पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में पुलिस की एक विशेष टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध रूप से जमा की गई भारी नकदी और कीमती सोने का विशाल भंडार जब्त किया है। पुलिस छापेमारी के दौरान बीरभूम के देवचा गांव स्थित एक दो मंजिला मकान से कम से कम 29 करोड़ रुपये की नकदी और 15 किलोग्राम सोना बरामद किया गया। राज्य में पिछले चार वर्षों के दौरान अवैध धन और संपत्ति की यह सबसे बड़ी बरामदगी में से एक मानी जा रही है। बरामद किए गए सोने में एक-एक किलोग्राम वजन की 14 छड़ें और 100-100 ग्राम के 10 बिस्कुट शामिल हैं। वर्तमान सराफा बाजार दरों के अनुसार जब्त किए गए इस सोने की अनुमानित कीमत लगभग 21.5 करोड़ रुपये आंकी गई है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार छापे के समय नोटों की गिनती के लिए कई मशीनें और थैले लगाए गए थे। जिस समय प्रारंभिक विवरण दर्ज किया गया, उस समय तक गिने गए नोटों का आंकड़ा 25 करोड़ रुपये को पार कर चुका था और अंतिम गिनती में यह 29 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
यह ऐतिहासिक बरामदगी पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में लंबे समय से चल रहे अवैध पत्थर खनन, बालू खनन और सरकारी राजस्व की चोरी के खिलाफ जारी व्यापक पुलिस अभियान का हिस्सा है। इससे पहले राज्य में इतनी बड़ी मात्रा में नकदी और सोना जुलाई 2022 में भर्ती घोटाले की जांच के दौरान देखा गया था। उस समय केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय अर्थात ईडी ने राज्य के पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी की करीबी सहयोगी अर्पिता मुखर्जी के विभिन्न ठिकानों पर छापेमारी करके 50 करोड़ रुपये की बेहिसाबी नकदी, बहुमूल्य सोना और विदेशी मुद्रा जब्त की थी। बीरभूम की यह ताजा कार्रवाई बताती है कि क्षेत्र में संगठित आर्थिक अपराधों और अवैध व्यापारिक सिंडिकेट की जड़ें कितनी गहरी हैं।
सरकारी बस ड्राइवर से व्यापारी बने मीनार मंडल के ठिकाने पर कार्रवाई
जिस दो मंजिला परिसर से यह विशाल खजाना बरामद हुआ है, वह मीनार मंडल नामक व्यक्ति का है। मीनार मंडल पहले नॉर्थ बंगाल स्टेट ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन में बस ड्राइवर के पद पर कार्यरत था। कुछ वर्ष पूर्व उसने सरकारी नौकरी छोड़ दी और अपने रिश्तेदार के पत्थर खनन और परिवहन व्यवसाय से जुड़ गया। तलाशी अभियान के दौरान पुलिस ने मीनार मंडल और उसके बेटे को उसी मकान से हिरासत में ले लिया। पुलिस दल दोनों से गहन पूछताछ कर रहा है ताकि उन संभावित अन्य गुप्त ठिकानों का पता लगाया जा सके जहां इस अवैध कमाई का अतिरिक्त हिस्सा छिपाए जाने की आशंका है।
स्थानीय जांच सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक मीनार मंडल बीरभूम इलाके के उन सात प्रमुख टोल गेटों में से एक का प्रभारी था, जहां से पत्थर खदानों से भरे ट्रक गुजरते हैं। उसका मुख्य काम ट्रांसपोर्टरों से टोल राजस्व वसूलना था। जांच एजेंसियों को संदेह है कि उसने टोल संग्रह के दौरान सरकारी खजाने में जमा की जाने वाली भारी राशि का गबन किया और इस अवैध धनराशि को निजी संपत्ति में बदल दिया। पुलिस द्वारा जब्त की गई नकदी और सोना इसी गबन और धोखाधड़ी के जरिए हासिल की गई संपत्ति का हिस्सा माना जा रहा है।
फरार कारोबारी टुल्लू मंडल से जुड़ाव और बालू माफिया नेटवर्क
पुलिस जांच में यह बात स्पष्ट हुई है कि मीनार मंडल बीरभूम के चर्चित और वर्तमान में फरार कारोबारी टुल्लू मंडल उर्फ मोहम्मद नजीबुद्दीन का करीबी रिश्तेदार है। टुल्लू मंडल का बीरभूम जिले के पत्थर खनन और बालू व्यापार में गहरा प्रभाव और बड़ा कारोबार रहा है। पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने सार्वजनिक रूप से टुल्लू मंडल को बीरभूम का प्रमुख बालू माफिया ऑपरेटर करार दिया था। बीरभूम जिला काफी समय से अवैध पत्थर उत्खनन, राजस्व चोरी और खनन से जुड़े आपराधिक गिरोहों के कारण केंद्रीय और राज्य स्तरीय जांच एजेंसियों की नजर में रहा है।
