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यूरोपीय मानवाधिकार अदालत का तुर्की को आदेश, जेल में बंद कारोबारी ओस्मान कावाला को तुरंत रिहा करेंदुनिया
25 अग॰ 2026, 9:50 pm (52 दिन पहले)· 2

यूरोपीय मानवाधिकार अदालत का तुर्की को आदेश, जेल में बंद कारोबारी ओस्मान कावाला को तुरंत रिहा करें

यूरोपीय मानवाधिकार अदालत ने तुर्की सरकार को लगभग एक दशक से कैद में रखे गए परोपकारी ओस्मान कावाला को फौरन रिहा करने का निर्देश दिया है।

मानवाधिकारों से जुड़ी शीर्ष यूरोपीय अदालत ने तुर्की प्रशासन को सख्त निर्देश देते हुए कहा है कि कार्यकर्ता और परोपकारी ओस्मान कावाला को बिना किसी और देरी के फौरन रिहा किया जाए। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि ओस्मान कावाला का यह लंबा कारावास और उन पर लगाया गया गंभीर आजीवन कारावास का दंड पूरी तरह से अमानवीय और अपमानजनक व्यवहार के दायरे में आता है। अदालत की यह टिप्पणी तुर्की की न्याय व्यवस्था में राजनीतिक असहमति को कुचलने और आलोचकों को निशाना बनाने की एक गहरी प्रणालीगत समस्या को उजागर करती है।

साल 2013 के प्रदर्शन और तख्तापलट के आरोप

ओस्मान कावाला को साल 2022 में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी, जिसमें उन पर साल 2013 के राष्ट्रव्यापी प्रदर्शनों और उसके तीन साल बाद हुए असफल तख्तापलट के प्रयासों से जुड़े गंभीर आरोप मढ़े गए थे। उनकी यह कानूनी मुसीबत तब शुरू हुई जब उन्हें साल 2017 में पहली बार गिरफ्तार किया गया। तब से लेकर अब तक मानवाधिकार संगठनों और खुद ओस्मान कावाला ने लगातार यह बात दोहराई है कि उनके खिलाफ लगाए गए सभी आरोप राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित हैं। एम्नेस्टी इंटरनेशनल जैसी संस्थाओं ने बताया कि अभियोजकों ने निराधार दावे किए कि इस्तांबुल के गेजी पार्क से शुरू हुए विरोध प्रदर्शन सरकार को गिराने की साजिश थे।

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अदालत का फैसला और न्यायपालिका पर सवाल

मंगलवार को दिए गए अपने फैसले में यूरोपीय मानवाधिकार अदालत ने माना कि ओस्मान कावाला की हिरासत गैरकानूनी थी और उनके निष्पक्ष सुनवाई, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा संगठन बनाने के अधिकारों का खुलेआम उल्लंघन हुआ है। अदालत ने अपने विश्लेषण में कहा कि यह मामला तुर्की के भीतर राजनीतिक विरोधियों, मानवाधिकार रक्षकों और पत्रकारों की लगातार हो रही गिरफ्तारी और मुकदमों की एक बड़ी संरचनात्मक कमजोरी को सामने लाता है। दूसरी ओर, तुर्की सरकार ने हमेशा यह दावा किया है कि देश की अदालतें पूरी तरह से स्वतंत्र हैं और न्यायसंगत तरीके से काम करती हैं।

