अफगानिस्तान में आज गुरुवार तड़के धरती डोल गई। भारत के पड़ोस में स्थित जुर्म इलाके में सुबह-सुबह लोग नींद में ही थे कि तभी जोरदार झटकों ने उन्हें हिलाकर रख दिया। कंपन इतना तेज था कि लोग घरों से बाहर निकल आए। अमेरिकी भूगर्भ सर्वेक्षण संस्था USGS के मुताबिक इस भूकंप की तीव्रता 5.5 मापी गई और यह उत्तर-पूर्वी अफगानिस्तान में जुर्म के करीब आया।
भूकंप कितना गहरा था?
USGS के आंकड़ों के अनुसार यह भूकंप 216.7 किलोमीटर यानी करीब 134.65 मील की गहराई पर आया। इतनी गहराई पर आए भूकंप की सतह पर तबाही मचाने की क्षमता आमतौर पर कम होती है, यही वजह रही कि झटकों के तुरंत बाद जान-माल के नुकसान की कोई खबर सामने नहीं आई।
बार-बार क्यों हिलती है यह जमीन
जुर्म अफगानिस्तान के उत्तर-पूर्वी पहाड़ी बदख्शां प्रांत में बसा है। यह पूरा इलाका भूकंप के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता है, क्योंकि यहां नीचे इंडियन और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटें लगातार आपस में टकराती रहती हैं। इसी वजह से इस क्षेत्र में भूकंप के झटके कोई नई बात नहीं हैं।
वेनेजुएला की तबाही अभी ताजा
अफगानिस्तान में यह भूकंप ऐसे समय आया है जब कुछ ही दिन पहले वेनेजुएला लगातार दो भूकंपों से दहल चुका है। उन झटकों ने वहां इतनी भारी तबाही मचाई कि उसकी गूंज अब तक सुनाई दे रही है। वेनेजुएला में अब तक 1500 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है, जबकि हजारों लोग अब भी मलबे में दबे बताए जा रहे हैं।
सितंबर 2025 के भूकंप के जख्म अभी हरे
अफगानिस्तान के लिए यह भूकंप ऐसे वक्त आया है जब देश एक और बड़े भूकंप के जख्मों से पूरी तरह उबरा भी नहीं है। सितंबर 2025 में अफगानिस्तान के पूर्वी हिस्से में 6.0 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया था। शुरुआत में इसमें 800 से ज्यादा लोगों के मारे जाने की खबर आई थी। लेकिन जैसे-जैसे बचाव दल दूर-दराज के दुर्गम इलाकों तक पहुंचे, तालिबान अधिकारियों और रॉयटर्स के हवाले से मरने वालों का आंकड़ा बढ़कर 2,200 से ज्यादा हो गया, जबकि कम से कम 2,800 लोग घायल हुए थे।
2023 में हेरात भी हिल गया था
अक्टूबर 2023 में पश्चिमी अफगानिस्तान के हेरात के आसपास भी कई जबरदस्त भूकंप आए थे। उस आपदा में 2,000 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी और हजारों लोग घायल हुए थे। इसे बीते कई दशकों में अफगानिस्तान में आई सबसे भयावह प्राकृतिक आपदाओं में गिना जाता है।
हिंदू कुश की पहाड़ियां और बचाव कार्य की मुश्किलें
दरअसल अफगानिस्तान हिंदू कुश पर्वत श्रृंखला के दायरे में आता है, जहां अक्सर गहराई वाले भूकंप दर्ज होते रहते हैं। इन झटकों का असर सिर्फ अफगानिस्तान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पड़ोसी पाकिस्तान और मध्य एशिया के कई हिस्सों में भी महसूस किया जाता है। देश के ऊबड़-खाबड़ पहाड़ी इलाके, दूर-दूर तक बिखरी बस्तियां और सीमित बुनियादी ढांचा हर बार बचाव और राहत कार्य को बेहद कठिन बना देते हैं, जिसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ता है।













