अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापारिक मोर्चे पर तनाव लगातार गहराता जा रहा है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक नया और चौंकाने वाला कदम उठाने के संकेत दिए हैं। ट्रंप ने मंगलवार को सार्वजनिक तौर पर कहा कि उनका प्रशासन लेक ओंटारियो का नाम बदलकर लेक अमेरिका करने की योजना पर बेहद गंभीरता से विचार कर रहा है। इस अनोखे और आक्रामक प्रस्ताव को सीधे तौर पर वॉशिंगटन और ओटावा के बीच खराब होते आर्थिक और कूटबारी संबंधों से जोड़कर देखा जा रहा है।
पुराने फैसलों की तर्ज पर नया कदम
झील का नाम बदलने का यह प्रस्ताव उस घटना के कुछ ही महीनों बाद सामने आया है जब डोनाल्ड ट्रंप ने एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के माध्यम से गल्फ ऑफ मेक्सिको का नाम बदलकर गल्फ ऑफ अमेरिका कर दिया था। उस फैसले ने दुनियाभर में सुर्खियां बटोरी थीं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी भारी राजनीतिक आलोचना भी हुई थी। अब एक बार फिर नाम बदलने की इस राजनीति से पड़ोसी देशों के बीच कूटनीतिक पारा चढ़ गया है।
व्यापारिक विवाद और टैरिफ की मार
ट्रंप की यह ताज़ा चेतावनी ऐसे समय में सामने आई है जब दोनों देशों के बीच ट्रेड वॉर तेज हो गया है। हाल ही में सप्ताहांत के दौरान ट्रंप प्रशासन ने कनाडा से आने वाले 20 अरब डॉलर के सामान पर 50 प्रतिशत भारी-भरकम टैरिफ थोप दिया था। इसके जवाब में कनाडा द्वारा मंगलवार को कड़े कदम उठाने और जवाबी कार्रवाई की घोषणा किए जाने की पूरी संभावना जताई जा रही थी। इसी पृष्ठभूमि में ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपनी बात रखते हुए लिखा कि अमेरिका लेक ओंटारियो का नाम बदलने पर विचार कर रहा है क्योंकि अब उन्हें ओंटारियो के साथ किसी भी तरह के बड़े व्यापार की उम्मीद नहीं बची है।
ओंटारियो का आर्थिक महत्व
भौगोलिक और आर्थिक रूप से देखें तो लेक ओंटारियो की सीमाएं अमेरिका और कनाडा दोनों देशों को छूती हैं और यह क्षेत्र दोनों तरफ की स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं की रीढ़ माना जाता है। खासकर ओंटारियो प्रांत कनाडा का सबसे अधिक आबादी वाला क्षेत्र होने के साथ-साथ देश में ऑटोमोबाइल निर्माण का सबसे बड़ा और प्रमुख केंद्र भी है। ऐसे में इस क्षेत्र से जुड़े आर्थिक फैसले दोनों देशों के बाजारों पर गहरा असर डालते हैं।
कनाडा को कड़ी चेतावनी और प्रधानमंत्री का पलटवार
दोनों पड़ोसी देशों के बीच जुबानी जंग भी अपने चरम पर पहुंच चुकी है। इससे पहले सोमवार को डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडाई नेतृत्व को सीधे शब्दों में चेतावनी दी थी कि वे उनकी बात मान लें यानी लाइन पर आएं, वरना उन्हें ऐसे अंजाम भुगतने होंगे जो पहले लगाए गए शुल्कों से भी कहीं अधिक बुरे साबित होंगे। उन्होंने कनाडा की गाड़ियों, ऑटो पार्ट्स और स्टील सेक्टर पर भी 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने की खुली धमकी दे डाली है। दूसरी ओर, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने वॉशिंगटन पर यह गंभीर आरोप लगाया है कि अमेरिका अपनी व्यापारिक और आर्थिक मांगों के दम पर कनाडा को अपने अधीन करने की साजिश रच रहा है।



















