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नोविचोक और एपिबैटिडाइन पर काम के आरोप में ब्रिटेन ने सात रूसी वैज्ञानिकों और दो सरकारी संस्थानों पर लगाए प्रतिबंधदुनिया
2 घंटे पहले· 2

नोविचोक और एपिबैटिडाइन पर काम के आरोप में ब्रिटेन ने सात रूसी वैज्ञानिकों और दो सरकारी संस्थानों पर लगाए प्रतिबंध

ब्रिटेन ने प्रतिबंधित रासायनिक हथियारों पर काम करने के आरोप में सात लोगों और दो रूसी शोध संस्थानों पर पाबंदियां लगाई हैं, जिनका संबंध नोविचोक और एपिबैटिडाइन जैसे घातक जहरों से जोड़ा गया है।

रविकाश गुप्तारविकाश गुप्तावरिष्ठ संवाददाता 4 मिनट पढ़ें AI के लिए
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ब्रिटेन ने प्रतिबंधित रासायनिक हथियारों पर काम करने के आरोप में सात लोगों और दो रूसी शोध संस्थानों के खिलाफ प्रतिबंधों का नया दौर शुरू कर दिया है। यूके के विदेश, राष्ट्रमंडल एवं विकास कार्यालय (एफसीडीओ) के मुताबिक ये कदम दो जानलेवा जहरीले पदार्थों, एपिबैटिडाइन और नोविचोक से जुड़ी गतिविधियों को निशाना बनाकर उठाए गए हैं। ब्रिटेन का कहना है कि इन्हीं पदार्थों का इस्तेमाल 2024 में साइबेरिया और 2018 में विल्टशायर में हुई जहर देने की घटनाओं में किया गया था।

यूके ने साफ कहा है कि यह पूरी कवायद जहरीले रसायनों को विकसित करने और बनाने से जुड़े रूसी नागरिकों को निशाना बनाती है। ब्रिटेन के अनुसार इस तरह का काम केमिकल वेपन्स कन्वेंशन के तहत प्रतिबंधित मकसद के लिए किया जा रहा था, यानी यह अंतरराष्ट्रीय संधि का सीधा उल्लंघन है।

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किन संस्थानों और लोगों पर गिरी गाज

जिन दो संस्थानों पर पाबंदी लगी है उनमें पहला एससी सिग्नल है, जिसे एक रूसी सरकारी वैज्ञानिक शोध संस्थान बताया गया है। दूसरा संस्थान जीएनआईआईआई वीएम है, जिसका पूरा नाम स्टेट साइंटिफिक रिसर्च एंड टेस्टिंग इंस्टिट्यूट फॉर मिलिट्री मेडिसिन है। यूके का दावा है कि ये दोनों ही संस्थान प्रतिबंधित रासायनिक हथियारों के शोध से जुड़ी गतिविधियों में शामिल रहे हैं।

प्रतिबंधित किए गए लोगों की सूची में व्लादिमीर कोंद्रात्येव, आंद्रेई अंतोखिन और विक्टर तरानचेंको के नाम शामिल हैं। ब्रिटेन के मुताबिक कोंद्रात्येव एपिबैटिडाइन के परीक्षण पर लिखे गए एक शोधपत्र के सह-लेखक रहे हैं, जिसमें इस पदार्थ के जहरीले असर की पड़ताल की गई थी। वहीं अंतोखिन और तरानचेंको पर नोविचोक नर्व एजेंट पर शोध करने का आरोप है।

जिन घटनाओं ने प्रतिबंधों की नींव रखी

ब्रिटेन ने इन प्रतिबंधों को उन बदनाम जहर कांडों से जोड़ा है जिन्होंने पिछले सालों में दुनिया भर में हलचल मचाई। एफसीडीओ ने बताया कि यह ऐलान तुर्की में मंगलवार से शुरू हो रहे नाटो शिखर सम्मेलन से ठीक पहले किया गया है। मकसद साफ है, रूस से जुड़ी उन गतिविधियों को उजागर करना जिन्हें अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ माना जा रहा है।

