अमेरिका और ईरान के बीच करीब चार महीने से चल रही जंग आखिरकार थम गई है। लंबी कूटनीतिक खींचतान के बाद दोनों देश एक समझौते पर पहुंचे, जिस पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) के रूप में मुहर लगाई। पश्चिम एशिया में महीनों से जारी इस टकराव को रोकने के लिए कई अहम मुद्दों पर सहमति बनी है। माना जा रहा है कि इस पूरी कवायद का औपचारिक और अंतिम रूप 19 जून को जेनेवा में सामने आएगा, यानी उसी दिन ईरान और अमेरिका के बीच आधिकारिक पीस डील पर दस्तखत होंगे।
वर्साय के महल में, मैक्रों संग डिनर के बीच हुआ फैसला
दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप ने यह ऐतिहासिक हस्ताक्षर किसी सरकारी दफ्तर में नहीं, बल्कि एक डिनर टेबल के बीच किए। बुधवार को पश्चिम एशिया में युद्ध रोकने वाले इस समझौते पर ट्रंप ने उस वक्त साइन किए, जब वह फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ रात्रिभोज पर थे। एक अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, TrendKia की जानकारी में यह दस्तखत मैक्रों के साथ इसी डिनर के दौरान हुए। गौरतलब है कि ट्रंप इन दिनों G7 शिखर सम्मेलन के सिलसिले में फ्रांस में मौजूद हैं।
इस घटनाक्रम का एक भारतीय कनेक्शन भी है। इमैनुएल मैक्रों, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी दोस्तों में गिने जाते हैं और भारत व फ्रांस के रिश्ते भी काफी मजबूत माने जाते हैं। राफेल फाइटर जेट इसी गहरी दोस्ती की एक मिसाल है।
'इट्स साइन्ड': ट्रंप ने पत्रकारों से चिल्लाकर कहा
समाचार एजेंसी से जुड़ी रिपोर्ट के मुताबिक, G7 सम्मेलन के बाद वर्साय के महल में मैक्रों के साथ डिनर के दौरान ट्रंप के निजी तौर पर हस्ताक्षर करने को लेकर पूछे जाने पर अधिकारी ने कहा, 'मैं हस्ताक्षर की पुष्टि कर सकता हूं।' डिनर खत्म कर जैसे ही ट्रंप महल से बाहर निकले, उन्होंने पत्रकारों की ओर मुड़कर जोर से कहा, 'इट्स साइन्ड', यानी इस पर साइन हो गया है।
ईरान की ओर से भी इसकी तस्दीक हुई। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने पुष्टि की कि अमेरिका के साथ इस समझौता ज्ञापन पर इलेक्ट्रॉनिक तरीके से दस्तखत किए गए हैं। बघाई ने यह भी कहा कि दोनों राष्ट्रपतियों के हस्ताक्षर के साथ समझौता ज्ञापन के टेक्स्ट को अंतिम रूप दे दिया गया है और अब वक्त इसके अमल को परखने का है।
रविवार को डिजिटल साइन, ट्रंप बने गवाह
TrendKia को मिली जानकारी के अनुसार, बुधवार को ट्रंप और राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन की ओर से जिस MoU पर मुहर लगी, उस पर बीते रविवार को अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेर गालीबाफ ने डिजिटल रूप से हस्ताक्षर किए थे। इस मौके पर खुद अमेरिकी राष्ट्रपति इसके गवाह बने थे। इस तरह डिजिटल हस्ताक्षर से शुरू हुई प्रक्रिया दोनों देशों के शीर्ष नेताओं तक पहुंची।
समझौते की सबसे बड़ी बातें
इस डील में सबसे अहम मुद्दा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से जुड़ा है। महीनों की बंदी के बाद इस अहम समुद्री रास्ते को तेजी से दोबारा खोला जाना है। इसी होर्मुज बंदी की वजह से दुनिया भर में ऊर्जा की कीमतें आसमान छू रही थीं। समझौते में ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंधों में तत्काल छूट देने की बात भी शामिल है। वहीं परमाणु से जुड़े मसलों और ईरान को मिलने वाले संभावित अतिरिक्त वित्तीय लाभों पर बातचीत आगे चलकर होगी।
डील के 14 अहम बिंदु
अमेरिका और ईरान के बीच हुए इस समझौते के मुख्य 14 बिंदु इस प्रकार हैं:
- हर मोर्चे पर तत्काल और स्थायी युद्धविराम लागू होगा।
- अमेरिका और ईरान एक-दूसरे की संप्रभुता (Sovereignty) का सम्मान करेंगे।
- अमेरिका ईरान के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देगा।
- अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी (Naval Blockade) हटाई जाएगी।
- 30 दिनों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोल दिया जाएगा।
- समुद्री व्यापार और जहाजों की आवाजाही बहाल करने में दोनों पक्ष मिलकर सहयोग करेंगे।
- अमेरिका ईरान पर लगे तेल और ऊर्जा क्षेत्र के प्रतिबंधों में राहत देगा।
- ईरानी तेल निर्यात को मंजूरी देने के लिए प्रतिबंधों में छूट (Waivers) जारी की जाएगी।
- ईरान की जमी हुई विदेशी संपत्तियों (Frozen Assets) को चरणबद्ध तरीके से जारी किया जाएगा।
- अमेरिका इस क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी नहीं बढ़ाएगा और न ही कोई नया प्रतिबंध लगाएगा।
- ईरान यह दोहराएगा कि वह परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा।
- IAEA की निगरानी में संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) को लेकर व्यवस्था बनाई जाएगी।
- ईरान के पुनर्निर्माण और विकास के लिए करीब 300 अरब डॉलर की योजना का प्रस्ताव है।
- अंतिम और व्यापक समझौते को आगे चलकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के समर्थन या प्रस्ताव के जरिए औपचारिक रूप दिया जाएगा।













