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मलबे के नीचे 55 घंटे तक जिंदा बचे रहने की कहानी, वेनेजुएला भूकंप में मौत के आंकड़े के बीच एक चमत्कारदुनिया
2 घंटे पहले· 2

मलबे के नीचे 55 घंटे तक जिंदा बचे रहने की कहानी, वेनेजुएला भूकंप में मौत के आंकड़े के बीच एक चमत्कार

वेनेजुएला में आए भूकंप में मरने वालों की संख्या 2954 हो गई है, 16000 लोग बेघर और 41000 से ज्यादा लापता हैं, वहीं जुआन जापाटा नाम के शख्स ने 55 घंटे मलबे में दबे रहने के बाद जिंदगी की जंग जीत ली।

उमर अल मंसूरीउमर अल मंसूरीमध्य पूर्व संवाददाता 3 मिनट पढ़ें AI के लिए
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वेनेजुएला में आए भूकंप ने पहले से राजनीतिक उठापटक से जूझ रहे इस दक्षिण अमेरिकी देश को और गहरे संकट में धकेल दिया है। राजधानी काराकास समेत देश के कई शहरों में मलबे के ढेर अब भी लोगों की तलाश में खंगाले जा रहे हैं। भूकंप को आए एक हफ्ता ही बीता है और सरकार के हवाले से मरने वालों की संख्या 2954 तक पहुंच चुकी है। करीब 16000 लोग अपने घर गंवाकर राहत शिविरों में शरण लिए हुए हैं, जबकि 41000 से ज्यादा लोगों का अब तक कोई पता नहीं चल पाया है।

बचाव अभियान में जुटीं देश-विदेश की टीमें

तबाही के बाद बचाव और राहत कार्य में करीब 30000 सरकारी कर्मचारी दिन रात जुटे हुए हैं। इनके साथ 3281 अंतरराष्ट्रीय रेस्क्यू वर्कर्स भी वेनेजुएला पहुंचकर मलबे में फंसे लोगों को निकालने में मदद कर रहे हैं। घायलों के इलाज के लिए बनाए गए फील्ड अस्पताल में अब तक 400 मरीज भर्ती हो चुके हैं और वहां लगभग 30 सर्जरी भी पूरी की जा चुकी हैं। इस अस्पताल के मेडिकल डायरेक्टर पीटर होल्ज ने बताया कि शुरुआती दिनों में ज्यादातर मरीज भूकंप के मलबे से लगी चोटों के साथ पहुंच रहे थे। अब टीम का ध्यान सर्जरी के बाद मरीजों की देखभाल और लंबे इलाज पर केंद्रित हो गया है।

55 घंटे मलबे में दबे रहे, फिर भी हार नहीं मानी

इसी तबाही के बीच जुआन जापाटा नाम के एक शख्स की बचने की कहानी लोगों के लिए हिम्मत की मिसाल बन गई है। जुआन ने बताया कि हादसे वाले दिन वह रात का खाना खाकर नहाने जाने की तैयारी में थे, तभी तेज झटकों ने उन्हें कमरे के एक कोने से दूसरे कोने तक फेंक दिया। जब कुछ देर बाद उनकी आंख खुली तो वह अपने पांचवें मंजिल वाले फ्लैट में नहीं बल्कि गिरी हुई इमारत के मलबे के नीचे दबे हुए थे। करीब 55 घंटे तक वह उसी मलबे में फंसे रहे, जब तक नागरिक बचाव दल उन तक नहीं पहुंचा और उन्हें जिंदा बाहर निकाला गया। फिलहाल जुआन जापाटा को ला गुआइरा के अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टरों ने बताया कि उनकी कई पसलियां टूटी हैं और शरीर पर गहरे घाव भी हैं। इसके बावजूद जुआन का कहना है कि उनका घर और उनकी सारी जमा पूंजी भले ही खत्म हो गई हो, लेकिन खुद जिंदा बच निकलना ही उनके लिए सबसे बड़ी बात है। भूकंप में उनका मोबाइल फोन और पहचान पत्र भी मलबे में कहीं खो गया, जिस वजह से वह अमेरिका में रहने वाली अपनी बेटी और कनाडा में रहने वाली अपनी बहन से अब तक संपर्क नहीं कर पाए हैं।

राहत कार्यों की रफ्तार पर उठते सवाल

भूकंप के बाद से सरकार की राहत व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। कई स्थानीय निवासियों और स्वयंसेवकों का आरोप है कि शुरुआती दिनों में राहत सामग्री, जरूरी दवाइयां और मलबा हटाने वाली भारी मशीनें समय पर मौके तक नहीं पहुंच पाईं। हालांकि सरकार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। इस बीच कई इलाकों में आम नागरिक और बचाव दल मिलकर अब भी मलबे में फंसे लोगों की तलाश में जुटे हुए हैं। जो लोग बच निकलने में कामयाब रहे, वे भी अपने लापता परिजनों की खबर का इंतजार कर रहे हैं और कई परिवार अब भी राहत टीमों के साथ मिलकर अपनों की तलाश में लगे हुए हैं।

इसका आप पर असर

यह वेनेजुएला में आई प्राकृतिक आपदा से जुड़ी खबर है, इसका सीधा असर भारत में रहने वाले लोगों पर नहीं पड़ता।