गिरफ्तारी का लंबा सिलसिला और कानूनी पेचीदगियां

अदालत की नजर में ओस्मान कावाला तुर्की में नागरिक समाज पर हुई सरकारी कार्रवाई का एक बड़ा प्रतीक बन चुके हैं। उनकी गिरफ्तारी सबसे पहले अक्टूबर 2017 में हुई थी, जिसके बाद साल 2019 में भी यूरोपीय अदालत ने उनकी तत्काल रिहाई की मांग की थी और उनकी कैद को मनमाना बताया था, जिसे तुर्की ने लागू नहीं किया। हालांकि फरवरी 2020 में उन्हें बरी कर दिया गया था, लेकिन कुछ ही घंटों के भीतर उन्हें साल 2016 के असफल सैन्य तख्तापलट से जोड़ने वाले नए आरोपों के तहत फिर से गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद जनवरी 2021 में गेजी पार्क विरोध प्रदर्शनों से जुड़े उनके बरी होने के फैसले को पलट दिया गया और अप्रैल 2022 में उन्हें उम्रकैद की सजा सुना दी गई, जिसे अब इस यूरोपीय अदालत ने पूरी तरह खारिज कर दिया है।

एम्नेस्टी इंटरनेशनल की प्रतिक्रिया और तीखी आलोचना

नवीनतम फैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए एम्नेस्टी इंटरनेशनल की ईव गेडी ने कहा कि न्याय के साथ हो रहे इस खिलवाड़ को अब तुरंत रोका जाना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि तुर्की के न्यायिक और अभियोजन अधिकारियों समेत सभी संबंधित पक्षों को ओस्मान कावाला को बिना किसी शर्त के तुरंत आजाद करना चाहिए। पेरिस में जन्मे और ब्रिटेन में शिक्षा प्राप्त करने वाले ओस्मान कावाला अपनी गिरफ्तारी से पहले एक सांस्कृतिक केंद्र का संचालन करते थे। तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तय्यिप एर्दोआन ने अतीत में उन पर हंगेरियन मूल के अमेरिकी अरबपति जॉर्ज सोरोस के लिए एजेंट के रूप में काम करने का आरोप भी लगाया था।

आगे का राजनीतिक संघर्ष और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति

तुर्की ने इससे पहले ओस्मान कावाला के मामले में आए यूरोपीय अदालत के दो पुराने फैसलों को मानने से साफ इनकार कर दिया था और अब यह देखना बाकी है कि अंकारा सरकार इस तीसरे और बाध्यकारी आदेश पर अमल करती है या नहीं। यह विवाद अंकारा और स्ट्रासबourg के बीच हाल के दौर के सबसे गंभीर राजनयिक टकरावों में से एक बना हुआ है। यूरोप की परिषद अपने 46 सदस्य देशों द्वारा इन फैसलों के पालन की निगरानी करती है और यदि कोई देश कानून के शासन का गंभीर उल्लंघन करता है, तो परिषद के पास उसकी सदस्यता फ्रीज करने या मताधिकार निलंबित करने का अधिकार होता है। हालांकि तुर्की ने कई बड़े फैसलों की अनदेखी की है, लेकिन वह अभी भी इस संस्था का संस्थापक सदस्य बना हुआ है और इस प्रणाली से जुड़ा हुआ है। सितंबर के मध्य में होने वाली मंत्रियों की समिति की बैठक में ओस्मान कावाला के मामले को प्राथमिकता दिए जाने की पूरी संभावना है, हालांकि यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या वहां कोई कड़े दंडात्मक कदम उठाए जाते हैं या नहीं।

सवाल-जवाब

ओस्मान कावाला कौन हैं?
ओस्मान कावाला एक तुर्की कार्यकर्ता और परोपकारी हैं, जिन्हें लगभग एक दशक से जेल में रखा गया है।
यूरोपीय मानवाधिकार अदालत ने क्या फैसला सुनाया है?
अदालत ने तुर्की को ओस्मान कावाला को तुरंत और बिना शर्त रिहा करने का आदेश दिया है।
ओस्मान कावाला पर मुख्य रूप से क्या आरोप लगाए गए थे?
उन पर 2013 के राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शनों और 2016 के असफल तख्तापलट के प्रयासों से जुड़े आरोप लगाए गए थे।
तुर्की सरकार ने अदालती फैसलों पर क्या रुख अपनाया है?
तुर्की ने पहले के दो फैसलों का पालन करने से इनकार कर दिया था और देश की अदालतों की स्वतंत्रता पर जोर दिया है।
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