उत्तराखंड के नैनीताल में नवरात्र की शुरुआत के साथ ही रामलीला का मंचन धूमधाम से शुरू हो चुका है। यहां भगवान श्रीराम के जीवन और उनके आदर्शों से जुड़े प्रसंगों को देखने के लिए बड़ी संख्या में दर्शक पहुंचते हैं। हालांकि, सरोवर नगरी नैनीताल की सूखाताल रामलीला की एक सबसे खास विशेषता है, जो इसे दूसरी जगहों से पूरी तरह अलग और खास बनाती है। इस मंच पर धर्म की दीवारों को दरकिनार करते हुए इंसानियत और भाईचारे का अनूठा संदेश दिया जाता है, जहां कला और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।
अनवर और नासिर निभाते हैं प्रमुख भूमिकाएं
इस ऐतिहासिक रामलीला में अनवर रजा केवट की भूमिका निभाते हैं और भगवान श्रीराम को नदी पार कराते हैं। वहीं दूसरी ओर, नासिर अली गुरु वशिष्ठ के रूप में भगवान श्रीराम और लक्ष्मण को शस्त्र विद्या का ज्ञान देते हैं। इसके अलावा, जावेद नाम के कलाकार भी ताड़का वध और नारद मोह जैसे महत्वपूर्ण प्रसंगों में अपने शानदार अभिनय से मंच पर जान फूंक देते हैं। इन सभी कलाकारों का प्रदर्शन दर्शकों के बीच हमेशा आकर्षण का केंद्र रहता है और लोग इनके अभिनय की जमकर सराहना करते हैं।
दो दशकों से रामलीला का अटूट हिस्सा हैं नासिर अली
सूखाताल की इस रामलीला में नासिर अली पिछले 20 वर्षों से लगातार अलग-अलग किरदार निभाते आ रहे हैं। कभी वह मारीच की भूमिका में नजर आते हैं, तो कभी गुरु वशिष्ठ बनकर मर्यादा पुरुषोत्तम राम और लक्ष्मण को शिक्षा देते हैं। इतने लंबे समय से इस धार्मिक आयोजन से जुड़े नासिर के लिए यह केवल कोई नाटक खेलने जैसा नहीं है, बल्कि एक ऐसा कार्य है जिससे उन्हें मानसिक शांति और अपार खुशी मिलती है। उनका मानना है कि रामलीला के मंच पर जाति या धर्म से कहीं ज्यादा महत्व अपने किरदार के प्रति समर्पण और निष्ठा का होता है। यही कारण है कि वह हर साल पूरे उत्साह और लगन के साथ इस आयोजन का हिस्सा बनते हैं।
केवट की भूमिका में अनवर और जावेद के अभिनय का जादू
सूखाताल की रामलीला में अनवर रजा भी कई वर्षों से सक्रिय रूप से विभिन्न किरदार निभाते चले आ रहे हैं। वह मुख्य रूप से केवट और मुनि जैसे पात्रों को जीवंत करते हैं। रामायण की कथा के अनुसार केवट का प्रसंग भगवान श्रीराम के वनवास काल से जुड़ा हुआ है, जब वह अपनी नाव से श्रीराम को गंगा पार कराते हैं। जब अनवर मंच पर यह किरदार निभाते हैं, तो रामायण का वह पौराणिक प्रसंग दर्शकों के सामने बिल्कुल जीवंत हो उठता है। इसके अलावा जावेद भी रामलीला के बेहद अहम और लोकप्रिय कलाकारों में गिने जाते हैं। ताड़का वध और नारद मोह जैसे जटिल और रोमांचक दृश्यों में उनका अभिनय दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देता है।
कला और संस्कृति के जरिए आपसी भाईचारे की मिसाल
नैनीताल में रामलीला के दौरान विभिन्न समुदायों के लोगों का इस तरह मिलकर काम करना कोई नई या अनोखी बात नहीं है। पिछले कई सालों से मुस्लिम समुदाय के लोग भी इसमें बढ़-चढ़कर अभिनय करते आ रहे हैं। मंच पर अपनी कला का प्रदर्शन करने से लेकर पर्दे के पीछे की व्यवस्था और तैयारियों संभालने तक, हर कोई अपनी जिम्मेदारी पूरी निष्ठा से निभाता है। इस तरह की रामलीलाएं लोगों को आपस में जोड़ने और दिलों की दूरियां मिटाने का काम करती हैं। भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े प्रसंगों में हमेशा न्याय, मर्यादा और सामाजिक सद्भाव का संदेश छिपा होता है, जिसे सूखाताल के ये कलाकार अपने शानदार अभिनय के जरिए जन-जन तक पहुंचा रहे हैं।
