  • जिनके परिजन या परिचित वेनेजुएला, विशेषकर काराकास या ला गुआइरा में रहते हैं, वे राहत शिविरों और हॉटलाइनों के जरिए उनकी कुशलक्षेम की जानकारी ले सकते हैं।
  • यह घटना बताती है कि आपदा के दौरान पहचान पत्र और जरूरी दस्तावेजों की सुरक्षित या डिजिटल कॉपी रखना कितना जरूरी है, ताकि परिवार से संपर्क बना रहे।

प्रेरणा और सीख

जुआन जापाटा की कहानी बताती है कि सबसे मुश्किल हालात में भी हिम्मत बनाए रखना क्यों जरूरी है।

  • 55 घंटे मलबे में दबे रहने के बावजूद जुआन ने उम्मीद नहीं छोड़ी, जो बताता है कि धैर्य और जीवित रहने की इच्छा किसी भी हालात में सबसे बड़ा हथियार है।
  • घर और संपत्ति खोने के बाद भी उन्होंने जिंदा बचने को सबसे बड़ी उपलब्धि माना, यह सिखाता है कि भौतिक नुकसान से ज्यादा जिंदगी की कीमत होती है।
  • नागरिक बचाव दल की मेहनत से उनकी जान बची, जो दिखाता है कि आपदा में सामूहिक प्रयास और रेस्क्यू टीमों का समय पर पहुंचना कितना निर्णायक हो सकता है।

सवाल-जवाब

वेनेजुएला भूकंप में अब तक कितने लोगों की मौत हो चुकी है?
सरकार के मुताबिक भूकंप में मरने वालों की संख्या बढ़कर 2954 हो गई है।
कितने लोग बेघर हुए हैं और कितने लापता हैं?
करीब 16000 लोग बेघर होकर राहत शिविरों में रह रहे हैं, जबकि 41000 से ज्यादा लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
राहत और बचाव कार्य में कितने लोग जुटे हैं?
करीब 30000 सरकारी कर्मचारियों के साथ 3281 अंतरराष्ट्रीय रेस्क्यू वर्कर्स भी बचाव कार्य में लगे हुए हैं।
जुआन जापाटा कितने घंटे मलबे में फंसे रहे?
जुआन जापाटा करीब 55 घंटे तक मलबे में फंसे रहे, इसके बाद नागरिक बचाव दल ने उन्हें जिंदा बाहर निकाला।
जुआन जापाटा को क्या चोटें आईं?
उनकी कई पसलियां टूट गईं और शरीर पर गहरे घाव आए हैं, फिलहाल उनका इलाज ला गुआइरा के अस्पताल में चल रहा है।
जुआन जापाटा अपने परिवार से संपर्क क्यों नहीं कर पा रहे हैं?
भूकंप में उनका फोन और पहचान पत्र खो गया, जिससे वह अमेरिका में रहने वाली बेटी और कनाडा में रहने वाली बहन से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं।
फील्ड अस्पताल में अब तक कितने मरीजों का इलाज हुआ है?
फील्ड अस्पताल में अब तक 400 मरीजों का इलाज हो चुका है और करीब 30 सर्जरी भी की जा चुकी हैं।
राहत व्यवस्था को लेकर क्या सवाल उठे हैं?
स्थानीय लोगों और वॉलंटियर्स का आरोप है कि शुरुआती दिनों में राहत सामग्री, दवाइयां और भारी मशीनें समय पर नहीं पहुंचीं, हालांकि सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया है।
उमर अल मंसूरी
लेखक के बारे मेंउमर अल मंसूरीमध्य पूर्व संवाददाता दुबई
विशेषज्ञतामध्य पूर्व समाचार, भू-राजनीति, राजनीति, अर्थव्यवस्था, ऊर्जा बाज़ार, तेल एवं गैस, अंतरराष्ट्रीय संबंध, कूटनीति, संघर्ष रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग न्यूज़

उमर अल मंसूरी एक मध्य पूर्व संवाददाता हैं जो क्षेत्रीय राजनीति, संघर्ष अपडेट, अर्थव्यवस्था, ऊर्जा बाज़ार और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को कवर करते हैं। वे पूरे मध्य पूर्व के अहम घटनाक्रमों पर समय पर विश्लेषण देते हैं।

उमर अल मंसूरी एक मध्य पूर्व संवाददाता हैं जो पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र के राजनीतिक घटनाक्रमों, भू-राजनीतिक मामलों, आर्थिक रुझानों, ऊर्जा बाज़ारों और ब्रेकिंग न्यूज़ में विशेषज्ञता रखते हैं। वे बड़ी क्षेत्रीय घटनाओं — सरकारी नीति परिवर्तन, कूटनीतिक संबंध, संघर्ष, व्यापार घटनाक्रम और सामाजिक-आर्थिक बदलाव — पर रिपोर्ट करते हैं। सटीकता, संदर्भ और संतुलित रिपोर्टिंग पर मज़बूत ज़ोर के साथ उमर मध्य पूर्व और उसके वैश्विक प्रभाव को आकार देने वाले मुद्दों की गहन कवरेज देते हैं। उनका काम ऊर्जा क्षेत्रों, अंतरराष्ट्रीय कूटनीति, सुरक्षा मामलों और क्षेत्रीय सहयोग के घटनाक्रमों को उजागर करता है और पाठकों को क्षेत्र की जटिल गतिशीलता समझने में मदद करता है।

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