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आसनसोल में दो महीने के शिशु का एक लाख रुपये में सौदा, राशन डीलर विनोद कुमार गुप्ता और पत्नी समेत तीन आरोपी गिरफ्तारपश्चिम बंगाल
20 अग॰ 2026, 3:39 pm (69 दिन पहले)· 10

आसनसोल में दो महीने के शिशु का एक लाख रुपये में सौदा, राशन डीलर विनोद कुमार गुप्ता और पत्नी समेत तीन आरोपी गिरफ्तार

पश्चिम बंगाल के आसनसोल में दो महीने 13 दिन के बच्चे की कथित खरीद-फरोख्त का पर्दाफाश हुआ है। पुलिस ने ईमेल पर मिली शिकायत के बाद राशन डीलर विनोद कुमार गुप्ता, उनकी पत्नी बबीता और एक कथित बिचौलिये अशोक भवालका को गिरफ्तार कर लिया है।

पश्चिम बंगाल के आसनसोल जिले में दो महीने 13 दिन के एक मासूम बच्चे को एक लाख रुपये में खरीदे जाने के सनसनीखेज मामले का भंडाफोड़ हुआ है। इलेक्ट्रॉनिक मेल के माध्यम से प्राप्त एक गोपनीय शिकायत को आधार बनाकर कार्रवाई करते हुए आसनसोल उत्तर थाना पुलिस ने त्वरित अभियान चलाया। पुलिस टीम ने उत्तर धादका इलाके में दबिश देकर एक दंपती के कब्जे से नवजात शिशु को सकुशल बरामद कर लिया। इस अवैध लेन-देन और संदिग्द्ध खरीद-फरोख्त के सिलसिले में पुलिस ने अब तक दंपती समेत कुल तीन व्यक्तियों को सलाखों के पीछे भेज दिया है।

आरोपियों की पहचान और मुख्य भूमिका

पुलिस सूत्रों से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार गिरफ्तार किए गए दंपती की पहचान 47 वर्षीय विनोद कुमार गुप्ता और उनकी 37 वर्षीया पत्नी बबीता गुप्ता के रूप में की गई है। यह दंपती आसनसोल क्षेत्र के उत्तर धादका स्थित लाल बंगला इलाके का निवासी है। जांच में यह महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है कि आरोपी विनोद कुमार गुप्ता राज्य सरकार के अंतर्गत सार्वजनिक वितरण प्रणाली का अधिकृत राशन डीलर है। इसके साथ ही इस पूरे अवैध सौदे में मध्यस्थ की भूमिका निभाने वाले एक अन्य आरोपी अशोक भवालका को भी धर दबोचा गया है, जो धादका रोड क्षेत्र का रहने वाला है और उस पर बिचौलिये के रूप में काम करने का आरोप है।

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शुरुआती दावों की हवा निकली और सच आया सामने

पुलिस जांच के शुरुआती चरण में गिरफ्तार दंपती ने अधिकारियों को गुमराह करने की कोशिश की थी। पूछताछ के दौरान उन्होंने दावा किया कि बरामद शिशु उनका अपना जैविक पुत्र है। हालांकि पुलिस ने जब उनकी बातों पर संदेह होने पर सख्त पूछताछ की और दस्तावेजों की पड़ताल शुरू की, तो पूरे मामले से पर्दा हट गया। पूछताछ के आगे बढ़ने पर चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई, जिसमें यह उजागर हुआ कि बच्चे को बीरभूम जिले के सिउड़ी इलाके में स्थित एक निजी नर्सिंग होम से एक लाख रुपये का भुगतान करके हासिल किया गया था। इस लेन-देन को अंजाम देने के लिए कई बिचौलियों का सहारा लिया गया था, जिन्होंने अस्पताल प्रशासन और खरीदार दंपती के बीच सांठगांठ कराई थी।

कानूनी कार्रवाई और प्रासंगिक धाराएं

इस गंभीर मामले का संज्ञान लेते हुए पुलिस प्रशासन ने सख्त कानूनी कदम उठाए हैं। आरोपियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के साथ-साथ जुवेनाइल जस्टिस (केयर एंड प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन) एक्ट, 2015 के प्रावधानों के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। इस प्राथमिक रिपोर्ट में गिरफ्तार दंपती और बिचौलिये अशोक भवालका के अतिरिक्त सिउड़ी स्थित उस निजी नर्सिंग होम के कर्मचारियों और प्रबंधन से जुड़े संदिग्ध लोगों की भूमिका को भी नामजद व शामिल किया गया है, जिन्होंने इस गैरकानूनी सौदे को संभव बनाया।

