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जयपुर सेंट्रल जेल में पूर्व विधायक बलजीत यादव के पास से मोबाइल बरामद, कॉल डिटेल रिकॉर्ड खंगालेगी पुलिसराजस्थान
10 सित॰ 2026, 5:13 pm (1 घंटे पहले)· 2

जयपुर सेंट्रल जेल में पूर्व विधायक बलजीत यादव के पास से मोबाइल बरामद, कॉल डिटेल रिकॉर्ड खंगालेगी पुलिस

जयपुर सेंट्रल जेल में औचक निरीक्षण के दौरान पूर्व विधायक बलजीत यादव के पास एक मोबाइल फोन बरामद हुआ है। जेल प्रशासन की शिकायत पर पुलिस अब इस फोन के कॉल डिटेल रिकॉर्ड की जांच कर रही है ताकि यह पता चल सके कि इसका इस्तेमाल किन लोगों से संपर्क करने के लिए किया गया था।

जयपुर सेंट्रल जेल के अंदर एक बड़ी कार्रवाई के दौरान उस समय हड़कंप मच गया जब वार्ड नंबर-5 की सघन तलाशी के दौरान पूर्व विधायक बलजीत यादव के कब्जे से एक मोबाइल फोन बरामद किया गया। यह घटना बुधवार की है जब जेल प्रशासन अवैध और प्रतिबंधित वस्तुओं की धरपकड़ के लिए विशेष तलाशी अभियान चला रहा था। अधिकारियों के अनुसार कैचोडा कंपनी का यह मोबाइल फोन जमीन पर बिछाए गए एक कंबल के ठीक नीचे बड़ी चालाकी से छिपाकर रखा गया था। जेलकर्मियों ने मौके पर ही फोन को जब्त कर लिया और इस संबंध में लालकोठी थाने में आधिकारिक शिकायत दर्ज कराते हुए कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।

कॉल डिटेल रिकॉर्ड से खुलेगा संपर्क का राज

जेल के अंदर मोबाइल मिलने के बाद अब स्थानीय पुलिस इस बात की गहराई से छानबीन कर रही है कि आखिर यह प्रतिबंधित उपकरण जेल की सुरक्षा व्यवस्था को भेदकर बलजीत यादव तक कैसे पहुंचा। पुलिस इस बात का भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि जेल की सलाखों के पीछे रहने के दौरान इस फोन के जरिए किन-किन लोगों से बातचीत की गई और किस प्रकार के संपर्क साधे गए। इस कटी हुई कड़ी को जोड़ने के लिए पुलिस मोबाइल की सीडीआर यानी कॉल डिटेल रिकॉर्ड निकलवाने की प्रक्रिया में जुट गई है। कॉल रिकॉर्ड सामने आने के बाद उन तमाम नंबरों और चेहरों का खुलासा होने की उम्मीद है जिनके संपर्क में आरोपी रहे हैं।

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अन्य बंदियों के पास से भी मिले फोन

यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है क्योंकि इसी अभियान के दौरान जेल के भीतर कुल 8 अन्य बंदियों के पास से भी मोबाइल फोन मिलने की बात सामने आई है। इसके ठीक अगले दिन यानी गुरुवार को भी सेंट्रल जेल परिसर में बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन चलाया गया जिसमें कई और मोबाइल फोन बरामद किए गए। गौरतलब है कि इससे ठीक दो दिन पहले भी जेल प्रशासन ने औचक कार्रवाई करते हुए 13 मोबाइल फोन जब्त किए थे। इन सभी मामलों में भी नियमानुसार संबंधित आरोपियों के खिलाफ पुलिस थानों में अलग से मुकदमे दर्ज कराए गए हैं। जेल के अंदर लगातार हो रही इन बरामदगियों ने वहां की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक चौकियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि यह अभी भी जांच का एक अहम विषय बना हुआ है कि प्रतिबंधित सामग्रियां जेल की ऊंची दीवारों और कड़ी पहरेदारी के बावजूद अंदर तक कैसे पहुंच रही हैं।

वित्तीय गड़बड़ी और फंड के दुरुपयोग का मामला

आपको बता दें कि बलजीत यादव वर्तमान में विधायक कोष यानी एमएलए-लैड फंड के कथित दुरुपयोग और गबन से जुड़े एक गंभीर आपराधिक मामले में न्यायिक हिरासत के तहत जेल में बंद हैं। यह पूरा मामला बहरोड़ विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले 32 विभिन्न सरकारी विद्यालयों के लिए खेलकूद सामग्री के रूप में बैडमिंटन और क्रिकेट किट खरीदे जाने से जुड़ा हुआ है। जांच एजेंसियों के अनुसार इन खेलों के सामानों को तय और वास्तविक कीमत से काफी अधिक दामों पर खरीदा गया था जिससे सरकारी खजाने को भारी वित्तीय नुकसान पहुंचाया गया। इस पूरे प्रकरण में लगभग 3.72 करोड़ रुपये के बड़े घोटाले का गंभीर आरोप लगाया गया है। अभियोजन पक्ष के अनुसार स्कूलों को भेजी गई खेल सामग्री का बाजार मूल्य सामान्य दर से ढाई से तीन गुना तक ज्यादा दर्शाया गया था जिसके आधार पर भ्रष्टाचार निवारण से जुड़े पहलुओं की जांच की जा रही है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए एसीबी यानी भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने 12 दिसंबर 2024 को बलजीत यादव के खिलाफ औपचारिक रूप से मामला दर्ज किया था।

