केंद्र सरकार की संस्तुति पर राष्ट्रपति द्रौपदी मूर्मु ने सोमवार की शाम छह राज्यों के राज्यपालों में फेरबदल के आदेश जारी किए। इस प्रशासनिक बदलाव के तहत भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व सांसद डॉ. ढाल सिंह बिसेन को उत्तराखंड की कमान सौंपी गई है। वह पदभार संभाल रहे लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह की जगह लेंगे।
कौन हैं डॉ. ढाल सिंह बिसेन
मध्य प्रदेश के सिवनी जिले से आने वाले डॉ. ढाल सिंह बिसेन की पहचान भारतीय जनता पार्टी में एक अनुशासित और जमीनी नेता के रूप में है। राजनीति के मैदान में उतरने से पहले वह चिकित्सकीय पेशे से जुड़े थे और उन्हें एक कुशल चिकित्सक तथा कृषि विशेषज्ञ माना जाता है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पृष्ठभूमि और संगठन में मजबूत पकड़ के कारण उन्हें पार्टी के भीतर कई महत्वपूर्ण दायित्व मिले। उनका राजनीतिक कद इस बात से स्पष्ट होता है कि उन्होंने प्रांतीय राजनीति से लेकर राष्ट्रीय संसद तक अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराई है।
लंबा और उपलब्धियों से भरा राजनीतिक सफर
डॉ. बिसेन का राजनीतिक करियर कई अहम पड़ावों और उपलब्धियों से परिपूर्ण रहा है। वह मध्य प्रदेश विधानसभा में विधायक के रूप में वर्ष 1990, 1993, 1998 और 2003 में निर्वाचित हुए। इसके बाद उन्होंने वर्ष 2003 से 2005 के दौरान मध्य प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में कई अहम विभागों का कार्यभार संभाला। वित्तीय प्रबंधन के क्षेत्र में योगदान देते हुए उन्होंने वर्ष 2011 से 2013 तक राज्य के चौथे वित्त आयोग के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी भी निभाई। वर्ष 2019 के आम चुनावों में उन्होंने मध्य प्रदेश की बालाघाट लोकसभा सीट से बड़े अंतर से जीत दर्ज की और संसद में अपने क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दी शुभकामनाएं
उत्तराखंड के राज्यपाल पद पर डॉ. ढाल सिंह बिसेन की नियुक्ति का समाचार मिलते ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हर्ष व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने नवनियुक्त राज्यपाल को हार्दिक बधाई देते हुए यह विश्वास जताया कि उनके दीर्घकालिक प्रशासनिक एवं राजनीतिक अनुभव का भरपूर लाभ देवभूमि को प्राप्त होगा। उनके मार्गदर्शन में राज्य प्रगति के नए सोपान तय करेगा।
उत्तराखंड में नए नेतृत्व का दौर
लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह का कार्यकाल संपन्न होने के उपरांत अब डॉ. ढाल सिंह बिसेन राज्य के संवैधानिक प्रमुख का कार्यभार संभालेंगे। एक अनुभवी राजनेता और प्रशासक के रूप में उनका यह नया दायित्व उत्तराखंड के राजनीतिक और प्रशासनिक परिदृश्य में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


















