पश्चिम बंगाल की दो बेहद अहम विधानसभा सीटों, नंदीग्राम और रेजीनगर में उपचुनाव के लिए जारी आक्रामक प्रचार रविवार शाम पूरी तरह थम गया। दोनों निर्वाचन क्षेत्रों में 6 अक्टूबर को मतदान कराया जाएगा, जबकि मतों की गिनती 9 अक्टूबर को संपन्न होगी। प्रचार के अंतिम घंटों में सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने मतदाताओं को रिझाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी, जिससे मुकाबला बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है।
नंदीग्राम में शुभेंदु अधिकारी का पैदल मार्च और दावों की सियासत
नंदीग्राम निर्वाचन क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी की उम्मीदवार हसीरानी रथ के पक्ष में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने खुद कमान संभालते हुए पैदल मार्च निकाला। इस जनसंपर्क के दौरान उन्होंने एक अहम चुनावी समीकरण की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में 7 ऐसे पोलिंग बूथ मौजूद हैं जहां अल्पसंख्यक समुदाय के मतदाता संख्याबल के लिहाज से बहुसंख्यक हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार, एक समय ऐसा था जब इन बूथों वाले इलाकों में भाजपा कार्यकर्ताओं का कदम रखना तक नामुमकिन बना दिया गया था, लेकिन इस बार जमीनी हालात पूरी तरह बदल चुके हैं।
शुभेंदु अधिकारी ने जोर देकर कहा कि इन इलाकों के नागरिक अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकास कार्यों और राज्य में चल रही 'डबल इंजन' सरकार की नीतियों का सीधा लाभ लेना चाहते हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था के भीतर हर एक वोटर की आवाज का खास महत्व है और भाजपा समाज के हर तबके का भरोसा और समर्थन हासिल करना चाहती है। उन्होंने जानकारी दी कि संबंधित क्षेत्र में उन्होंने लगभग एक से दो घंटे तक सघन प्रचार किया, जहां आम लोगों का भारी हुजूम एकत्र हुआ। उनके मुताबिक, छोटे बच्चों से लेकर उम्रदराज बुजुर्गों तक ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया, जिससे पार्टी को सभी वर्गों से वोट मिलने का पूरा भरोसा है।
कांग्रेस की निष्पक्षता पर चिंता और मीडिया से निगरानी की अपील
दूसरी तरफ, कांग्रेस खेमे ने चुनाव की पारदर्शिता और प्रशासनिक निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पश्चिम बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने आशंका जताई कि मतदान पूरी तरह स्वतंत्र और निष्पक्ष माहौल में संपन्न नहीं हो पाएगा। उन्होंने सत्ताधारी भाजपा पर चुनावी जीत दर्ज करने के लिए हर संभव हथकंडा अपनाने और मीडिया संस्थानों पर अनुचित दबाव डालने का सीधा आरोप लगाया। शुभंकर सरकार ने देश भर के पत्रकारों और मीडियाकर्मियों से अपील की कि वे मतदान के दिन सीधे नंदीग्राम पहुंचें और पूरी चुनावी प्रक्रिया की जमीनी स्तर पर निगरानी करें ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को रोका जा सके।
जमानत पर बाहर आए कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान का प्रचार
नंदीग्राम से कांग्रेस के उम्मीदवार मिलन प्रधान ने कानूनी अड़चनों से राहत मिलते ही अपने अभियान की रफ्तार बढ़ा दी। कलकत्ता हाई कोर्ट से गुरुवार को नियमित जमानत मिलने के फौरन बाद वे मैदान में उतरे। चुनाव प्रचार के आखिरी दिन मिलन प्रधान ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार और अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ मिलकर सघन जनसंपर्क किया।
उल्लेखनीय है कि मिलन प्रधान को 18 सितंबर को वर्ष 2007 के ऐतिहासिक नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन से जुड़े छह अलग-अलग मुकदमों के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था। जेल से रिहा होने के बाद उन्होंने उपलब्ध कम समय में लगभग समूचे नंदीग्राम क्षेत्र के मतदाताओं तक पहुंचने की पुरजोर कोशिश की।
ममता बनर्जी के टीएमसी गुट का समर्थन और उम्मीदवारी का घटनाक्रम
नंदीग्राम का मुकाबला उस समय और पेचीदा हो गया जब ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) गुट ने कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को खुला समर्थन देने का ऐलान किया। इससे पहले टीएमसी की आधिकारिक उम्मीदवार संचिता प्रधान डे चुनावी मैदान में थीं, लेकिन शुभेंदु अधिकारी से हुई एक मुलाकात के उपरांत उन्होंने नंदीग्राम से अपना नामांकन वापस ले लिया था।
इसके साथ ही, भाजपा प्रत्याशी हसीरानी रथ की उम्मीदवारी भी कानूनी विवादों में घिरी रही। हसीरानी रथ, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के करीबी सहयोगी रहे चंद्रनाथ रथ की मां हैं। चंद्रनाथ रथ की हत्या पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के परिणाम सामने आने के ठीक दो दिन बाद कर दी गई थी। कांग्रेस ने हसीरानी रथ के चुनावी हलफनामे में उम्र से जुड़ी कथित विसंगति को आधार बनाते हुए उनकी उम्मीदवारी को कलकत्ता हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, हालांकि यह कानूनी चुनौती अदालत में टिक नहीं सकी और खारिज हो गई।
नंदीग्राम और रेजीनगर दोनों सीटों पर बहुकोणीय मुकाबला
नंदीग्राम में मुख्य लड़ाई सिर्फ भाजपा और कांग्रेस के बीच सीमित नहीं है। इस सीट पर वामपंथी दल, इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) और ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाली डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस भी अपने प्रत्याशी उतारकर मुकाबले को बहुकोणीय बना रही हैं।
वहीं, मुर्शिदाबाद जिले की रेजीनगर सीट पर भी चुनावी समीकरण बेहद उलझे हुए हैं। यहां भाजपा, कांग्रेस, आम जनता उन्नयन पार्टी (एजेयूपी) और टीएमसी के दोनों गुट चुनावी अखाड़े में ताल ठोक रहे हैं। रेजीनगर में तनाव की पृष्ठभूमि भी रही है, जहां एक निर्दलीय उम्मीदवार को पिछले महीने गिरफ्तार किया गया था। यह गिरफ्तारी वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव के दौरान दो गुटों के बीच हुई हिंसक झड़प से संबंधित पांच साल पुराने मामले में की गई थी।
दोनों विधानसभा सीटें खाली होने की पृष्ठभूमि
इन दोनों सीटों पर उपचुनाव की नौबत विधायकों के इस्तीफे के चलते आई। नंदीग्राम सीट मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के इस्तीफे के कारण रिक्त हुई थी। अधिकारी ने नंदीग्राम के साथ-साथ भवानीपुर सीट से भी जीत दर्ज की थी और बाद में नंदीग्राम सीट छोड़ दी। दूसरी ओर, रेजीनगर सीट एजेयूपी प्रमुख हुमायूं कबीर द्वारा नवदा सीट बरकरार रखने के फैसले के बाद खाली हुई। हुमायूं कबीर ने 2026 के विधानसभा चुनाव में रेजीनगर और नवदा दोनों ही क्षेत्रों से जीत का परचम लहराया था।





















