उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर जिले के अंतर्गत आने वाले किच्छा नगर पालिका परिषद और नवगठित सिरौलीकलां नगर पंचायत में स्थानीय निकाय चुनाव के तहत मतदान की प्रक्रिया शुरू हो गई है। प्रशासनिक स्तर पर मतदान केंद्रों पर चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था और आवश्यक प्रबंध पूरे किए गए थे, जिसके चलते सुबह से ही नागरिक कतारों में लगकर अपने लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। इन दोनों क्षेत्रों को मिलाकर कुल 63,831 पंजीकृत मतदाता मैदान में उतरे विभिन्न प्रत्याशियों के चुनावी भाग्य का निर्धारण कर रहे हैं। हालांकि इस चुनावी प्रक्रिया के बीच सबसे अहम पहलू यह है कि मतदान पूरा होने के बावजूद वोटों की गिनती तत्काल नहीं कराई जाएगी, क्योंकि उच्च न्यायालय ने मतगणना पर आगामी निर्देश आने तक रोक लगा रखी है।
उच्च न्यायालय में कानूनी विवाद और मतगणना पर अंतरिम रोक
स्थानीय निकायों से जुड़े सीमा और दर्जे के विवाद पर उच्च न्यायालय में पहले सुनवाई हुई थी। न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ के समक्ष राज्य निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया था कि दोनों स्थानीय निकायों में मतदान का आयोजन 22 सितंबर को निर्धारित कार्यक्रम के तहत कराया जाएगा। इसके साथ ही आयोग ने न्यायालय को यह भी जानकारी दी कि मतदान संपन्न हो जाने के बाद होने वाली मतों की गिनती को अग्रिम आदेशों तक स्थगित रखा गया है। आयोग द्वारा जारी की गई संशोधित अधिसूचना को रिकॉर्ड पर लेते हुए न्यायालय ने इस पूरे मामले की अगली सुनवाई के लिए 5 अक्टूबर की तिथि नियत की है।
अधिसूचना को दी गई चुनौती और संवैधानिक प्रावधानों पर बहस
इस पूरे मामले की जड़ किच्छा निवासी नईम उल शान और मोहम्मद रफीक द्वारा दाखिल की गई याचिका से जुड़ी है। इन याचिकाकर्ताओं ने किच्छा नगर पालिका से संबंधित 24 अप्रैल 2025 की अस्थायी अधिसूचना के खिलाफ न्यायालय का रुख किया था। इसके उपरांत राज्य सरकार ने मई 2025 में सिरौलीकलां क्षेत्र को एक पृथक नगर पालिका के रूप में अधिसूचित करने का कदम उठाया। याचिकाकर्ताओं ने इस सरकारी फैसले को चुनौती देते हुए यह आधार लिया कि जब सिरौलीकलां पहले से ही किच्छा नगर पालिका का अभिन्न अंग रहा है, तो फिर संविधान के अनुच्छेद 243 में दिए गए प्रविधानों के विपरीत जाकर उसे इस प्रकार अलग कैसे किया जा सकता है।
अदालती आदेशों और अंतरिम स्थगन के उल्लंघन की दलील
याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता ने अदालत के समक्ष तर्क रखा कि सिरौलीकलां को एक स्वतंत्र नगर पालिका घोषित करना उच्च न्यायालय के पूर्व आदेशों का प्रत्यक्ष उल्लंघन है। इसके साथ ही वर्ष 2024 में जारी किए गए अंतरिम स्थगनादेश की अवहेलना का मुद्दा भी उठाया गया, जिसके तहत विधिक रूप से सिरौलीकलां की स्थिति अब भी किच्छा नगर पालिका के हिस्से के तौर पर ही बनी हुई है। इसी वैधानिक पेच के चलते चुनावी प्रक्रिया में मतदान को तो अनुमति दी गई, लेकिन परिणाम की घोषणा से संबंधित मतगणना को न्यायिक समीक्षा के दायरे में रोक दिया गया है।
मतदाताओं का संख्याबल और पहली बार अध्यक्ष चुनने का अवसर
नगर निकाय प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, किच्छा में कुल पंजीकृत मतदाताओं की तादाद 52,240 है। इस मतदाता सूची में 27,029 पुरुष मतदाता, 25,207 महिला मतदाता और 4 अन्य श्रेणी के मतदाता दर्ज हैं। दूसरी तरफ, सिरौलीकलां निकाय क्षेत्र में कुल 11,591 मतदाता पंजीकृत हैं, जिनमें 6,156 पुरुष और 5,435 महिला मतदाता शामिल हैं। इस निकाय का चुनावी परिदृश्य ऐतिहासिक रूप से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि 2018 तक सिरौलीकलां किच्छा नगर पालिका के प्रशासनिक नियंत्रण में था। अब एक स्वतंत्र नगर पंचायत के रूप में अस्तित्व में आने के बाद यहां के स्थानीय निवासी पहली बार अपने स्वतंत्र निकाय अध्यक्ष का सीधे चुनाव कर रहे हैं।



















