त्योहारी सीजन में घरों के आंतरिक और बाहरी हिस्सों को संवारने के लिए पारंपरिक दीयों, फूलों और विद्युत झालरों के अलावा अब वाटर डेकोरेशन का चलन भी तेजी से बढ़ रहा है। देहरादून के परेड ग्राउंड में आयोजित प्रदर्शनी मेले में इस बार प्राकृतिक नक्काशीदार पत्थरों से तैयार जल फव्वारे आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। पानी की कलकल ध्वनि और रंग-बिरंगी रोशनी के संयोजन वाले ये मलेशियन मार्बल वाटर फाउंटेन ₹1,000 की शुरुआती कीमत पर बिक्री के लिए रखे गए हैं। इनमें भगवान बुद्ध की ध्यानमग्न प्रतिमाओं के अलावा फ्लोरल और प्राकृतिक चट्टानों की बनावट वाले विभिन्न मॉडल उपलब्ध कराए गए हैं।
मलेशिया में होता है निर्माण, फाइबर के मुकाबले अधिक मजबूती
प्रदर्शनी स्टॉल के संचालक वकील ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि इन सभी सजावटी फव्वारों की नक्काशी और ढांचा निर्माण मलेशिया में किया जाता है, जिसके बाद इन्हें सीधे भारत मंगाया जाता है। मलेशियन मार्बल पत्थर से तैयार होने के कारण इनका स्थायित्व सामान्य सजावटी ढांचों की तुलना में काफी बेहतर रहता है। अक्सर बाजार में मिलने वाले फाइबर आधारित सजावटी सामान पर अतिरिक्त भार पड़ने या गिरने से टूटने का खतरा बना रहता है, लेकिन मार्बल बेस होने से यह बनावट बेहद मजबूत रहती है और लंबे समय तक सुरक्षित इस्तेमाल के योग्य बनी रहती है।
लिविंग रूम से लेकर बालकनी और गार्डन के लिए विभिन्न विकल्प
ग्राहकों की व्यक्तिगत पसंद और अलग-अलग स्थानों की जरूरत को ध्यान में रखते हुए यहां छोटे मेज पर रखे जाने वाले आकार से लेकर बड़े लॉन फाउंटेन सजाए गए हैं। इनमें महात्मा बुद्ध के शांत स्वरूप वाले मॉडल के साथ-साथ प्राकृतिक चट्टानी धार और फूलों के आकार वाले फ्लोरल पैटर्न प्रमुख रूप से शामिल हैं। इन फव्वारों को घर के मुख्य द्वार, ड्रॉइंग रूम, बालकनी, खुली छत या बगीचे में स्थापित किया जा सकता है। पानी के निरंतर बहाव के बीच जलती सूक्ष्म लाइटें शाम के समय सजावट को बेहद मनमोहक रूप प्रदान करती हैं।
धूप और बारिश में भी नहीं उड़ता रंग, रख-रखाव भी बेहद सरल
दुकानदार वकील के अनुसार इन फव्वारों की सबसे बड़ी विशेषता इनका हर मौसम में टिकाऊ रहना है। इन्हें खुले आसमान के नीचे या बगीचों में बिना किसी शेड के भी रखा जा सकता है, क्योंकि तेज धूप और भारी बारिश से इनके प्राकृतिक रंग और चमक पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता। इसके अलावा इनकी चिकनी सतह के कारण इनकी सफाई करना भी काफी आसान है। वर्षों के लगातार प्रयोग के बाद यदि आंतरिक जल पंप धीमा पड़ता है, तो आसानी से इसकी मोटर को बदला भी जा सकता है।
24 घंटे संचालन पर ₹24 से ₹25 बिजली खर्च, आरओ पानी का सुझाव
संचालन और देखरेख के संबंध में स्टॉल संचालक ने स्पष्ट किया कि फव्वारे के जल चक्र को साफ रखने के लिए इसमें फिल्टर अथवा आरओ पानी का उपयोग करना बेहतर रहता है। समय-समय पर पानी की शुद्धता जांचकर उसे नया पानी भरकर बदला जा सकता है। बिजली की खपत के आकलन पर उन्होंने बताया कि यदि इस पूरे सिस्टम को दिन-रात लगातार 24 घंटे भी चलाया जाए, तो रोजाना लगभग 24 से 25 रुपये तक का ही विद्युत खर्च आता है। इन वाटर फाउंटेन की दरें ₹1,000 से प्रारंभ होकर आकार, नक्काशी और वॉटर कैपेसिटी के अनुसार आगे बढ़ती हैं।



