यवेट कूपर की सख्त चेतावनी

यूके की विदेश सचिव यवेट कूपर ने बेहद कड़े शब्दों में रूस पर हमला बोला। उन्होंने कहा, "रूस का बार-बार रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय कानून का घिनौना उल्लंघन है और वैश्विक सुरक्षा के लिए सीधा खतरा है। सैलिसबरी में नोविचोक नर्व एजेंट के इस्तेमाल से लेकर साइबेरिया में एपिबैटिडाइन तक, डॉन स्टर्जेस और एलेक्सी नवलनी को जहर देने तक, रूस बेगुनाह नागरिकों को मौत और तकलीफ देने के लिए बर्बर हथियारों का इस्तेमाल जारी रखे हुए है, जिसमें यूक्रेन भी शामिल है।"

कूपर ने आगे कहा, "हम रूस के केमिकल वेपन्स कन्वेंशन के उल्लंघनों को उजागर करते रहेंगे, जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराएंगे और इन खतरनाक हथियारों के आगे इस्तेमाल को रोकने के लिए सहयोगियों के साथ मिलकर काम करेंगे।"

नवलनी की मौत और बड़ा अभियान

एफसीडीओ के मुताबिक ये प्रतिबंध अवैध रासायनिक हथियार गतिविधियों को बेनकाब करने और रोकने की ब्रिटेन की बड़ी कोशिश का हिस्सा हैं। यूके ने इस कदम को फरवरी में हुए म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस की चर्चाओं से भी जोड़ा। ब्रिटेन का कहना है कि वहां मौजूद साझेदार देश रूसी हिरासत में एलेक्सी नवलनी की मौत के इर्द-गिर्द के घिनौने हालात की पुष्टि करने के लिए एकजुट हुए थे।

एफसीडीओ ने कहा, "केवल रूसी राज्य के पास ही नवलनी को निशाना बनाने के लिए इस जानलेवा जहर को तैनात करने का साधन, मकसद और मौका था, और यूके उसे उनकी मौत के लिए जिम्मेदार मानता है।" कार्यालय ने यह भी दोहराया कि 2018 में विल्टशायर में ब्रिटिश नागरिक डॉन स्टर्जेस को जहर देने के लिए नोविचोक का इस्तेमाल किया गया था।

नाटो सम्मेलन और यूक्रेन की मदद

ब्रिटेन ने कहा है कि वह इस हफ्ते अंकारा में हो रहे नाटो शिखर सम्मेलन में अपने सहयोगियों के साथ काम करता रहेगा। एफसीडीओ के अनुसार इन चर्चाओं में यूक्रेन को दी जाने वाली सैन्य मदद और उसकी रक्षा-व्यवस्था को मजबूत करने के कदमों पर बात होगी। यूके ने यह भी दोहराया कि नाटो रूस के खिलाफ अपने नागरिकों की रक्षा के लिए हमेशा तैयार है।

3,400 से ज्यादा नामों की फेहरिस्त

ब्रिटेन ने बताया कि रूस-यूक्रेन संघर्ष के जवाब में उसने अब तक 3,400 से अधिक लोगों और संगठनों पर प्रतिबंध लगाए हैं। ताजा कदमों के साथ रासायनिक हथियारों के शोध और उनके कथित इस्तेमाल को भी इसी सूची में जोड़ दिया गया है। यूके का कहना है कि वह केमिकल वेपन्स कन्वेंशन के ढांचे के तहत अपने सहयोगियों के साथ मिलकर आगे भी कार्रवाई जारी रखेगा।

इसका आप पर असर

  • वैश्विक सुरक्षा के लिए: रासायनिक हथियारों को लेकर रूस और पश्चिमी देशों के बीच तनाव और बढ़ सकता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय राजनयिक माहौल और गरम होगा।
  • आम पाठकों के लिए: ये प्रतिबंध सीधे तौर पर आपकी रोजमर्रा की जिंदगी को नहीं छूते, लेकिन यह दिखाते हैं कि नोविचोक और एपिबैटिडाइन जैसे जहरों को लेकर वैश्विक कार्रवाई कैसे तेज हो रही है।

