रूस और जर्मनी के बीच बाल्टिक सागर के नीचे बिछी नोर्ड स्ट्रीम गैस पाइपलाइन में हुए भीषण धमाकों की जांच में एक नया मोड़ आया है। क्रोएशियाई अधिकारियों ने उस संदिग्ध यूक्रेनी नागरिक को गिरफ्तार कर लिया है जिस पर समुद्र की गहराई में विस्फोटक लगाने का आरोप है। जर्मन अभियोजकों के अनुसार यह व्यक्ति उन प्रशिक्षित स्कूबा डाइवर्स के समूह का हिस्सा था जिन्होंने सितंबर 2022 में इस दुस्साहसिक हमले को अंजाम दिया था। यह कार्रवाई रूस द्वारा यूक्रेन पर पूर्ण स्तर पर किए गए आक्रमण के बाद घटी उस घटना की कड़ी है जिसने पूरे यूरोप के ऊर्जा परिदृश्य और अंतरराष्ट्रीय राजनीति को हिलाकर रख दिया था।
दूसरे प्रमुख संदिग्ध की गिरफ्तारी और राजनयिक प्रभाव
इस बड़े मामले में यह दूसरी महत्वपूर्ण गिरफ्तारी मानी जा रही है। जर्मन अधिकारियों ने शुरुआती कानूनी दस्तावेजों में इस व्यक्ति की पहचान केवल प्रशिक्षित स्कूबा डाइवर वलोडिमिर जे के रूप में की है, लेकिन व्यापक तौर पर यह माना जा रहा है कि यह वही वोलोडिमिर ज़ुरावल्योव है जिसे वर्ष 2025 में पोलैंड में हिरासत में लिया गया था। उस समय पोलैंड की एक अदालत ने जर्मनी के सुपुर्दगी अनुरोध को साफ तौर पर खारिज कर दिया था। पोलिश न्यायाधीश ने अपने फैसले में तर्क दिया था कि यदि इस हमले के पीछे यूक्रेन का हाथ था भी, तो इसे एक न्यायसंगत कदम माना जाना चाहिए। इस पूरे घटनाक्रम ने कीव और बर्लिन के बीच संबंधों में तनाव पैदा कर दिया है, जबकि जर्मनी युद्ध के दौरान यूक्रेन के सबसे प्रमुख यूरोपीय समर्थकों में से एक रहा है।
रोस्टॉक यॉट की कहानी और सर्गेई कुजनेत्सोव का मुकदमा
नोर्ड स्ट्रीम साजिश में शामिल एक अन्य मुख्य अभियुक्त पूर्व यूक्रेनी सैन्य अधिकारी सर्गेई कुजनेत्सोव है। उसे अगस्त 2025 में इटली में गिरफ्तार किया गया था और बाद में मुकदमे का सामना करने के लिए जर्मनी प्रत्यर्पित कर दिया गया था। जून में हैम्बर्ग की एक अदालत में पेश हुए कुजनेत्सोव ने धमाकों की जिम्मेदारी से पूरी तरह इनकार किया है। जर्मन अभियोजक पक्ष का दावा है कि कुजनेत्सोव ने ही उस टीम का नेतृत्व किया था जिसने जर्मनी के रोस्टॉक बंदरगाह से एक यॉट किराए पर ली थी। इसी यॉट की मदद से टीम बाल्टिक सागर में डेनमार्क के बोर्नहोम द्वीप के पास पहुंची और समुद्र की तलहटी में पाइपलाइनों पर विस्फोटक सामग्री तैनात की। इस हमले के परिणामस्वरूप चार में से तीन नोर्ड स्ट्रीम पाइपलाइन पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई थीं।
पाइपलाइन का ढांचा और भू-राजनीतिक पृष्ठभूमि
धमाके के समय नोर्ड स्ट्रीम 1 पाइपलाइन के जरिए जर्मनी को गैस की आपूर्ति की जा रही थी, जबकि नोर्ड स्ट्रीम 2 का निर्माण कार्य पूरा होने के बाद भी इसे व्यावसायिक रूप से शुरू नहीं किया गया था। इस हमले के बाद शुरुआती दौर में पश्चिमी देशों का ध्यान मास्को पर शक की ओर गया था, लेकिन जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, यूक्रेनी समूहों की संलिप्तता के संकेत मिलने लगे। हालांकि कीव के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस तरह की किसी भी कार्रवाई में राज्य की भूमिका से बार-बार इनकार किया है। दूसरी ओर पोलैंड इस पाइपलाइन परियोजना का लंबे समय से कड़ा विरोधी रहा है। वारसॉ का मानना था कि इस सीधे ऊर्जा मार्ग से बर्लिन की मास्को पर निर्भरता अत्यधिक बढ़ जाएगी और साथ ही पोलैंड को मिलने वाले भारी-भरकम गैस ट्रांजिट शुल्क का नुकसान होगा। यूक्रेन और अमेरिका ने भी इस पाइपलाइन प्रणाली का शुरू से ही कड़ा विरोध किया था।
सुपुर्दगी की प्रक्रिया और आगे की कानूनी कार्यवाही
क्रोएशिया से सुपुर्दगी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद संदिग्ध वलोडिमिर जे को जर्मनी लाया जाएगा, जहां उसे जांच न्यायाधीश के सामने पेश किया जाएगा। वहां उस पर सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, विस्फोटक से तबाही मचाने और राज्य के खिलाफ तोड़फोड़ करने के गंभीर आरोप तय किए जाएंगे। इस मुकदमे के नतीजों पर न केवल जर्मन और यूक्रेनी नेतृत्व की नजरें टिकी हैं, बल्कि यह पूरे यूरोपीय संघ की भावी ऊर्जा सुरक्षा और कूटनीतिक संतुलन के लिहाज से भी एक अत्यंत संवेदनशील मामला बन चुका है।



