टुल्लू मंडल का नाम करोड़ों रुपये के मवेशी तस्करी मामले में भी केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी सीबीआई की जांच के दौरान प्रमुखता से सामने आया था। अगस्त 2022 में सीबीआई की टीम ने बीरभूम के मोहम्मद बाजार इलाके में स्थित टुल्लू मंडल के कार्यालय, विशाल गोदाम और उसकी अन्य अचल संपत्तियों पर विस्तृत छापेमारी की थी। इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय ने उसी वर्ष नवंबर में उसे पूछताछ के लिए नई दिल्ली स्थित मुख्यालय में उपस्थित होने का समन भेजा था। ईडी का समन मिलने के महज 48 घंटे के भीतर बीरभूम पुलिस ने अक्टूबर 2022 में दर्ज एक पुराने हत्या के मामले में टुल्लू मंडल को गिरफ्तार कर लिया था।
राजनीतिक संबंध और कानूनी शिकंजा
पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अदालत से जमानत मिलने के बाद टुल्लू मंडल इस साल मई महीने में राज्य विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने के तुरंत बाद से लापता हो गया और फिलहाल पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। टुल्लू मंडल बीरभूम के पत्थर कारोबार के विशाल हिस्से को नियंत्रित करता था। उसे बीरभूम जिला तृणमूल कांग्रेस के तत्कालीन प्रमुख अनुब्रत मंडल का बेहद करीबी सहयोगी माना जाता था। अनुब्रत मंडल को खुद सीबीआई ने मवेशी तस्करी के गंभीर आरोपों में गिरफ्तार किया था। बाद में जमानत पर रिहा होने के बाद अनुब्रत मंडल पार्टी के भीतर ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट के साथ जुड़ गए।
जांच एजेंसियों का मानना है कि बीरभूम में पत्थर और बालू के अवैध व्यापार को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त था, जिसके बल पर करोड़ों रुपये की समानांतर अर्थव्यवस्था चलाई जा रही थी। मीनार मंडल के घर से बरामद की गई विशाल राशि इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि स्थानीय स्तर पर टोल संग्रह और क्लीयरेंस पर्चियों के नाम पर कितना बड़ा आर्थिक घोटाला अंजाम दिया जा रहा था।
प्रवर्तन निदेशालय की भावी जांच के मुख्य बिंदु
इस विशाल बरामदगी के बाद मामले की कड़ियां जोड़ने के लिए प्रवर्तन निदेशालय विस्तृत वित्तीय जांच शुरू करने जा रहा है। ईडी की जांच मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर केंद्रित रहेगी
- टुल्लू मंडल और उसके सहयोगियों ने कथित तौर पर सैकड़ों करोड़ रुपये की बेहिसाबी संपत्ति और साम्राज्य कैसे खड़ा किया।
- गैर कानूनी बालू खनन, अवैध पत्थर खदानों के संचालन और डिस्पैच क्लीयरेंस रिसीट अर्थात डीसीआर राजस्व धोखाधड़ी में उनकी वास्तविक भूमिका।
- प्रभावशाली राजनीतिक नेताओं और बड़े व्यापारिक घरानों के साथ उनके संदिग्ध संबंध, जिसमें यह जांचना शामिल है कि क्या उन्हें अनुब्रत मंडल का सीधा संरक्षण प्राप्त था और क्या उनके तार कोलकाता के उच्च स्तर तक जुड़े थे।
- उनकी भव्य लग्जरी परिसंपत्तियों, व्यापक भूखंडों की खरीद और दुबई में एक आलीशान होटल का मालिकाना हक होने के दावों की सत्यता जांचना।
- टुल्लू मंडल की बेटी की हाई प्रोफाइल शादी में हुए बेहिसाब खर्च और उसके दामाद के परिवार के अंतरराष्ट्रीय सोना तस्करी नेटवर्क से जुड़े होने के आरोपों की पड़ताल करना।
- यह पता लगाना कि क्या अवैध खनन और टोल चोरी से हुए राजस्व नुकसान का फायदा सिर्फ स्थानीय स्तर के नेताओं तक सीमित था या इसकी रकम राज्य प्रशासनिक तंत्र के ऊपरी स्तरों तक भी पहुंचती थी।



