सवाल-जवाब

ब्रिटेन ने किन पर प्रतिबंध लगाए हैं?
ब्रिटेन ने सात लोगों और दो रूसी शोध संस्थानों, एससी सिग्नल और जीएनआईआईआई वीएम, पर प्रतिबंध लगाए हैं।
ये प्रतिबंध किन पदार्थों से जुड़े हैं?
ये प्रतिबंध दो जहरीले पदार्थों, एपिबैटिडाइन और नोविचोक से जुड़ी गतिविधियों को निशाना बनाकर लगाए गए हैं।
किन लोगों के नाम प्रतिबंधित सूची में हैं?
सूची में व्लादिमीर कोंद्रात्येव, आंद्रेई अंतोखिन और विक्टर तरानचेंको के नाम शामिल हैं।
इन जहरों का इस्तेमाल कहां हुआ था?
ब्रिटेन के मुताबिक इनका इस्तेमाल 2024 में साइबेरिया और 2018 में विल्टशायर में हुई जहर देने की घटनाओं में किया गया था।
यवेट कूपर कौन हैं और उन्होंने क्या कहा?
यवेट कूपर यूके की विदेश सचिव हैं, जिन्होंने रूस के रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल को अंतरराष्ट्रीय कानून का घिनौना उल्लंघन और वैश्विक सुरक्षा के लिए सीधा खतरा बताया।
ब्रिटेन ने अब तक कुल कितने प्रतिबंध लगाए हैं?
ब्रिटेन ने रूस-यूक्रेन संघर्ष के जवाब में अब तक 3,400 से अधिक लोगों और संगठनों पर प्रतिबंध लगाए हैं।
रविकाश गुप्ता
लेखक के बारे मेंरविकाश गुप्तावरिष्ठ संवाददाता लखनऊ
विशेषज्ञताभारत समाचार, वैश्विक बिज़नेस, वित्तीय बाज़ार, क्रिप्टोकरेंसी, ब्लॉकचेन, शेयर बाज़ार विश्लेषण, कॉर्पोरेट न्यूज़, स्टार्टअप, आर्थिक रुझान, डिजिटल एसेट्स, निवेश अंतर्दृष्टि

रविकाश गुप्ता एक वरिष्ठ संवाददाता एवं संपादक हैं जो भारत की ख़बरों, वैश्विक बिज़नेस, वित्तीय बाज़ार और क्रिप्टोकरेंसी को कवर करते हैं। वे आर्थिक रुझानों, क्रिप्टो घटनाक्रमों और दुनियाभर की बड़ी बाज़ार-हलचल वाली घटनाओं पर रिपोर्ट करते हैं।

रविकाश गुप्ता एक वरिष्ठ संवाददाता एवं संपादक हैं जो भारत-केंद्रित रिपोर्टिंग और बिज़नेस, वित्तीय बाज़ार व क्रिप्टोकरेंसी की वैश्विक कवरेज में विशेषज्ञता रखते हैं। वे ब्रेकिंग न्यूज़, आर्थिक घटनाक्रम, कॉर्पोरेट मामले, शेयर बाज़ार, ब्लॉकचेन नवाचार और आधुनिक वित्तीय तंत्र को आकार देने वाले डिजिटल एसेट रुझान कवर करते हैं। स्पष्टता, विश्लेषण और समय पर रिपोर्टिंग पर मज़बूत ज़ोर के साथ रविकाश वैश्विक आर्थिक बदलावों, उभरती तकनीकों, स्टार्टअप इकोसिस्टम और बदलते क्रिप्टो परिदृश्य की अंतर्दृष्टि देते हैं। उनका काम व्यापक आर्थिक रुझानों को वास्तविक बाज़ार असर से जोड़ता है और पाठकों को पारंपरिक वित्त व डिजिटल एसेट्स की तेज़ी से बदलती दुनिया — दोनों समझने में मदद करता है।

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