुरक्षित रास्ते से आगे बढ़ना चाहिए ताकि मौसम बिगड़ने से पहले किसी सुरक्षित पड़ाव पर पहुंचा जा सके। बेस कैंप छोड़ने से पहले मौसम के आधिकारिक पूर्वानुमान की जांच करें और सुरक्षित वापसी का एक निश्चित समय तय कर लें। अगर रास्ते में तेज हवाएं चलने लगें, बर्फबारी या भारी बारिश शुरू हो जाए, घना कोहरा छा जाए या हिमस्खलन की आशंका बने, तो आगे बढ़ने के बजाय यात्रा तुरंत रोक देनी चाहिए। केवल समय बचाने या मंजिल छूने की जिद में प्रकृति से लड़ना नासमझी है।
जरूरी गियर और तकनीकी उपकरणों का सही ज्ञान
ग्लेशियर ट्रेक पर उपकरणों की सही गुणवत्ता आपकी जीवन रक्षा से जुड़ी होती है। भुवन चौबे के अनुसार, पैरों में बेहतरीन ग्रिप वाले मजबूत ट्रेकिंग जूते होने चाहिए और जरूरत पड़ने पर जूतों के साथ क्रैम्पॉन्स या माइक्रोस्पाइक्स का उपयोग करना चाहिए। शरीर को कड़ाके की ठंड से बचाने के लिए कपड़ों की कई परतें, वाटरप्रूफ जैकेट, विंडप्रूफ दस्ताने, गर्म टोपी और अतिरिक्त मोजे बैग में जरूर रखने चाहिए। बर्फ से टकराकर आने वाली तीखी धूप से आंखों को सुरक्षित रखने के लिए यूवी-प्रोटेक्टेड धूप का चश्मा और चेहरे के लिए सनस्क्रीन लोशन बेहद जरूरी हैं। इसके साथ ही पीने का स्वच्छ पानी, ऊर्जा से भरपूर खाद्य पदार्थ, प्राथमिक उपचार किट, सिर पर पहनने वाला हेडलैंप, आपातकालीन सीटी और स्थानीय आपदा संपर्क नंबर हर समय पास होने चाहिए। अधिक तकनीकी चढ़ाई के लिए हेलमेट, हार्नेस, चढ़ाई वाली रस्सी, आइस एक्स और क्रेवास रेस्क्यू किट की जरूरत पड़ती है, जिनका संचालन केवल प्रशिक्षित विशेषज्ञों की निगरानी में ही होना चाहिए। सिर्फ उपकरण खरीद लेना काफी नहीं होता, बल्कि संकट के समय उनका त्वरित और सटीक इस्तेमाल करना आना चाहिए।
घातक गलतियों से बचाव और शरीर के संकेतों की पहचान
ग्लेशियर पर कुछ गलतियां ऐसी होती हैं जिनका कोई दूसरा मौका नहीं मिलता। गाइड के दल से अलग होकर अकेले चलना, अनजान बर्फ पर कदम रखना और किसी भी सफेद सतह को बिना जांचे ठोस मान लेना बहुत बड़ी भूल है। कई बार गहरे क्रेवास के मुंह पर ताजी बर्फ की एक पतली सी चादर तन जाती है जो दूर से देखने पर पुल जैसी नजर आती है, लेकिन इंसानी वजन पड़ते ही वह अचानक धंस जाती है। इसलिए किसी भी संदेहास्पद बर्फीले हिस्से पर पैर रखने की गलती न करें। शरीर में पानी की कमी न होने दें और नियमित अंतराल पर पानी पीते रहें। यदि ऊंचाई पर सिरदर्द, चक्कर आना, उल्टी की इच्छा, असामान्य थकान या सांस लेने में भारीपन महसूस हो, तो इसे कतई नजरअंदाज न करें। ये लक्षण दिखते ही आगे चढ़ने की जिद छोड़ें, तुरंत नीचे की ओर उतरें और बिना देर किए प्राथमिक चिकित्सीय सहायता लें। भुवन चौबे का कहना है कि प्रकृति के इशारों को समझना ही ट्रेकर की असली ढाल है, क्योंकि ग्लेशियर पर चोटी तक पहुंचने से कहीं अधिक मूल्यवान सुरक्षित घर लौटना है।



















