पश्चिम बंगाल प्रशासन ने राज्य के परिवहन विभाग में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बेहद सख्त और निर्णायक कदम उठाया है। सरकार ने पश्चिम बर्धमान जिले के अंतर्गत आने वाले रामपुर चेकपोस्ट पर तैनात दो मोटर वाहन निरीक्षकों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। इन अधिकारियों पर एक मालवाहक ट्रक के चालक को बेवजह परेशान करने और उससे अवैध तरीके से पैसे वसूलने के गंभीर आरोप लगे हैं। इस मामले में शिकायत मिलने के तुरंत बाद परिवहन विभाग ने त्वरित विभागीय कार्रवाई की। इसके बाद, मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक विस्तृत पोस्ट साझा कर प्रशासन द्वारा की गई इस सख्त कार्रवाई की जानकारी दी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि प्रशासन में किसी भी प्रकार की जबरन वसूली या कर्तव्य के दुरुपयोग को बिल्कुल भी सहन नहीं किया जाएगा।
अवैध टैक्स के नाम पर मांगे ₹22,000
यह पूरा मामला एक मालवाहक गाड़ी से जुड़ा है। वाहन संख्या JH09BA3535, जो कि एक व्यावसायिक ट्रक है, अपनी नियमित सर्विसिंग के बाद वापस गैराज की ओर लौट रहा था। जब यह वाहन पश्चिम बर्धमान के रामपुर चेकपोस्ट पर पहुंचा, तो वहां ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों ने उसे गैर-कानूनी ढंग से रोक लिया। इसके बाद ट्रक के चालक, जिनका नाम शिवा यादव है, को वहां मौजूद कर्मियों द्वारा मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया और उन पर रिश्वत देने के लिए दबाव बनाया गया। जब चालक शिवा यादव ने इस अवैध मांग के आगे झुकने से इनकार कर दिया और पैसे देने से मना कर दिया, तो अधिकारियों ने उनकी गाड़ी को अनुचित तरीके से जब्त कर लिया। इसके बाद, अधिकारियों ने टैक्स के नाम पर ₹22,000 की भारी-भरकम राशि की मांग की। हैरान करने वाली बात यह है कि इस टैक्स को राज्य सरकार द्वारा पहले ही पूरी तरह से समाप्त किया जा चुका था, लेकिन अधिकारी इसके बावजूद चालक पर इस राशि का भुगतान करने का दबाव बना रहे थे।
दोषी निरीक्षकों पर निलंबन की गाज
व्यावसायिक ड्राइवरों और ट्रांसपोर्टरों को इस प्रकार के प्रशासनिक उत्पीड़न से सुरक्षा प्रदान करने के लिए राज्य सरकार ने बेहद तेज गति से कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने इस बात की पुष्टि की है कि सत्ता के दुरुपयोग और जबरन वसूली की गंभीर शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई करते हुए परिवहन विभाग ने दोषी अधिकारियों को सबक सिखाया है। रामपुर चेकपोस्ट पर तैनात दोषी मोटर वाहन निरीक्षकों, नाजिमुल हक और अनुपम बनर्जी को तत्काल प्रभाव से नौकरी से सस्पेंड कर दिया गया है। इन दोनों अधिकारियों के खिलाफ यह निलंबन आदेश पश्चिम बंगाल सेवा नियम, 1971 के नियम 7(1)(a) के तहत जारी किया गया है। सरकार की इस त्वरित कार्रवाई से यह संदेश स्पष्ट रूप से गया है कि सरकारी पद पर बैठकर जनता को परेशान करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
एंटी-करप्शन ब्यूरो करेगा आपराधिक जांच
इस मामले को केवल विभागीय स्तर पर दबाने के बजाय, सरकार ने इसे कानूनी और आपराधिक स्तर पर ले जाने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार, इन दोषी अधिकारियों के खिलाफ शिकायतों को औपचारिक रूप से एंटी-करप्शन ब्यूरो के पास भेज दिया गया है। एंटी-करप्शन ब्यूरो अब इस पूरे मामले की गहन आपराधिक जांच करेगा और आवश्यक कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करेगा। इस जांच के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि क्या रामपुर चेकपोस्ट पर इस तरह की अवैध वसूली का कोई संगठित नेटवर्क चल रहा था। दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में कोई भी अधिकारी ऐसा दुस्साहस न कर सके।
भ्रष्टाचार पर कड़ा रुख और सख्त चेतावनी
भ्रष्टाचार के प्रति अपने कड़े रुख को दोहराते हुए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने राज्य के सभी प्रशासनिक विभागों और सरकारी कर्मचारियों को एक बेहद सख्त चेतावनी जारी की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी व्यक्ति, चाहे वह किसी भी ऊंचे पद पर क्यों न हो, कानून से ऊपर नहीं है। पश्चिम बंगाल सरकार शासन के हर स्तर पर 'जीरो टॉलरेंस पॉलिसी' यानी भ्रष्टाचार को बिल्कुल भी बर्दाश्त न करने की नीति का पालन कर रही है। मुख्यमंत्री ने सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि अवैध रूप से रोकी गई गाड़ियों को तुरंत रिहा किया जाए और ट्रांसपोर्टरों के साथ किसी भी प्रकार के उत्पीड़न से सख्ती से निपटा जाए। सरकार का अंतिम लक्ष्य राज्य में एक पूरी तरह से पारदर्शी, निष्पक्ष और पूरी तरह से भ्रष्टाचार-मुक्त शासन तंत्र स्थापित करना है।



