शिशु का संरक्षण और चाइल्ड वेलफेयर कमेटी की भूमिका

बरामद किए गए दो महीने 13 दिन के बच्चे के स्वास्थ्य और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए पुलिस ने निर्धारित कानूनी प्रोटोकॉल का पालन किया है। बच्चे को सुरक्षित अभिरक्षा में लेकर चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) के चेयरमैन के समक्ष प्रस्तुत किया गया है। बाल कल्याण समिति अब बच्चे की आगे की देखरेख, पोषण, चिकित्सा जांच और स्थायी सुरक्षा व्यवस्था का पूरा जिम्मा संभालेगी। जब तक वास्तविक माता-पिता और कानूनी स्थिति स्पष्ट नहीं हो जाती, तब तक बच्चा समिति के संरक्षण में रहेगा।

पुलिस जांच के प्रमुख बिंदु और आगामी कदम

मामले की व्यापकता को देखते हुए पुलिस जांच टीम कई अलग-अलग पहलुओं पर गहन शोध कर रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि क्या बच्चे को अपने पास रखने के लिए किसी वैध या फर्जी गोद लेने की प्रक्रिया का सहारा लिया गया था। इसके साथ ही इस बात की भी पड़ताल की जा रही है कि क्या विनोद कुमार गुप्ता और बबीता गुप्ता को बच्चे के असली माता-पिता दर्शाते हुए फर्जी जन्म प्रमाणपत्र या अन्य दस्तावेज तैयार कराए गए थे। पुलिस अब शिशु के वास्तविक जैविक माता-पिता की तलाश कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि बच्चे को चुराया गया था, बेचा गया था या किसी मजबूरी का फायदा उठाकर खरीदा गया था।

मानव तस्करी नेटवर्क की आशंका और अदालती पेशी

इस पूरे घटनाक्रम के तार किसी बड़े अंतर-जिला या संगठित बाल तस्करी रैकेट से जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है। डीसीपी सेंट्रल ध्रुव दास ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि आसनसोल उत्तर थाना पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों को गुरुवार को आसनसोल अदालत के समक्ष पेश किया जाएगा। पुलिस अदालत से आरोपियों की पुलिस रिमांड की मांग करेगी ताकि हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ की जा सके। पुलिस रिमांड के दौरान इस बात का पता लगाया जाएगा कि इस गिरोह में और कौन-कौन से अस्पताल, डॉक्टर, बिचौलिये या दलाल शामिल हैं तथा क्या पहले भी इस तरह के अवैध शिशुओं के सौदे किए गए हैं।

सवाल-जवाब

यह मामला किस क्षेत्र का है और पुलिस को इसकी जानकारी कैसे मिली?
यह मामला पश्चिम बंगाल के आसनसोल जिले का है। आसनसोल उत्तर थाना पुलिस को ईमेल पर मिली एक गोपनीय शिकायत के बाद जांच में इसका खुलासा हुआ।
इस मामले में किन लोगों को गिरफ्तार किया गया है?
पुलिस ने राशन डीलर विनोद कुमार गुप्ता (47), उनकी पत्नी बबीता गुप्ता (37) और एक कथित बिचौलिये अशोक भवालका को गिरफ्तार किया है।
बरामद शिशु की उम्र क्या है और उसे कहां रखा गया है?
बरामद शिशु की उम्र 2 महीने 13 दिन है। कानूनी प्रक्रिया पूरी कर बच्चे को सुरक्षा और देखभाल के लिए चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) के सुपुर्द किया गया है।
पुलिस जांच में बच्चे की खरीद-फरोख्त को लेकर क्या खुलासा हुआ है?
जांच में पता चला है कि बच्चे को बीरभूम जिले के सिउड़ी स्थित एक निजी नर्सिंग होम से एक लाख रुपये के बदले कथित तौर पर हासिल किया गया था।
आरोपियों के खिलाफ किन धाराओं में मामला दर्ज किया गया है?
आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और जुवेनाइल जस्टिस एक्ट, 2015 की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।
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