प्रवर्तन निदेशालय की एंट्री और आगे की जांच

इस पूरे घटनाक्रम के तूल पकड़ने के बाद प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने भी इस मामले में अपनी स्वतंत्र जांच का दायरा बढ़ा दिया और शिकंजा कसना शुरू कर दिया। केंद्रीय एजेंसी ने इस सिलसिले में 3 फरवरी 2026 को बलजीत यादव को गिरफ्तार कर लिया था और पूछताछ के लिए रिमांड पर लिया था। रिमांड की अवधि पूरी होने के बाद विशेष अदालत के स्पष्ट निर्देशों के तहत 7 फरवरी को उन्हें वापस जेल भेज दिया गया था। अब जेल के भीतर से मोबाइल फोन बरामद होने के बाद इस मामले में जांच का एक नया और अहम पहलू जुड़ गया है। पुलिस यह पता लगाने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है कि जेल के भीतर इस संचार साधन का किस तरह से दुरुपयोग किया गया और इसके माध्यम से कौन लोग पर्दे के पीछे से जुड़े हुए थे। लालोकोठी थाने में दर्ज मुकदमे के बाद पुलिस की आगामी तकनीकी जांच और पूछताछ के परिणामों से ही यह पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगा कि जेल के सुरक्षा घेरे में यह सेंधमारी कैसे हुई।

सवाल-जवाब

बलजीत यादव के पास से कौन सा मोबाइल मिला?
तलाशी के दौरान उनके पास से कैचोडा कंपनी का एक मोबाइल फोन बरामद हुआ।
मोबाइल फोन कहां छिपाकर रखा गया था?
मोबाइल फोन को जमीन पर बिछाए गए कंबल के नीचे छिपाकर रखा गया था।
यह घटना किस जेल में सामने आई है?
यह घटना जयपुर सेंट्रल जेल के वार्ड नंबर-5 में हुई है।
पुलिस अब इस मामले में क्या जांच कर रही है?
पुलिस फोन के कॉल डिटेल रिकॉर्ड की जांच कर रही है ताकि संपर्कों का पता चल सके।
बलजीत यादव किस मामले में जेल में बंद हैं?
वे विधायक कोष के कथित दुरुपयोग और गबन के मामले में जेल में बंद हैं।
ईडी ने बलजीत यादव को कब गिरफ्तार किया था?
ईडी ने उन्हें 3 फरवरी 2026 को गिरफ्तार किया था।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·54 मिनट पहले

जयपुर सेंट्रल जेल के वार्ड नंबर-5 में पूर्व विधायक बलजीत यादव और अन्य बंदियों के पास से लगातार मोबाइल फोन मिलना और कुछ ही दिनों में दर्जनों फोन ज़ब्त होना जेल की त्रि-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। जेल प्रशासन और सुरक्षा कर्मियों की मिलीभगत के बिना इतनी बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित उपकरणों का अंदर पहुंचना नामुमकिन है। पुलिस द्वारा सीडीआर खंगालने और लालकोठी थाने में मामले दर्ज करने से यह तो स्पष्ट हो जाएगा कि फोन का इस्तेमाल किन लोगों से संपर्क के लिए हुआ, लेकिन असली चुनौती इस बात का पर्दाफाश करना है कि यह सिंडिकेट जेल के भीतर कैसे संचालित हो रहा है।

Rohan Verma@rohan-verma·54 मिनट पहले

लगातार मिल रहे मोबाइल फोन यह दर्शाते हैं कि केवल औचक निरीक्षण से काम नहीं चलेगा, बल्कि जेल के भीतर सक्रिय उस आंतरिक तंत्र को तोड़ना होगा जो इन उपकरणों की तस्करी को बढ़ावा दे रहा है। सीडीआर की फोरेंसिक जांच से भले ही बाहरी संपर्कों का खुलासा हो जाए, लेकिन इस बात की उच्चस्तरीय प्रशासनिक जांच अनिवार्य है कि सुरक्षा कर्मियों की मिलीभगत की सीमा कहाँ तक है और कौन से बाहरी सिंडिकेट इस अवैध नेटवर्क को वित्तीय और logistical समर्थन दे रहे हैं।

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