वेनेजुएला में आए भूकंप ने पहले से राजनीतिक उठापटक से जूझ रहे इस दक्षिण अमेरिकी देश को और गहरे संकट में धकेल दिया है। राजधानी काराकास समेत देश के कई शहरों में मलबे के ढेर अब भी लोगों की तलाश में खंगाले जा रहे हैं। भूकंप को आए एक हफ्ता ही बीता है और सरकार के हवाले से मरने वालों की संख्या 2954 तक पहुंच चुकी है। करीब 16000 लोग अपने घर गंवाकर राहत शिविरों में शरण लिए हुए हैं, जबकि 41000 से ज्यादा लोगों का अब तक कोई पता नहीं चल पाया है।
बचाव अभियान में जुटीं देश-विदेश की टीमें
तबाही के बाद बचाव और राहत कार्य में करीब 30000 सरकारी कर्मचारी दिन रात जुटे हुए हैं। इनके साथ 3281 अंतरराष्ट्रीय रेस्क्यू वर्कर्स भी वेनेजुएला पहुंचकर मलबे में फंसे लोगों को निकालने में मदद कर रहे हैं। घायलों के इलाज के लिए बनाए गए फील्ड अस्पताल में अब तक 400 मरीज भर्ती हो चुके हैं और वहां लगभग 30 सर्जरी भी पूरी की जा चुकी हैं। इस अस्पताल के मेडिकल डायरेक्टर पीटर होल्ज ने बताया कि शुरुआती दिनों में ज्यादातर मरीज भूकंप के मलबे से लगी चोटों के साथ पहुंच रहे थे। अब टीम का ध्यान सर्जरी के बाद मरीजों की देखभाल और लंबे इलाज पर केंद्रित हो गया है।
55 घंटे मलबे में दबे रहे, फिर भी हार नहीं मानी
इसी तबाही के बीच जुआन जापाटा नाम के एक शख्स की बचने की कहानी लोगों के लिए हिम्मत की मिसाल बन गई है। जुआन ने बताया कि हादसे वाले दिन वह रात का खाना खाकर नहाने जाने की तैयारी में थे, तभी तेज झटकों ने उन्हें कमरे के एक कोने से दूसरे कोने तक फेंक दिया। जब कुछ देर बाद उनकी आंख खुली तो वह अपने पांचवें मंजिल वाले फ्लैट में नहीं बल्कि गिरी हुई इमारत के मलबे के नीचे दबे हुए थे। करीब 55 घंटे तक वह उसी मलबे में फंसे रहे, जब तक नागरिक बचाव दल उन तक नहीं पहुंचा और उन्हें जिंदा बाहर निकाला गया। फिलहाल जुआन जापाटा को ला गुआइरा के अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टरों ने बताया कि उनकी कई पसलियां टूटी हैं और शरीर पर गहरे घाव भी हैं। इसके बावजूद जुआन का कहना है कि उनका घर और उनकी सारी जमा पूंजी भले ही खत्म हो गई हो, लेकिन खुद जिंदा बच निकलना ही उनके लिए सबसे बड़ी बात है। भूकंप में उनका मोबाइल फोन और पहचान पत्र भी मलबे में कहीं खो गया, जिस वजह से वह अमेरिका में रहने वाली अपनी बेटी और कनाडा में रहने वाली अपनी बहन से अब तक संपर्क नहीं कर पाए हैं।
राहत कार्यों की रफ्तार पर उठते सवाल
भूकंप के बाद से सरकार की राहत व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। कई स्थानीय निवासियों और स्वयंसेवकों का आरोप है कि शुरुआती दिनों में राहत सामग्री, जरूरी दवाइयां और मलबा हटाने वाली भारी मशीनें समय पर मौके तक नहीं पहुंच पाईं। हालांकि सरकार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। इस बीच कई इलाकों में आम नागरिक और बचाव दल मिलकर अब भी मलबे में फंसे लोगों की तलाश में जुटे हुए हैं। जो लोग बच निकलने में कामयाब रहे, वे भी अपने लापता परिजनों की खबर का इंतजार कर रहे हैं और कई परिवार अब भी राहत टीमों के साथ मिलकर अपनों की तलाश में लगे हुए हैं।













