अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को दावा किया कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की, दोनों अब आपस की जंग को खत्म करने के इच्छुक हैं. दिलचस्प बात यह रही कि ट्रंप का यह बयान ऐसे वक्त पर आया जब रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव पर ताजा हवाई हमले किए, जिनमें कम से कम 18 लोगों की जान चली गई. यानी एक तरफ जंग खत्म होने की उम्मीद जताई जा रही थी, तो दूसरी तरफ जमीन पर हमले जारी थे.
व्हाइट हाउस में पत्रकारों से क्या बोले ट्रंप
व्हाइट हाउस में मौजूद पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रंप ने भरोसे के साथ कहा, "राष्ट्रपति पुतिन इस युद्ध को खत्म करना चाहते हैं. मैं यह बात पूरे दृढ़ता से कह सकता हूं. हमारी अच्छी बातचीत हुई. राष्ट्रपति जेलेंस्की भी अब वास्तव में युद्ध समाप्त करना चाहते हैं. हम नाटो सम्मेलन में जा रहे हैं और वहां भी इस मुद्दे पर चर्चा होगी." उन्होंने बताया कि सप्ताहांत में उन्होंने पुतिन और जेलेंस्की, दोनों से फोन पर अलग-अलग बात की थी और इसी दौरान यूक्रेन युद्ध को रोकने के प्रयासों पर चर्चा हुई.
बच्चों के लिए 'ट्रंप अकाउंट्स' योजना के मौके पर आया बयान
दरअसल ट्रंप उस वक्त पत्रकारों से मुखातिब थे जब न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज और नैस्डैक में बच्चों के लिए बनाई गई 'ट्रंप अकाउंट्स' योजना की शुरुआत हो रही थी. ओवल ऑफिस में मौजूद ट्रंप से जब यूक्रेन युद्ध पर सवाल पूछे गए तो उन्होंने न सिर्फ पुतिन-जेलेंस्की की बातचीत का जिक्र किया बल्कि अपने पुराने दावों को भी दोहराया.
आठ युद्ध रुकवाने का दावा, भारत-पाकिस्तान का भी जिक्र
ट्रंप ने एक बार फिर कहा कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान सहित कुल आठ युद्ध रुकवाए हैं. उनके शब्दों में, "मैंने आठ युद्ध खत्म कराए. मुझे लगा था कि यूक्रेन से जुड़ा मामला आसान होगा, क्योंकि मैं दोनों नेताओं को जानता हूं. मैंने भारत-पाकिस्तान के बीच भी तनाव कम कराया." इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी दावा किया कि भारत-पाकिस्तान के बीच का वह टकराव परमाणु युद्ध तक पहुंच सकता था. ट्रंप ने कहा, "वह स्थिति परमाणु युद्ध तक पहुंच सकती थी. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के अनुसार, इसमें चार से पांच करोड़ लोगों की जान जा सकती थी. 11 विमान गिराए जा चुके थे और चार दिनों तक संघर्ष जारी था, लेकिन मैंने उसे रुकवा दिया." गौरतलब है कि ट्रंप का यह बयान पिछले साल भारत द्वारा चलाए गए 'ऑपरेशन सिंदूर' के संदर्भ में था.
भारत ने पहले भी खारिज किए मध्यस्थता के दावे
हालांकि भारत सरकार शुरू से ही किसी भी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता के दावों को सिरे से खारिज करती रही है. नई दिल्ली का कहना है कि मई 2025 में पाकिस्तान के साथ संघर्ष खत्म करने की सहमति किसी बाहरी दबाव या मध्यस्थता से नहीं, बल्कि दोनों देशों के सैन्य अभियान महानिदेशकों यानी डीजीएमओ के बीच हुई सीधी बातचीत से बनी थी. यानी ट्रंप के दावे और भारत के आधिकारिक रुख में साफ फर्क नजर आता है, भले ही अमेरिकी राष्ट्रपति अपनी भूमिका को बार-बार बढ़ा-चढ़ाकर पेश करते रहे हों.











